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आयुष मंत्रालय का दावा–आयुर्वेद में कोरोना का इलाज संभव, कई अस्पतालों में संक्रमितों पर प्रयोग सफल




साल 2020 में कोरोनाकाल के दौरान बाबा रामदेव के संस्थान पतंजलि आयुर्वेद की तरफ से जब कोरोनिल को दुनिया के सामने लाया गया तो इसे कोरोना से लड़ाई के एक मजबूत हथियार के रुप में देखा गया। 2021 में भी जब कोरोना का संक्रमण बढ़ा तो लोगों का पहला भरोसा पतंजलि की कोरोनिल पर देखा गया। जिसकी मार्केट में शार्टेज हो गई।


अब तक एलोपैथ और मेडिकल साइंस के चक्कर में भारत का आयुष मंत्रालय कुछ विशेष नहीं कर पाता था। इस बार आयुष मंत्रालय ने ना सिर्फ तेजी पकड़ी है बल्कि बीते दौर से सबक लेते हुए कोरोना से जंग में कारगर दवा को भी खोज निकाला है।


कहां हुआ परीक्षण


मलेरिया के इलाज के लिए 1980 में बनाई गई दवा आयुष-64 को कोरोना के बिना लक्षण वाले, कम लक्षण वाले और औसत लक्षण वालों पर भी कारगर पाया गया है। आयुष मंत्रालय ने यह जानकारी दी है। पुणे के सेंटर फॉर र्यूमेटिक डिजीज के डायरेक्टर अरविंद चोपड़ा ने एक प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि लखनऊ की किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, वर्धा का दत्ता मेघ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज और मुंबई के बीएमसी कोविड सेंटर दवा का परीक्षण किया गया। हर केंद्र में 70 मरीजों पर परीक्षण हुआ।


आयुष मंत्रालय और सीएसआइआर गठजोड़ के मानद चीफ क्लीनिकल को-ऑर्डिनेटर चोपड़ा ने बताया कि स्टैंडर्ड ऑफ केयर यानी मानक इलाज के साथ सहयोगी के रूप में आयुष-64 के इस्तेमाल से उल्लेखनीय सुधार दिखा। अकेले एसओसी की तुलना में इस दवा के इस्तेमाल से मरीजों को अस्पताल में कम दिन भर्ती रहने की जरूरत पड़ी।



किन लक्षणों को मात दे रही है दवा


उन्होंने कहा कि सामान्य स्वास्थ्य, थकान, बेचैनी, तनाव, भूख, नींद आदि पर भी इस दवा के सकारात्मक लाभ दिखे हैं। दवा के परीक्षण से इस बात के पर्याप्त प्रमाण मिले हैं कि इसका इस्तेमाल कोरोना के कम से सामान्य मामलों तक में एसओसी के साथ किया जा सकता है। गंभीर मरीजों और आक्सीजन की जरूरत वाले मरीजों पर अभी इसके असर को लेकर परीक्षण की जरूरत है। चोपड़ा ने बताया कि आयुष-64 एक आयुर्वेदिक दवा है जिसे 1980 में मलेरिया के इलाज के लिए तैयार किया गया था। अब इसे कोरोना के लिए परखा जा रहा है।


किसे हो रहा है फायदा


देश के प्रतिष्ठित अनुसंधान संस्थानों के वैज्ञानिकों ने पाया है कि आयुष मंत्रालय की केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान परिषद द्वारा विकसित एक पॉली हर्बल फॉर्मूला आयुष 64 लक्षणविहीन, हल्के और मध्यम कोविड-19 संक्रमण के लिए मानक उपचार की सहयोगी के तौर पर लाभकारी है।


कैसे बनी है आयुष 64 टैबलेट


आयुष 64 टैबलेट सप्तपर्ण, कुटकी, चिरायता और कुबेराक्ष औषधियों से बनी है। यह व्यापक वैज्ञानिक अनुसंधान के आधार पर बनाई गई है। ये बेहद ही सुरक्षित और प्रभावी आयुर्वेदिक दवा है। इस दवाई को लेने की सलाह आयुर्वेद एवं योग आधारित नेशनल क्लीनिकल मैनेजमेंट प्रोटोकॉल के निरीक्षण के बाद जारी किया गया था।


इसमें दोराय नहीं है भारत का आयुर्वेद प्राचीन काल से ही बेहद सशक्त रहा है। 2020 में जब कोरोना पूरी दुनिया में कहर बन कर टूटा था तब भी भारत में पंतजलि आयुर्वेद ने ही दुनिया को सबसे पहले कोरोना की दवा निर्माण कर के दी थी। ये अलग बात है कि तब आयुष मंत्रालय समेत भारत सरकार के भी तमाम मंत्रालयों ने पतंजलि की उस दवा और उसके प्रभाव को ना सिर्फ अनदेखा किया था बल्कि कई नकारात्मक चर्चाओं को भी जन्म दिया था।


आज हर घर में कोरोनिल की ना सिर्फ किट मिलेगी बल्कि लोग नियमित रुप से इसका सेवन भी कर रहे हैं। ऐसे में अगर भारत सरकार का आयुष मंत्रालय किसी पुरानी दवा को कोरोना के लिए फायदेमंद बताता है या नवीन शोध प्रक्रियाओं से कोई नई औषधि तैयार करता है तो ये सबसे बेहतर उपाय होगा।


टीम स्टेट टुडे


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