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15 को रामनगरी आएंगे आदित्य ठाकरे, रामलला के दर्शन के बाद सरयू आरती में होंगे शामिल


अयोध्या, 11 जून 2022 : रामजन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के साथ रामनगरी का रुतबा आस्था के साथ राजनीतिक क्षितिज पर भी बढ़ता जा रहा है। यह सच्चाई जून माह के दौरान पूरी शिद्दत से परिभाषित हुई। मनसे प्रमुख राज ठाकरे का पांच जून को प्रस्तावित दौरा विरोध के चलते संभव नहीं हो सका, लेकिन यह स्पष्ट हो गया कि हिंदुत्‍व और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का मुद्दा हथियाने के लिए राजनीतिज्ञ किस कदर ललक रहे हैं।

हालांकि उत्तर भारतीयोंके उत्पीड़न केसवाल पर भाजपासांसद और कुश्तीसंघ के राष्ट्रीयअध्यक्ष बृजभूषण सिंह केनेतृत्व में विरोधके चलते राजठाकरे अयोध्या नहींआ सके, किंतुउनके प्रस्तावित आगमनके दूसरे दिनही उनके भतीजेऔर महाराष्ट्र सरकारके मंत्री आदित्यठाकरे की अयोध्याआगमन की तारीखजरूर तय होगई। शिवसेना केराष्ट्रीय प्रवक्ता एवं राज्यसभासदस्य संजय राउततथा महाराष्ट्र सरकारके नगर विकासमंत्री एकनाथ शिंदे नेआदित्य के अयोध्याआगमन की घोषणामुंबई से अयोध्याआकर की।

इस घोषणाके साथ शिवसेनाके प्रतिनिधि मंडलने रामलला औररामनगरी के प्रतिआस्था ज्ञापित करनेमें भी कोईकसर नहीं छोड़ीऔर यह भीबताया कि 15 जूनको शिवसेना प्रमुखएवं महाराष्ट्र केमुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे केपुत्र आदित्य ठाकरेअयोध्या यात्रा के दौरानआस्था से ओत-प्रोत रहेंगे। वहरामलला का दर्शनकरने के साथपुण्य सलिला सरयूकी आरती भीकरेंगे।

आदित्य के अयोध्याआगमन से पूर्व 12 जून को मुख्यमंत्रीयोगी आदित्यनाथ अपनीदूसरी पारी केढाई माह केभीतर चौथी बाररामनगरी में होंगे।वह रामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्षमहंत नृत्य गोपालदासके 84वें जन्मोत्सवसमारोह में शामिलहोने आ रहेहैं। लेकिन यहतय है किहर बार कीतरह इस यात्रमें भी वहरामलला एवं बजरंगबलीके सामने श्रद्धावनतहोंगे।

2017 से मार्च 2022 तक के प्रथमकार्यकाल में मुख्यमंत्रीने 40 से अधिकबार रामनगरी कीयात्र की थी।महंत नृत्यगोपालदास केजन्मोत्सव के हीसंबंध में उपमुख्यमंत्री केशवप्रसाद मौर्य शुक्रवारको रामनगरी मेंथे। राजनीतिक विश्लेषकएवं साकेत महाविद्यालयमें राजनीति विज्ञानविभाग के पूर्वअध्यक्ष डा. आरकेजायसवाल के अनुसारमंदिर निर्माण केसाथ करोड़ों रामभक्त रामनगरी केप्रति उत्सुक हुएहैं और इनराम भक्तों कोसाधने के लिएराजनीतिज्ञों का अयोध्याकी ओर उन्मुखहोना सहज-स्वाभाविकएवं सुविधाजनक है।इस चलन सेयह भी परिभाषितहै कि आजकी राजनीति अल्पसंख्यकोंकी बजाय बहुसंख्यकोंपर केंद्रित होचली है।

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