google.com, pub-3470501544538190, DIRECT, f08c47fec0942fa0
 

“अमर सिंह” - जो जिंदा हैं मुलायम से मोदी तक



आइना जितना भी चमके... उसका एक हिस्सा काला ही होता है। सियासत कितनी भी चमकदार हो...उसका भी एक हिस्सा काला ही होता है। वैश्विक सियासत का सबसे चमकदार आइना अमर सिंह हैं। आइना वो...जो आपको अपना चेहरा दिखा दे....अमर सिंह वो...जिसमें सियासी दलदल का हर दल अपना चेहरा देख ले। आइने के सामने अगर दूसरा आइना रख दें तो चेहरे अनन्त हो जायेगें.....अमर सिंह भी अनन्त ही हैं। ऐसा इसलिये....क्योंकि जो...अमर सिंह में खुद को देखना चाहते हैं वो उनकी मासूम और फिदा कर देने वाली हंसी में ही अनन्त को पा लेते हैं......और जो अमर सिंह को आइना दिखाने पहुंचते हैं....वो किस चेहरे पर हंसते हंसते रोने लगते हैं.....कहना लगभग नामुमकिन है।


ऊपर की लाइनें हो सकता है आसानी पढ़ने वाले को समझ ना आयें.....ऐसा इसलिये क्योंकि ये बड़ा प्रैक्टिकल लिखा है। ऐसा सिर्फ हो सकता है....समझना और समझाना कठिन है। अमर सिंह भी बहुत प्रैक्टिकल हैं...उन्हें समझना और समझाना दोनों कठिन है। यारों के यार हैं....दुश्मनों से भी यारी है....लेकिन जब यार...अय्यार हो जायें तो भला अमर सिंह अपना चोला क्यों ना बदलें। फिर भी अमर सिंह ने वक्त के साथ यार और परिवार में फर्क करना सीख लिया है। अब उनकी पत्नी पंकजा और उनकी दोनों बेटियां उनका परिवार हैं....बच्चन, अंबानी, मुलायम सिंह आदि उनके परिवार का विस्तार।


बात चोला बदलने की हो रही थी। वो सियासी भी क्या सियासी... जो चोला ना बदले। कुछ चलताऊ सियासी... पुरानी पार्टी और नयी पार्टी के रुप में अपना चोला बदलते हैं। कुछ खानदानी सियासी.....बयानों में अपना चोला बदलते हैं। जमीन से जुड़ा सियासी... कबका जमीदोंज़ हो चुका है....और अगर कहीं बचा हो...तो उसके तन पर चोला नहीं हो सकता। असली चोला तो सियासत में सिर्फ अमर सिंह बदलते हैं.....क्या खूब बदलते हैं.....इतना बदलते हैं कि हर बयान पर चोला नया होता है। यकीन ना आये तो न्यूक्लियर डील के वक्त अमर सिंह के हर बयान और हर बयान के साथ उनकी तस्वीर को याद कर लीजिये। तब ये तय कर पाना बेहद मुश्किल था कि अमर सिंह पहले चोला बदल रहे हैं या बयान। एक से एक लकालक, रंगबिरंगे, लल्लनटॉप चोले। खास मौके पर खास फैशनडिजायनरों द्वारा खास अमर सिंह के लिये तैयार किये गये थे चोले......आखिर सरकार बचानी थी।


बचाने से याद आया.....सिर्फ सरकार ही नहीं....अमर सिंह ने बहुतों को बचाया है। किसी को कर्ज से बचाया है, किसी को मर्ज से बचाया है, किसी को गर्ज से बचाया है, किसी को तर्ज(सजा) से बचाया है। बचाने का काम उन्हें बखूबी आता है। हर साजिश को नाकाम करना उनका शगल है। तभी तो...जब उनके खुद के गुर्दे शरीर के भीतर गुण्डागर्दी पर उतर आये....तो खुद को बचाने में भी उन्हें ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ी। ये वो समय था जब अमर सिंह अपने परिवार, परिवार के विस्तार, यार और अय्यार को बेहद करीब से महसूस कर रहे थे।


वैसे तो अमर सिंह की एक पहचान उद्योगपति की भी है....लेकिन उस उद्योग की वो कभी बात नहीं करते। सियासत अमर सिंह की असली खुराक है। इसलिये राजनीति के कारोबार और कारोबार से चमकती राजनीति के अमर खिलाड़ी है अमर सिंह। जिस समाजवादी पार्टी को समाजवाद की पैबंदी चादर ना गर्मी से बचा पाती थी ना सर्दी से, जिस पार्टी के लिये बेमौसम बरसात भी बाढ़ बन जाती थी....वहां अमर सिंह किसी बांध की तरह खड़े हो गये। बंधन... बहुतों को अच्छा नहीं लगता....पार्टी के भीतर भी कुछ ऐसे थे, कुछ ऐसे हैं, कुछ ऐसे रहेगें जिन्हें अमर सिंह का बांध पसंद नहीं। इसलिये कभी कभी बांध के दरवाजे खुलने पर कुछ पानी बह जाता है। बांध से गिरता हुआ पानी बिजली पैदा करता है। ऐसी बिजलियों का इस्तेमाल समाजवादी पार्टी भी करती है और बाकी पार्टियां भी।


सियासत में दोस्ती और दुश्मनी उम्र की नहीं होती। लिहाजा अमर सिंह का दरवाजा अगर किसी के लिये बंद भी हो जाये तो खिड़की खुली रहती है...यही सलाह वो सामने वाले को भी देते हैं। इस ठाकुर की एक और सलाहियत है....ठेठ देसी अंदाज में पश्चिम को पूरब से मिलाने की। तभी तो अमेरिका का एक पूर्व राष्ट्रपति अमर सिंह के बुलावे पर जब नेताजी से मिलने जब पांच कालीदास मार्ग पहुंचा....तो आलीशान पांच सितारा होटलों से अलग मुख्यमंत्री आवास के सामने तने तम्बू में भी पूरे भरोसे से चला गया। हर रास्ते पर हर किसी को चला देना....अमर सिंह के भीतर छिपे कलाकार का मौजू है।


कलाकार के अलावा अदाकार भी हैं अमरसिंह। अगर यकीन ना आये तो इन्तजार कीजिये। अब तक आप उन्हें टेलीवीजन पर देखते और सुनते आये हैं....अगर सब कुछ वैसा ही रहा जैसा अमर सिंह चाहते हैं तो जल्द ही वो रुपहले पर्दे पर नजर आयेगें। उनका ये सफर भी बेहद दिलचस्प होगा.....क्या पता निजी जिन्दगी में हमेशा जिन्दादिल, खुशमिजाज़ और मुस्कुराने वाले अमरसिंह....रुपहले पर्दे पर किस अंदाज और अंजाम के साथ नजर आयें।

लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता अमर सिंह का निधन हो गया । बीमारी के चलते सिंगापुर के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। एक समय पर उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेताओं में गिने जाने वाले अमर सिंह समाजवादी पार्टी के मुखिया रहे मुलायम सिंह यादव के करीबियों में शामिल थे। इसी साल फरवरी में उन्होंने अमिताभ बच्चन से माफी भी मांगी थी। अमर सिंह वर्तमान में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के सांसद थे। 5 जुलाई 2016 को उन्हें उच्च सदस्या के लिए चुना गया था।


टीम स्टेट टुडे



13 views0 comments
 
google.com, pub-3470501544538190, DIRECT, f08c47fec0942fa0