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AJL Case: मुसीबत में कांग्रेस और सोनिया गांधी, एजेएल और मोतीलाल वोरा की 16.38 करोड़ की संपत्ति जब्त



नेशनल हेराल्‍ड मामले में कांग्रेस पार्टी और खासकर सोनिया गांधी पर नई आफत आन पड़ी है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पार्टी की प्रकाशन संस्था असोसिएटेड जर्नल्‍स लिमिटेड (AJL) और सोनिया के बेहद करीबी नेताओं में शुमार मोतीलाल वोरा की संपत्ति कुर्क कर ली है। प्रवर्तन दिनेशालय (ED) की ओर से शनिवार को जारी प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर के मुताबिक, मनी लॉन्ड्रिंग के एक केस में यह ऐक्‍शन लिया गया है। प्रवर्तन निदेशालय ने शनिवार को कहा कि इसने कांग्रेस पार्टी की ओर से प्रवर्तित एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) और कांग्रेस पार्टी के नेता मोती लाल वोरा की 16.38 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क करने का आदेश जारी किया है। एक मनी लॉन्ड्रिंग केस में यह कार्रवाई की गई है।

ईडी ने कहा कि कुर्क की गई संपत्ति मुंबई में 9 मंजिला इमारत है, इसमें दो बेसमेंट भी हैं और 15 हजार स्क्वायर मीटर में बना हुआ है। इसकी कुल कीमत 120 करोड़ रुपए है। इसमें से 16.38 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की गई है। इमारत बांद्रा ईस्ट में ईपीएफ ऑफिस, कला नगर के पास प्लॉट नंबर 2 और सर्वे नंबर 341 पर है।

एजेंसी ने कहा कि इस केस में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और मोती लाल वोरा हैं। एजेंसी ने कहा कि हरियाणा के पंचकुला में अवैध रूप से आवंटित भूमि पर दिल्ली में बहादुर शाह जफर मार्ग पर स्थित सिंडिकेट बैंक ब्रान्च से लोन लिया गया और इससे बांद्रा में यह इमारत खड़ी की गई।

प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएल) के तहत प्रोविजनल अटैचमेंट आदेश एजेएल और मोती लाल वोरा के नाम जारी किया गया है। वोरा एजेएल के प्रबंधकीय निदेशक हैं। एजेएल, वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं द्वारा नियंत्रित है, जिसमें गांधी परिवार के सदस्य भी शामिल हैं। यह समूह नेशनल हेराल्ड अखबार चलाता है।

एजेंसी ने एक बयान में कहा कि अपराध के धन से अर्जित 16.38 करोड़ रुपये कीमत की संपत्ति जब्त की गई है। इससे पहले पंचकुला के प्लॉट को भी ईटी ने अटैच किया था। हुड्डा और वोरा से पूछताछ भी की गई थी। पंचकूला के सेक्टर 6 में प्लॉट सी-17 को पहली बार 1982 में हरियाणा सरकार ने आवंटित किया था।



चार्जशीट में भी वोरा, हुड्डा के नाम


ED ने पिछले साल मोतीलाल वोरा और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। पंचकूला के सेक्टर छह में प्‍लॉट नंबर सी-17 की खरीद, कब्जे से जुड़ी प्रक्रिया में प्रत्यक्ष तौर पर शामिल होने के कारण इनके नाम चार्जशीट में हैं। जांच में पता चला कि प्‍लॉट को AJL को साल 1982 में आवंटित किया गया। एस्टेट अधिकारी HUDA ने 30 अक्टूबर 1992 को वापस ले लिया क्योंकि AJL ने ऑफर लेटर की शर्तें पूरी नहीं की थीं।


1996 में पुनर्विचार याचिका के खारिज करने के बाद पुर्नग्रहण आदेश दिया गया। हुड्डा पर आरोप है कि उन्‍होंने अपनी पावर का इस्‍तेमाल करते हुए प्‍लॉट को पुनर्आवंटन की आड़ में नए सिरे से AJL को आवंटित किया। इसकी कीमत वही रखी गई। यह आदेश 28 अगस्त 2005 को दिया गया। ED ने CBI की FIR के आधार पर 2016 में PMLA शिकायत दर्ज की थी।


AJL पर है गांधी परिवार का कंट्रोल


मोतीलाल वोरा AJL के मैनेजिंग डायरेक्‍टर हैं। इस कंपनी पर गांधी परिवार का दखल है। AJL ही नेशनल हेराल्‍ड अखबार को चलाता है। इस अखबार को साल 1939 में जवाहरलाल नेहरू ने शुरू किया था। 1956 में AJL एक कंपनी बनी। साल 2008 में इसके सारे पब्लिकेशंस बंद कर दिए गए। तब कंपनी पर 90 करोड़ रुपये का कर्ज था। कांग्रेस ने 'यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड' नाम से कंपनी बनाई। इसके डायरेक्‍टर्स में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मोतीलाल वोरा, सैम पित्रोदा, ऑस्‍कर फर्नांडीज और सुमन दुबे के नाम शामिल थे। इसमें सोनिया-राहुल के पास 76 प्रतिशत शेयर थे।


राहुल गांधी पर आय छिपाने का आरोप


टैक्‍स डिपार्टमेंट ने राहुल गांधी के साल 2011-12 के इनकम टैक्‍स रिटर्न फाइल को फिर से खोलने का फैसला किया। उन्होंने उसमें यह जानकारी नहीं दी कि वह 2010 से कंपनी 'यंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड' के निदेशक थे। आयकर विभाग के मुताबिक इससे हुई आय नहीं दिखाई गई। मामले में कुल सात आरोपी हैं जिसमें राहुल गांधी, सोनिया गांधी, मोती लाला वोरा, ऑस्कर फर्नांडीस, सुमन दुबे , सैम पित्रोदा और यंग इंडियन कंपनी शामिल है।


टीम स्टेट टुडे


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