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लद्दाख बार्डर पर हिंसक झड़प के बाद भारत के कई सैनिक लापता, चीन के 40 से ज्यादा सैनिक ढेर

Updated: Jun 17, 2020



चीनी सैनिकों द्वारा कल रात लद्दाख की गालवन घाटी में हुए हिंसक संघर्ष में तीन भारतीय सैनिकों की मौत हो गई, जिसके बाद एक पूर्ण युद्ध की आशंका तेज हो गई है।


टेलीग्राफ ने भारतीय सेना के वरिष्ठ सूत्रों के हवाले से बताया कि गालवन घाटी में भारत और चीन के बीच कल रात आमने-सामने होने के बाद, “तीस-चालीस भारतीय सैनिक भी लापता हैं – माना जा रहा है कि या तो मारे गए या उन्हे हिरासत में लिया गया है।

वहीं आईएएनएस इंडिया की रिपोर्टर आरती टिकू सिंह ने ट्वीट कर लिखा कि सूत्रों के अनुसार कुछ भारतीय सैनिक और अधिकारी लापता है। उन्हे शायद गलवान घाटी में हिंसक झड़प के दौरान बंदी बना लिया गया है। वहीं चीन कि पीपल लिबरेशन आर्मी हताहतों की संख्या बढ़ाने के लिए उन्हे पहाड़ी से फेंकने कि धमकी दे रही है।


रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार द्वारा इसकी पुष्टि नहीं की गई है। हालांकि, सेना ने इस बात की पुष्टि की है कि “हिंसक आमना-सामना” में एक भारतीय अधिकारी और सेना के दो जवान शहीद हो गए थे।

सेना ने एक बयान में कहा, “गालवान घाटी में डे-एस्केलेशन प्रक्रिया के दौरान, कल रात दोनों पक्षों के हताहतों के साथ एक हिंसक सामना हुआ। भारतीय पक्ष पर जानमाल के नुकसान में एक अधिकारी और दो सैनिक शामिल हैं।



चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने एक अन्तर्राष्ट्रीय समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि “भारत के सैनिकों ने सोमवार को दो बार सीमा रेखा पार की और चीनी सैनिकों को उकसाया और उन पर हमला किया, जिसके परिणामस्वरूप दोनों पक्षों में सीमा बलों के बीच गंभीर शारीरिक टकराव हुआ।

ग्लोबल टाइम्स ने विदेश मंत्रालय का हवाला देते हुए कहा, “भारतीय सैनिकों ने सोमवार को दो बार सीमा पर अवैध रूप से सीमा पार करने और चीनी सैनिकों पर भड़काऊ हमलों को अंजाम देकर दोनों पक्षों की आम सहमति का गंभीर उल्लंघन किया।

भारत ने चीन को दिया मुंहतोड़ जवाब

लद्दाख बॉर्डर पर भारत और चीन के बीच हिंसक झड़प में एक कमांडिंग ऑफिसर समेत 3 जवान शहीद हुए हैं। भारतीय जवानों ने भी चीनियों को मुंहतोड़ जवाब दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन के कम से कम पांच जवान मारे गए हैं। इस झड़प में 11 चीनी जवान घायल हुए हैं। उन्हें स्ट्रेचर पर चीनी सीमा में ले जाया गया। हालांकि अभी तक चीन की ओर से इस पर कोई बयान नहीं आया है। चीनी सरकार के मुखपत्र माने जाने वाले ग्लोबल टाइम्स ने भी चीनी सेना को हुए नुकसान पर चुप्पी साधी हुई है।


फिलहाल चीन की तरफ कितना नुकसान हुआ है इसपर भारतीय सेना ने ज्यादा कुछ नहीं कहा। बस इतना कहा गया है कि नुकसान दोनों तरफ हुआ है। इससे पहले भारतीय सेना ने बताया था कि बॉर्डर पर चीनी घुसपैठ को रोकने के दौरान तीन जवान शहीद हुए। इसमें एक अधिकारी के अलावा दो जवान शामिल हैं।


1975 के बाद चली गोली?


भारत और चीन के बीच सीमा पर आखिरी गोली 1975 में चली थी। जैसी खबरें आ रही हैं, उसके मुताबिक गलवान घाटी में करीब 40 साल बाद यह सिलसिला टूट गया है। गलवान घाटी उन पॉइंट्स में है जहां चीन की सेना ने घुसपैठ की थी। दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत के बाद, चीनी सेना कुछ पॉइंट्स से वापस हटने लगी थी। मगर इस घटना के बाद, सीमा पर तनाव और बढ़ने की आशंका है।


चीन ने पैदा किया है एलएसी पर तनाव


मई के शुरुआती दिनों में चीनी सैनिकों ने एलएसी पर आक्रामक रुख अपनाना शुरू किया। पूर्वी लद्दाख में चार जगहों पर पीपुल्‍स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने घुसपैठ की। बड़ी संख्‍या में चीनी सैनिक आर्टिलरी और बख्‍तरबंद गाड़‍ियों के साथ एलएसी के पास मौजूद हैं। गलवान घाटी और पैंगोंग झील, दो मुख्‍य पॉइंट हैं जहां दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने हैं।


टीम स्टेट टुडे



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