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प्राधिकरण-परिषद की संपत्तियों के नामांतरण का घटेगा खर्चा, सरकार की खास व्यवस्था


लखनऊ, 3 जुलाई 2022 : संपत्ति के स्वामियों को योगी सरकार बड़ी राहत देने जा रही है। विकास प्राधिकरण और आवास विकास परिषद की संपत्तियों के नामांतरण (म्यूटेशन) में मौजूदा खर्चे को सरकार काफी हद तक घटाने वाली है। नामांतरण शुल्क को कम करके एक हजार रुपये से अधिकतम 10 हजार तक करने की तैयारी है।

अभी संपत्ति के वर्तमान मूल्य (सर्किल रेट या सेल डीड में जो भी अधिक हो) का एक प्रतिशत शुल्क देना पड़ता है। ऐसे में अगर कोई संपत्ति एक करोड़ रुपये की है तो एक लाख रुपये नामांतरण पर खर्च करना पड़ता है।
दरअसल, राज्य में अभी विकास प्राधिकरण और आवास विकास परिषद के भवन-भूखंड आदि के मामलों में नामांतरण को लेकर कोई नियमावली नहीं हैं। ऐसे में अलग-अलग प्राधिकरणों में जहां नामांतरण की प्रक्रिया अलग है वहीं नामांतरण शुल्क में भी अंतर है जिससे कोर्ट तक में भी मामले पहुंचते रहे हैं।

चूंकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ही आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के मंत्री पद का भी दायित्व निभा रहे हैं इसलिए उन्होंने नामांतरण की प्रक्रिया को आसान बनाने के साथ ही शुल्क को भी प्रदेशभर में एक समान रखते हुए युक्तिसंगत बनाने के निर्देश विभागीय अफसरों को दिए।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर विभाग द्वारा उत्तर प्रदेश नगर नियोजन और विकास (नामांतरण प्रभार का निर्धारण, उद्ग्रहण और संग्रहण) नियमावली को अंतिम रूप दे दिया गया है। जल्द ही कैबिनेट से मंजूरी मिलते ही इसे लागू भी कर दिया जाएगा।

सूत्रों के मुताबिक नियमावली में पट्टागत (लीज) वाली संपत्तियों के मामले में नामांतरण शुल्क को तो पहले की तरह वर्तमान मूल्य का एक प्रतिशत ही रखा गया है लेकिन अन्य मामलों में घटाकर प्रस्तावित किया गया है। फ्रीहोल्ड, दान विलेख आदि के मामले में संपत्ति के नामांतरण के लिए एक हजार रुपये से अधिकतम 10 हजार रुपये शुल्क रखा गया है।
पांच लाख रुपये तक की संपत्ति के लिए जहां एक हजार रुपये नामांतरण शुल्क प्रस्तावित किया गया है वहीं 10 हजार तक के लिए दो हजार, 10 से 15 लाख तक के लिए तीन हजार, 15 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति पर पांच हजार रुपये जबकि 50 लाख रुपये से ऊपर की संपत्तियों के लिए अधिकतम 10 हजार रुपये ही शुल्क देना होगा।

किसी विधिक वारिस के नाम से नामांतरण या पंजीकृत वसीयत के मामले में नामांतरण शुल्क पांच हजार रुपये ही रहेगी। ऐसी संपत्ति जिसे कई बार बेचा-खरीदा गया लेकिन नामांतरण नहीं कराया गया, उनमें 25 प्रतिशत और शुल्क देना होगा। बकाया धनराशि को भी नामांतरण के आवेदन के साथ जमा करना होगा। आवेदक, तय फार्मेट पर खुद भी समाचार पत्रों में संबंधित विज्ञापन प्रकाशित करा सकेगा।

आनलाइन किया जा सकेगा आवेदन : नामांतरण के लिए आनलाइन आवेदन करने की सुविधा होगी। जनहित.यूपीडीए.इन वेबसाइट के माध्यम से 100 रुपये आनलाइन जमा करके आवेदन किया जा सकेगा। इसके लिए आवेदक को खुद का प्रोफाइल बनाना होगा। आवेदन के साथ संबंधित दस्तावेज अपलोड करना होगा। 15 दिनों में पूरा शुल्क जमा करना होगा। अधिकारियों को अधिकतम 60 दिन में आवेदन का निस्तारण सुनिश्चित करना होगा।

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