google.com, pub-3470501544538190, DIRECT, f08c47fec0942fa0
 

जन्मपत्रिका के साथ ही प्रश्नकुंडली से भविष्य बताने में बेहद महारत रखते हैं ये ज्योतिषाचार्य




ज्योतिष शास्त्र एक बेहद परंपरागत विज्ञान है। जिसमें गणना और फलित के लिए बेहद साधना और तपस्या की आवश्यकता होती है तभी किसी व्यक्ति की जन्मपत्रिका देखकर उसके भविष्य और भविष्य में होने वाली घटनाओं की जानकारी हो पाती है। आजकल करियर , शादी और भविष्य में होने वाले घटनाक्रम को जानने के लिए लोग ज्योतिष विद्या की अक्सर ही मदद लेते हैं। स्टेट टुडे ने अपनी पिछली खबरो में भी पाठकों का परिचय मेरठ के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य देवर्षि विभोर इंदुसुत जी से करवाया है। माना जाता है कि ज्योतिष विद्या देवर्षि विभोर जी के रक्त में है क्योंकि उनके पिता स्वर्गीय पंडित सुरेश इंदुसुत जी भी एक महान ज्योतिषाचार्य थे जो बिना कंप्यूटर की मदद लिए व्यक्ति का जन्म तिथि , जन्म स्थान और जन्म समय जानकर हाथों से उसकी जन्मपत्रिका बना दिया करते थे। अपने पिता की विरासत और विश्वसनीयता को देवर्षि विभोर जी ने दिन दुगनी और चार चौगनी मेहनत से न केवल आगे बढाया है बल्कि एक बेहद प्रतिष्ठित और ज्योतिषाचार्य के रुप में सम्मान हांसिल किया है। स्टेट टुडे की टीम ने हाल ही में देवर्षि विभोर जी से वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से बात की तो पता चला कि अपने लगभग ढाई दशक से अधिक पुराने करियर में उन्होंने एक लाख से अधिक जन्मपत्रिकाओं का विवेचन किया और लोगों की उनके करियर , विवाह, संतान , स्वास्थय और अन्य तमाम जिज्ञासाओं का समाधान किया है।


देवर्षि विभोर जी के मुताबिक किसी व्यक्ति की जन्मपत्रिका उसके व्यक्तित्व का दर्पण होती है और सही जन्मतिथि, जन्म समय और जन्म स्थान के मालूम होने पर ही किसी व्यक्ति की जन्मपत्रिका बनाई जा सकती है। यदि सही डिटेल के आधार पर किसी व्यक्ति की जन्मपत्रिका बनाई जाती है तो उसके भूत , वर्तमान और भविष्य से जुड़ी घटनाओं का सही आकलन किया जा सकता है। यही नहीं विवाह के लिए वर वधू की जन्मपत्रिका मिलान के लिए दोनों की सही डिटेल मिलने पर ग्रह स्थिति और गुण मिलान के पश्चात बताया जा सकता है कि विवाह करना उचित होगा या नहीं लेकिन जन्मपत्रिका से भविष्य में जानकारी के साथ ही एक अन्य विद्या भी है जिससे कई बार भविष्य के बारे में जाना जा सकता है वो प्रश्न शास्त्र यानि प्रश्नकुंडली।


प्रश्नकुंडली ज्योतिष का वो भाग है जिससे किसी व्यक्ति के भविष्य की जानकारी वैसे ही ली जा सकती है जैसे जन्मपत्रिका के माध्यम से गणना होती है। ऐसा उन परिस्थितियों में होता है जब भविष्य को लेकर प्रश्न करने वाले व्यक्ति के पास जन्म डिटेल ना हो या कुछ परिस्थितियों में करियर , शादी , किसी व्यक्ति की गंभीर तबियत खराब होने या किसी प्रश्न विशेष का उत्तर जानने के लिए प्रश्न कुंडली का सहारा लिया जाता है।

माना जाता है कि प्रश्नकुंडली से भविष्य की घटनाओं को लेकर गणना करने में ज्योतिषाचार्य देवर्षि विभोर इंदुसुत जी को महारत हांसिल है। इंदुसुत जी बताते हैं कि प्रश्नकुंडली से उत्तर लेने के लिए जिस समय प्रश्न पूछा जाता है उस दिन की तारीख , प्रश्न पूछे जाने वाले समय और जिस स्थान पर ज्योतिषी मौजूद है वहां के स्थान को समाहित करके एक तात्कालिक प्रश्नकुंडली बनाई जाती है जिससे प्रश्न पूछने वाले व्यक्ति के प्रश्न का उत्तर का आकलन किया जाता है।


अब सवाल उठता है कि हर तारीख , समय और स्थान की कुंडली अलग होती है तो कैसे माना जाय कि प्रश्न कुंडली से उत्तर सटीक मिलेगा तो इसके जवाब में ज्योतिषाचार्य देवर्षि विभोर जी ने जो उदाहरण प्रस्तुत किये उसे जानकर हमारी टीम भी चकित हुए बिना न रह सकी।

इंदुसुत जी ने बताया कि -

ज्योतिष का प्रोफेशन एक प्रयोगशाला की तरह से होता है और इस प्रोफेशन में हर दिन एक नई पाठशाला की तरह से होता है जो हर बार एक नया सबक सिखाता है।

एक और किस्से का जिक्र करते हुए इंदुसुत जी बताते हैं कि , लगभग दो साल पुरानी बात है। मेरे ऑफिस में काफी भीड़ थी। वेटिंग में बैठे लोगों का धैर्य भी जवाब दे रहा था। तभी एक युवक का फोन तुरंत इमरजेंसी में अपॉइंटमेंट लेने के लिये आया, उसके बच्चे की तबियत काफी खराब थी, डॉक्टर ने इमरजेंसी में ऑपरेशन करने के लिये कहा था, जान को भी खतरा था। मैंने उस युवक को बुलाया और थोड़ी देर वेट करने के लिये कहा साथ ही बाहर रिशेप्शन पर मौजूद अपने संस्थान के आचार्यों से युवक को जल्द स्वयं से मिलवाने के लिए निर्देशित किया। युवक अपनी पत्नी को लेकर आधे घण्टे बाद ही आ गया, मैंने बीच मे ही उनको बुला लिया, जैसे ही मैंने जन्मपत्रिका व प्रश्नलग्न खोलने वाला ही था, वेटिंग रूम में कुछ लोग नाराज होकर विवाद करने लगे। एक महिला काफी नाराज हो गई उनके भतीजे का भी भयंकर एक्सीडेंट हुआ था और वो वेंटीलेटर पर था, मैंने उन दम्पत्ति को वापस बाहर भेज दिया और थोड़ी देर इन्तजार करने के लिये कहा। वह महिला अपने भतीजे की जन्मपत्रिका लेकर आयी थी जिसका एक्सीडेंट हुआ था। जन्मपत्रिका में परम मारकेश चल रहा था तो वहीं प्रश्नलग्न के आधार पर बनाई गई कुंडली में अष्टम स्थान अत्यंत पीड़ित था जीवन को अत्यंत खतरा दिखा रहा था। मैंने उनके भतीजे के बचने की सम्भावना को मना कर दिया फिर भी कुछ सम्भव उपाय बता दिए। उसके बाद वही दम्पति दुबारा आये जिनके बच्चे का ऑपरेशन होना था, तब तक प्रश्नलग्न परिवर्तित हो चुका था।



बच्चे की जन्मपत्रिका भी संकट का समय तो बता रही थी पर जीवन को कष्ट नहीं था। प्रश्नलग्न भी स्पष्ट रूप से ऑपरेशन के बाद उत्तम रिकवरी दिखा रहा था। थोड़े दिन बाद वो महिला फिर आयीं जिनके भतीजे का एक्सीडेंट हुआ था और रोते हुए बोली कि उनका भतीजे की अगले दिन ही मृत्यु हो गई। जो पति पत्नी बच्चे के इलाज के बारे में परामर्श के लिए मिले थे कुछ दिन बाद उनसे भी मिलना हुआ। उन्होंने बताया कि बच्चा ऑपरेशन के बाद ठीक हो गया था। अर्थात जिस समय प्रश्नलग्न खराब था, अष्टम स्थान पीड़ित था तब वह दम्पत्ति मेरे सामने बैठ ही नहीं पाये और हंगामे के बाद बीच में बाहर चले गये, क्योंकि बच्चे की पूर्ण आयु थी। उस दिन यह सबक मिला कि ज्योतिष विज्ञान स्पष्ट संकेत देता है। जिसके साथ जैसी तात्कालिक ग्रह चाल या जन्मपत्रिका है उसी के अनुसार ही वह आपके सामने उपस्थित होता है।

एक दूसरी घटना का जिक्र करते हुए इंदुसुत जी बताते हैं कि .....

कुछ समय पूर्व एक दम्पति मेरे पास पास सन्तान न होने की समस्या के लिये जन्मपत्रिका लेकर आये। विवाह के 4 वर्ष बीत जाने के बाद भी सन्तान नहीं हुई थी। 2 बार गायनिक डॉक्टर से आईवीएफ करवा चुके थे। परन्तु दोनों बार ही असफल हुआ। जन्मपत्रिका के अनुसार उस वक्त की ग्रह स्थिति के अनुसार सन्तान होने का प्रबल योग चल रहा था। मैंने ज्योतिषीय सलाह व समाधान बताया। साथ ही गोचर व दशा के अनुसार अगले 4 माह में गर्भधारण होने का आश्वासन दिया व तीन माह बाद पुनः मिलने को कहा। कुछ दिन बाद वह दम्पति पुनः आये और कहा की अभी तक गर्भ धारण नहीं हुआ है। परन्तु जन्मपत्रिका के अनुसार गर्भधारण का पूर्ण समय चल रहा था। साथ ही प्रश्न लग्न , इस गर्भधारण को पूर्णतः पुष्ट कर रहा था। मैंने आत्ममंथन करते हुये पुनः आश्वासन दिया और मेरे आंकलन के अनुसार गर्भ का पूर्ण समय चलने की बात कही। इसपर वह लोग अनमने होकर चले गये। कुछ दिनों के बाद उस व्यक्ति का पुनः हर्ष के साथ फोन आया कि उनकी पत्नी गर्भवती है साथ ही यह बताया कि जब वह स्त्री मेरे सामने थी उस समय गर्भ धारण हो चुका था परन्तु रिपोर्ट आने पर ये बात पुष्ट हो पाई।

एक अन्य घटना का जिक्र करते हुए देवर्षि इंदुसुत जी ने बताया कि लगभग तीन साल पहले नोएडा से उनके एक क्लाइंट का फोन आया और उसने बताया कि नोएडा से उनके परिचित के दो बच्चे गायब हो गये है हैं। कुछ पता चल सकता है क्या। मैंने प्रश्न लग्न देखा तो मकर लग्न 5 डिग्री पर था केंद्र में चन्द्रमा व शुक्र शुभ ग्रह थे। दोनों त्रिकोण में भी शुभ ग्रह थे। अर्थात बच्चे सुरक्षित थे। परन्तु लग्न में स्वामी शनि बारहवें स्थान पर मंगल के सामने था जो कि वाद विवाद दिखाता है। अर्थात बच्चे वाद विवाद के कारण घर से चले गये हैं और केंद्र के चन्द्रमा के कारण बच्चे मिल जाएंगे।


जब मैंने वापस उन्हें यह बताने के लिऐ फोन किया तो पता चला बच्चे मिल गए। वाद विवाद के कारण घर से चले गये थे। बहुत प्रसन्नता हुयी। जब आप अपने विज्ञान पर विश्वास करते हैं और सफल होते हैं तो आत्मविश्वास बढ़ जाता है।

इसके साथ ही उनके क्लाइंट जो एक कारपोरेट आफिस में नौकरी करते थे। क्लाइंट ने उनको फोन पर बताया कि उसने आफिशियल काम के लिए आफिस की लाइब्रेरी से कोई जरुरी सामान इश्यू कराया था जिसकी कीमत लगभग 60 से 70 हजार रुपए के आसपास थी। क्लाइंट के मुताबिक उसने आफिस लाइब्रेरी में सामान वापस कर दिया था लेकिन लाइब्रेरी के रिकार्ड में वो सामान उन क्लाइंट के नाम ही इश्यू दिखा रहा था। क्लाइंट ने परेशान होकर देवर्षि विभोर जी को फोन किया और कहा कि अगर ये कार्ड वाला मामला सैटल न हुआ तो उसकी सैलरी से उस सामान के कीमत वसूली जाएगी। प्रश्नकुंडली के आधार पर विभोर जी ने क्लाइंट को कहा कि आज का दिन काफी शुभ है और प्रयास करने पर ये मामला सैटल हो सकता है। बेहतर रहेगा कि वो आफिस की लाइब्रेरी का सीसीटीवी फुटेज चैक करें। क्लाइंट ने सीसीटीवी फुटेज चैक किया जिसे उसी दिन शाम को डिलीट किया जाना था। सीसीटीवी की फुटेज से ये बात पता चली कि क्लाइंट तो दफ्तर की लाइब्रेरी में संबंधित सामान वापस कर चुका था लेकिन क्लर्क की लापरवाही के चलते उसकी एंट्री नहीं हो पाई थी।


इस प्रकार स्टेट टुडे से बातचीत में प्रश्नकुंडली को लेकर ज्योतिषाचार्य विभोर जी ने जो रहस्य उजागर किए वो बेहद हैरतअंगेज थे। विभोर जी के मुताबिक हम कोई भी कार्य कर रहे हो तो अपने पर व अपने विज्ञान पर पूर्ण विश्वास होना चाहिए। साथ ही ईश्वर के प्रति आस्था और अपने कार्य के प्रति ईमानदारी इसमें बेहद मददगार साबित होती है।


टीम स्टेट टुडे



442 views0 comments
 
google.com, pub-3470501544538190, DIRECT, f08c47fec0942fa0