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बिहार में चुनाव से पहले बिछ रही है बिसात - ये जोड़तोड़ आपने देखी या नहीं !



2015 में बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा नौ सितंबर को हुई थी। उस दौरान बिहार में छह चरणों में चुनाव हुए थे। चुनाव से पहले राज्य में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। सभी दलों में जोड़-तोड़ और मान-मनौव्वल का दौर जारी है। एक नजर डालते हैं पिछले दिनों हुई सियासी उठापटक पर...

लोजपा प्रमुख चिराग पासवान का नाराज होना



बिहार में चुनाव से पहले सत्ताधारी एनडीए गठबंधन को पहला झटका लोजपा प्रमुख चिराग पासवान की नाराजगी से लगा। वर्तमान में एनडीए सरकार में शामिल लोजपा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान समेत पूरी पार्टी के नेताओं के सुर बदले-बदले नजर आ रहे हैं।

चिराग पासवान जेडीयू को लेकर तल्ख तेवर अपनाए हुए हैं। सोमवार (17 अगस्त) को उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों की बैठक में भी स्पष्ट कर दिया कि वे आगे भी राज्यहित के मुद्दे उठाते रहेंगे, अब इसे कोई आलोचना समझे तो उन्हें कुछ नहीं कहना। चिराग के इस तेवर के बाद पार्टी के दूसरे नेता भी नीतीश कुमार और उनके मंत्रियों पर हमलावर हो गए हैं।

चिराग पासवान ने सोमवार को वर्चुअल माध्यम से प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक बुलाई थी। इसमें पार्टी के सभी सांसद, विधायक सहित जिलाध्यक्ष, प्रदेश पदाधिकारी और प्रकोष्ठों के अध्यक्ष मौजूद थे। बैठक में चिराग ने कोरोना जांच में बरती जा रही लापरवाही का जिक्र किया था। चिराग पासवान के तल्ख तेवर के बाद पार्टी के दूसरे नेताओं ने भी नीतीश कुमार और उनके मंत्रियों पर हमला बोल दिया। लोजपा प्रवक्ता अशरफ अंसारी ने नीतीश कुमार को कृपा पर बना मुख्यमंत्री बताते हुए कहा कि "ये लोग जो खुद कृपा पर सीएम बने हैं, उनका बोलना अपने मालिकों के लिए जायज है। ये लोग प्रधानमंत्री का अनादर करते हैं और कोई सच बोले तो ये लोग वफादारी दिखाने में प्रतियोगिता करते हैं

पासवान और पप्पू यादव के बीच बिहार में थर्ड फ्रंट बनाने को लेकर चर्चा


माना जा रहा है कि पासवान और पप्पू के बीच बिहार में थर्ड फ्रंट बनाने को लेकर चर्चा हुई है। हालांकि, अगर दोनों ही नेता थर्ड फ्रंट को लेकर सहमत होते हैं, तो बिहार में सपा, बसपा समेत कई छोटे दलों को लेकर गठबंधन होने की संभावना है।

राजद में मची भगदड़



सत्ताधारी गठबंधन के साथ-साथ राज्य में विपक्षी महागठबंधन में भी भगदड़ मची हुई है। गुरुवार को राजद के तीन विधायक जनता दल (यूनाइटेड) यानी जेडीयू में शामिल हो गए। इनमें लालू यादव के समधी चंद्रिका राय का नाम भी शामिल है। चंद्रिका राय राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के समधी और बिहार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव के ससुर हैं। चंद्रिका के अलावा जेडीयू में शामिल होने वाले बाकी दो विधायक जयवर्धन यादव और पूर्व केंद्रीय मंत्री अली अशरफ फातमी के बेटे फराज फातमी हैं। हालांकि, फराज फातमी को आरजेडी पहले ही महेश्वर यादव और प्रेमा चौधरी के साथ पार्टी से निष्कासित कर चुकी है। ये दोनों भी जेडीयू का दामन थाम चुके हैं।

फिर लालू के साथ हुए श्याम रजक



रविवार को पार्टी और मंत्रिमंडल से निकाले जाने के बाद सोमवार को श्याम रजक ने बयान जारी कर नीतीश सरकार पर निशाना साधा। रजक ने कहा कि जेडीयू में लगभग 99 फीसदी लोग सीएम नीतीश कुमार से नाराज हैं, लेकिन निर्णय नहीं ले पा रहे हैं। मैं दूसरों के बारे में नहीं जानता, लेकिन मैं राष्ट्रीय जनता दल में शामिल हो रहा हूं। श्याम रजक को रविवार को नीतीश कुमार ने उद्योग मंत्री के पद से हटा दिया था और जेडीयू से भी निष्कासित कर दिया था। जेडीयू से निकाले जाने के बाद श्याम रजक तेजस्वी यादव की उपस्थिति में राजद में शामिल हो गए।

मांझी का महागठबंधन से अलग होना



जेडीयू के बाद राज्य में महागठबंधन को बड़ा झटका तब लगा जब महागठबंधन में शामिल हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (हम) ने खुद को अलग कर लिया। जीतन राम मांझी की पार्टी 'हम' की कोर कमेटी ने फैसला लिया कि वह अब महागठबंधन का हिस्सा नहीं रहेंगे। माना जा रहा है कि जीतन राम मांझी की घर वापसी हो सकती है और एक बार फिर वह जेडीयू के साथ जा सकते हैं।


राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जीतन राम मांझी की घर वापसी को लेकर जेडीयू की तरफ से पिछले कई महीनों से कवायद चल रही है। जेडीयू चाहती है कि मांझी की पार्टी 'हम' का पूरी तरह से जेडीयू में विलय हो जाए, लेकिन ऐसा नहीं होने की सूरत में मांझी की पार्टी के साथ कुछ सीटों पर समझौते का फॉर्मूला तय किया जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, गुरुवार को हुई 'हम' की कोर कमेटी बैठक में महागठबंधन से अलग होने का फैसला कर लिया गया है।हालांकि, अभी तय नहीं हुआ है कि जीतन राम मांझी की पार्टी जेडीयू से हाथ मिलाएगी या नहीं।

मांझी के बदले राजद ने उतारी दलित नेताओं की फौज


जीतन राम मांझी के राजद से अलग होने के बाद मांझी फैक्टर को तितर-बितर करने के लिए राजद ने अपने दलित नेताओं की पूरी फौज मैदान में उतार दी है। इस तरह से जेडीयू-राजद के बीच दलित मतों को लेकर शह-मात का खेल शुरू हो गया है।

गुरुवार को राजद ने श्याम रजक, उदय नारायण चौधरी, रमई राम समेत अन्य तीन दलित दिग्गज नेताओं के जरिए प्रेस कॉन्फ्रेंस कराकर जेडीयू को यह संकेत दे दिया है कि मांझी के जाने से उनकी राजनीति पर कोई असर नहीं पड़ा है। श्याम रजक, उदय नारायण चौधरी और रमई राम बिहार में दलित राजनीति का चेहरा माने जाते हैं।

गौरतलब है कि एक दौर में इन्हीं तीन चेहरों के सहारे नीतीश कुमार सूबे में दलित मतों को साधने का काम किया करते थे। ये तीनों नेता अब जेडीयू का साथ छोड़ चुके हैं और राजद की तरफ से सियासी मैदान में मोर्चा संभाल रहे हैं। उदय नारायण चौधरी ने कहा, 'डबल इंजन की सरकार में दलित-पिछड़ों पर सबसे ज्यादा अत्याचार हुआ है। इस सरकार में दलित और आदिवासी छात्रों की छात्रवृत्ति बंद कर दी गई। बिहार में शराबबंदी कानून के तहत 70 हजार दलितों पर केस दर्ज हुआ।'

रमई राम ने कहा कि 'नीतीश सरकार ने दलितों का दलित और महादलित के रूप में बंटवारा किया जो किसी सरकार ने नहीं किया। नीतीश सरकार में दलितों को जमीन नहीं दी। मैं नीतीश कुमार को चैलेंज करता हूं, दलितों को दी गई जमीन पर उनका कब्जा नहीं है, अगर सरकार कब्जा दिखा देती है तो मुझे फांसी दे दिया जाए।

हाल ही में जेडीयू छोड़ राजद में शामिल हुए श्याम रजक ने कहा कि 'नीतीश सरकार में दलितों पर अत्याचार का आंकड़ा बढ़ गया है। 2005 में यह सात फीसदी था अब वह बढ़कर 17 फीसदी हो गया है। बिहार दलितों के अत्याचार मामले में तीसरे स्थान पर है। मैं जो आंकड़ा दे रहा हूं वह भारत सरकार का आंकड़ा है।'

कांग्रेस और रालोसपा ने भी खोला मोर्चा


जेडीयू और राजद में मची भगदड़ के बीच कांग्रेस और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी रालोसपा में अभी चुप्पी है, लेकिन रालोसपा भी जेडीयू में सेंध लगाने में जुटी है। जुलाई महीने में सासाराम में जेडीयू के पूर्व विधायक और प्रदेश उपाध्यक्ष श्याम बिहारी राम जेडीयू छोड़कर रालोसपा में शामिल हो गए थे।

डिहरी में उपेंद्र कुशवाहा ने श्याम बिहारी राम को रालोसपा में शामिल कराया था। श्याम बिहारी राम वर्ष 2010 से 2015 तक चेनारी से जेडीयू के विधायक थे। 2015 के चुनाव में जेडीयू ने यह सीट कांग्रेस के लिए छोड़ दिया था। जिसके कारण वह चुनाव नहीं लड़ पाए थे।

वहीं, कांग्रेस ने भी नीतीश सरकार के खिलाफ मोर्च खोल दिया है। कांग्रेस एमएलसी प्रेम चंद्र मिश्रा ने मुजफ्फरपुर से भाजपा विधायक और नगर विकास मंत्री सुरेश शर्मा को बर्खास्त करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि स्मार्ट सिटी के नाम पर घोटाला हुआ है। प्रेम चंद्र मिश्रा ने कहा है कि स्मार्ट सिटी के नाम करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन सिर्फ कागजी कार्रवाई की गई है। सभी विफलताओं की जिम्मेदारी नीतीश कुमार को खुद लेनी चाहिए।

इसके साथ ही बिहार कांग्रेस के तमाम दिग्गज नेता अपनी पार्टी के संगठन को मजबूत करने, नए लोगों को पार्टी से जोड़ने और चुनाव प्रचार अभियान की रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं।


टीम स्टेट टुडे



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