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“कोरोना से लड़ते हुए आगे बढ़ें” - “इंडिया सेंटर फॉर पालिसी स्टडीज” की रिपोर्ट

Updated: May 29, 2020




कोरोना ने व्यक्ति के सामाजिक, आर्थिक व राजनितिक क्षेत्रों को प्रभावित किया है, लोगो में भय का वातावरण है, लेकिन जिन्दगी केवल इस भय के कारण रुक नहीं जाएगी: बल्कि हमें इन परिस्थितियों से लड़ने के लिए अपनी संस्कृति, सभ्यता एवं मानव मूल्यों को अपना कर आगे बढना होगा, निराशा एवं भय के भाव का त्याग करना होगाI हम अधिक समय तक घरों में बैठे नहीं रह सकते है, अब हमें कोरोना से लड़ते हुए आगे बढ़ना होगा नहीं तो दुनिया की दौड़ में बहुत पीछे रह जायेंगे।



“इंडिया सेंटर फॉर पालिसी स्टडीज” द्वारा “कोरोना से लड़ते हुए आगे बढ़ें” विषय पर राष्ट्रीय स्तर पर एक ऑनलाइन वेबिनार का आयोजन किया गयाI मुख्य वक्ता आलोक कुमार, केंद्रीय कार्याध्यक्ष, विश्व हिन्दू परिषद रहेI वेबिनार का आयोजन ICPS के संयोजक देवराज सिंह द्वारा किया गया तथा कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रियव्रत आर्या द्वारा किया गया I

अपनी आदतो एवं व्यवहारों में बदलाव पर मुख्य वक्ता के रूप में आलोक कुमार ने 1999 में पश्चिम बंगाल और उडीशा में आये हुए भयंकर तूफ़ान से का जिक्र करते हुए कहा कि, आज फिर से 20-22 साल बाद ऐसी आपदा आयी है। लोग इसका भी मुकाबला कर रहे हैI कोरोना के बारे में संदेह इस बात का है कि इसे प्रकृति ने नहीं पैदा किया है, यह दुनिया में जो शस्त्रों, परमाणु एवं जैविक हथियारों की होड़ लगी है, यह उसका ही परिणाम हो सकता है। आशंका है कि यह चीन की प्रयोगशाला से बना हैI यह संदेह इस बात से भी पुष्ट होगा है कि चीन ने इसकी जांच से साफ़ मना कर दिया हैI आज दुनिया के सबसे विकसित और शक्तिशाली देश इससे लड़ने में अपने को कमजोर महसूस कर रहे हैंI




भारत में यह हवाई जहाज से आया है, और इसे लाने वाले लोग उच्च वर्ग के हैI विकसित देशो के तीन प्रधानमंत्रियों को इसने निशाना बनाया हैI प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिलासा या सुविधाएं देने की बात करने से इतर कोरोना के साथ आगे बढ़ने, कोरोना को परास्त करने और भारत को आत्मनिर्भर हो कर विश्व का अग्रणी देश बनाने के संकल्प देश के सामने रखा।

आलोक जी ने कहा क्या करें कोरोना से बचने के लिए? इसकी न कोई दवा और न कोई वैक्सीन हैI इससे लड़ने के लिए हमे जीने के आज के जो मानदंड है उन से पीछे हटना होगा और हमारे जीवन के जो पुराने मानदंड थे उन्हें अपनाना होगाI घर से जूते बाहर उतारें, भोजन से पहले हाथ मुहँ धोये, कपडे बदलें, परिवार के लोगो के साथ समय बिताएं, स्वस्थ रहने के लिए आसन - व्यायाम करे तथा डिप्रेशन से बचने के लिए पूजा पाठ करें, इस तरह की दिनचर्या से हम आगे बढ़ सकते है क्योकि कोरोना अभी जाने वाला नहीं हैI

आज से लगभग 6 हफ्ते पहले एक सर्वेक्षण हुआ था जिसका अमर्त्यसेन जैसे अर्थशास्त्री ने समर्थन किया थाI यह खबर 10 बड़े अख़बारों में छपी थीI इसमें कहा गया था कि बहुत सारे लोगो का धन्धा बंद हो गया हैI 42% लोगो के पास कोई आय का साधन नहीं हैI राजस्थान पत्रिका जैसे अख़बार ने लिखा था कि एक सप्ताह में देश में फ़ूड राइट्स (Food Riots) हो जायेंगेI आज 6 सप्ताह बीत गये लेकिन ऐसी स्थिति नही आयीI भुखमरी नही हुईI


आज जो लोग प्रवासी मजदुर व अन्य लोगो की जो सेवा कर रहे है वे इन सर्वेक्षणों को फेल कर रहे है, लोगो को बसें मिल रही है या नही मिल रही है, पर खाना पीना तो मिल रहा हैI समाज की सभी संस्थाएं, मंदिर, गुरुद्वारें, डेरे, मठ स्थानक आदि सामाजिक संगठनों एवं व्यक्ति लोगो को सेवा में लगे हुए हैI किसी को भूखा न सोना पडे – मानो यह संकल्प पुरे देश ने ले लिया हैI हमने पिछले 60-70 सालो से अपनी धार्मिक संस्थाओं की शक्ति को नजरंदाज किया है, अगर उसे हम विकास के कार्यों में लेते तो बहुत अच्छा होताI


उन्होंने अन्न दान के महत्त्व को बताते हुए दो पौराणिक घटनाओं का वर्णन किया (i) रामायण से राजा श्वेत की एवं (ii) महाभारत से सोने के नेवलें की कथा जो लोगो को अन्न दान का महत्व बताती हैI इस तरह से अन्न दान के महत्व की घटनाएँ भारत में उपजे सभी धर्मों में दी गयी हैI

कोरोना एक साल रहेगा या दो साल रहेगा यह पता नही पर एक दिन में जाने वाला नहीं है, यह हमारे साथ रहने के लिए आया है, कोरोना के साथ ही जीना होगाI हमे आज कहा जा रहा है कि हाथ साफ रखे, पैर धोये, कपडे बदले, अगर हम अपने परिवारों के पिछले इतिहास को देखे तो हमारे परिवारों में 20 साल पहले तक यह होता थाI हमे अपने महापुरुषों व धर्माचार्यों के माध्यम से समाज को यह बाते बतानी होंगीI हमें बचाव के उपायों को स्वभाव में लाते हुए आगे बढ़ना होगा और इस संकट को अवसर मानना होगाI कोरोना भारत के लिए बहुत बड़ा अवसर हैI प्रधानमंत्री जी का भाषण आत्मविश्वास पूर्ण है, देश कोरोना से जीतेगा, दुनिया में भारत को सबसे अच्छा देश बनायेंगेI

महात्मा गाँधी के आन्दोलन के समय देश में 700000 गाँव थेI आज के जैसे सम्पर्क के साधन नही थे, लोगो के पास उनका सन्देश कैसे चला गयाI स्वदेशी आन्दोलन के द्वारा सभी को स्वदेशी का महत्व पता चला, गाँव की महिलाओं ने विदेशी वस्त्रों का त्याग कर दिया उनमें, आग लगा दी और खादी के कपड़ों को महत्व दियाI ऐसा करके उन्होंने अपने को ब्रिटिश सरकार के खिलाफ आजादी की लड़ाई का योद्धा समझाI



हम सभी उपभोक्ता हैI हम आने वाले समय में भारतीय उत्पादों पर ध्यान दें, भारत की चीज़ थोड़ी महंगी रही, तो भी वही खरीदेंगे, जिससे मजदुर, दुकानदार, देशी छोटे-बड़े उत्पादकों को मजबूती मिलेगीI विदेशी चीज़े नही खरीदेंगे, जिससे मेरा अपने देश को आत्मनिर्भर बनाने में योगदान होगाI हमें एक्सपोर्ट क्वालिटी व इम्पोर्ट क्वालिटी तथा लोकल क्वालिटी के अर्थ को बदलना होगा, हमे अपने उत्पाद (सबसे-अच्छे) विश्व स्तर के बनाने होंगेI

लाखों-लाखों प्रवासी अपने घरों को लौट रहे है, साधन नहीं मिले तो पैदल जा रहे हैI घर का जरुरी सामान सिरपर व गोद में बच्चे लेकर जा रहे हैंI इनमें विराट शक्ति हैI इनको काम दे कर देश का भाग्य बदलेंI

इसी तरह प्लेग नाम की महामारी 1899 में चीन से भारत में आयी थी जिससे भारत में एक करोड़ से अधिक लोग मरे थेI सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र कलकत्ता थाI यहाँ पर लोग जानवरों की तरह मर रहे थेI स्वामी विवेकानंद जी ने कुछ समय पहले रामकृष्ण मिशन मठ के लिए कलकत्ता में एक जमीन खरीदी थीI जिसे उन्होंने प्लेग से पीड़ित लोगो की सेवा के लिए बेचने की तैयारी कर ली थीI उन्होंने कहा था कि हम सन्यासी है, पेड़ के नीचे रहेंगे, भिक्षा मांग कर खायेंगे पर समाज की सेवा में कमी नही आने देंगेI आज मठ से अधिक महत्व पूर्ण लोगो की सेवा हैI ये सभी लोग मेरे खून के सम्बन्धी है विपति के समय हम बैठे नही रह सकतेI इस भावना से देश के प्रत्येक व्यक्ति की चिंता करते हुए हम आगे बढ़ेI




डॉ. वी एस नेगी, दिल्ली विश्विद्यालय ने आलोक कुमार के विचार प्रासंगिक बताते हुए कहा क सोशल मीडिया में 90% खबरें नकारात्मकता के कारण गलत फैल रही है, समाज के लोगो को यह सोचना चाहिए कि वे सकारात्मक सोच की तरफ कैसे अग्रसर हो तथा नकारात्मकता से कैसे दूर रहें I





सी. ए. मनीष मांगलिक, अध्यक्ष नवचेतना जाग्रति मिशन चैरिटेबल ट्रस्ट (बुलंदशहर) ने मन्दिरों के महत्व विषय को रखा और बताया कि हम किस प्रकार से उनको को सामाजिक सेवा करने के शक्तिशाली केंद्र के रूप में उपयोग में ला सकते है I गरीब लोगो में जो राहत की वस्तुए बांटी जा रही हे उनका कुछ लोग दुरूपयोग कर रहे है और उन वस्तुओ को बेच रहे है I मन्दिर अगर राहत सामग्री बाटने के केंद्र होंगे तो इस तरह की घटनाये नही होंगी क्योकि मन्दिर से जुड़े हुए लोग सभी को पहचान कर ये कार्य करेंगे और वह वस्तुए जरूरत मंद लोगो को मिलेंगी I


नेतराम ठगेला, अध्यक्ष आल इंडिया SC/ST फेडरेशन ने मन्दिरों में जनता का पैसा का जनता की सेवा के लिए लगाने की बात कही। स्वदेशी के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि हमारी सरकार को इसे स्पष्ट करना होगा I इसके लिए व्यवहार व् सिधांत के अंतर को खत्म करना होगा I


पटना से बबन रावत, राष्ट्रीय अध्यक्ष महादलित परिसंघ (महादलित संघठनो का अखिल भारतीय परिसंघ) कहा कि कोरोना चीन से निकला और दुनिया को अपनी कैद में ले लिया I क्या भारत सरकार से आंकलन करने में चूक हुई है जो प्रवासी मजदूर दूसरे राज्यों में काम धंधो के लिए गये थे, आज वे बिना साधन के सडको पर पैदल चल रहे है क्या सरकार ने इन लोगो के बारे में सोचा नहीं था ? भारत के चीन के साथ जो व्यापर सम्बन्ध हे अब हमें तोड़ लेना चाहिये I हमें स्वदेशी वस्तुओ का उपभोग करना चाहिए चाहे वे महंगी क्यों न हो, अगर चीन के साथ हमारे इसी तरह के व्यापारिक सम्बन्ध रहे तो यहाँ के व्यापर, उधोग रोजगार पर उसका गहरा प्रभाव पड़ेगा I


मुख्य वक्ता आलोक कुमार से मुखातिब होकर बबन रावत ने कहा कि प्रवासी मजदूर लोगो की स्थति आज सडको व् अन्य मार्गो पर सामान लेकर जा रहे है, ये सरकारी आंकलन एवं समाज में सुरक्षा कर्मियों की चूक की बजह से यह स्थति बनी है I आप चीन से व्यपार संधि तोड़ने की बात कह रहे है तो यह WTO के नियमो का उलंघन होगा I नीतिगत लेवल पर यह निर्णय लेना कठिन है लेकिन भारत के नागरिक अगर यह निर्णय कर ले कि वह भारतीय स्वदेशी उत्पाद ही खरीदेंगे तो और अच्छा होगा I



प्रो. आर. एन खरवार, BHU (वाराणसी) के मुताबिक संवाद के लिए दोनों विचार होने चाहिए अनुकूल एवं प्रतिकूल तभी किसी विषय की सार्थकता होती है , हमें अपने पुराने इतिहास से प्रेरणा लेनी चाहिए। बाहर सभी लोग भोजन की तलाश में जाते है कोरोना से हमें साफ सफाई से बचना है I हाइजैनिक कंडीशन जरुरी है , 4 तरह के लक्षण कोरोना के पाए गये है, भारत की आबादी बहुत ज्यादा है I संक्रमण फेलने का खतरा ज्यादा है, सावधानी से ही कोरोना से बचा जा सकता है I सफाई कर्मचारियों के हितो का विशेष ध्यान रखने की जरुरत है I जब से कांट्रेक्ट सिस्टम आया है इन की स्थति दयनीय होती जा रही है इन को सेफ्टी किट तक उपलब्ध नहीं कराई जाती है कांट्रेक्टर उन के हितो को भूल जाते है I भारत में मजदूरों व् कर्मचरियों की आय में 25 से 30 गुना तक का अंतर है यही अंतर विश्व में 5 से 10 गुने तक का दिखता है, इस अंतर की वजह से मजूदर लोगो की जरूरते भी पूरी नही हो पाती है I कब तक इन लोगो को खाना पीना मिलता रहेगा अब उनको रोजगार की जरूरत है I



डॉ. सुधीर कुमार, चौ. चरण सिंह विश्वविद्यालय (मेरठ) – कोरोना के बारे में मीडिया के द्वारा सही तथ्यों की जानकारी नहीं दी जाती है लोगो में भ्रम बना रहता है , रिकवरी रेट लगभग 50% है म्रत्यु दर 2-3 % है I जागरूकता से हम कोरोना से लड़ सकते I परम्परागत ओषधी के रूप में लोंग का प्रयोग उत्तम रहेगा I



डॉ. गीता सहारे, दिल्ली विश्वविध्यालय – कोरोना जैसी बीमारी से हम अपने संस्कारो और आदतों में परिवर्तन कर के बाहर निकल सकते है यह बात ठीक है I कोरोना से 200 से ज्यादा देश प्रभावित है I इससे लड़ने के लिए व्यक्तिगत लेबल पर हम क्या कर सकते है I जैसे में दिल्ली विश्वविध्यालय के बच्चो की कांसिलिंग कर रही हूँ उसी तरह से प्रत्येक व्यक्ति को समाज के प्रति अपनी जिमेदारी को निभाना चाहिए I


डॉ. शैलेंद्र सोलंकी – कोरोना के बारे में CBI और INTERPOL की यह खबर है कि समाज के कुछ असामाजिक तत्व लोगो में कोरोना की झूंठी जानकारी देकर लोगो को अपना शिकार बना रहे है उनके अकाउंट हेक किये जा रहे है , हमें ऐसे लोगो के चंगुल से बचना चाहिए I कोरोना से लड़ते हुए आगे बढ़ने के लिए हमे समाज के विभिन्न संगठनो एवं संस्थाओ एवं व्यक्तिगत रूप से सुझाव लेने चाहिए और उन लोगो को सम्मानित भी किया जाना चाहिए I


डॉ. राकेश लाल (देहरादून) – आज पूरी दुनिया में मानवता के ऊपर संकट है, हमारी सरकारें इससे कैसे निबटती है ? मेरा सुझाव है सरकार ने जो 20 लाख करोड़ रूपये के पॅकेज की घोषणा की है उसमे से 40 हजार करोड़ रूपये मनरेगा के कार्यो पर खर्च किये जायेंगे यह सरकार का एक अच्छा निर्णय है जिससे मजदूरों को रोजगार मिलेगा I प्रवासी मजदूरों को उनके घर तक छोड़ा जाए , सरकारों द्वारा उन पर राजनीति न की जाए I राष्ट्र के निर्माण में मजदूरों का योगदान महत्व पूर्ण होता है I हमे अपने पुराने लघु और कुटीर उधोगो पर ध्यान देना होगा I लोग स्वदेशी के नाम पर लोगो को लुटे नहीं सकारात्मकता का परिचय दे I मेरे राज्य उत्तराखंड में छुआ-छूत की एक घटना सामने आयी है, कोरंटाइन में जिन लोगो को रखा गया है उन्होंने खाना खाने से मना कर दिया है क्यों कि वहां पर खाना निम्न जाति के लोग बना रहे है I अब ये नजरिया बदलना चाहिए I

चन्दन कुमार (बिहार) – आज के समय में आत्म निर्भर भारत का विचार असम्भव है , हमारे यहाँ क्वालिटी पर ध्यान नहीं होता क्वांटिटी पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है जिससे क्वालिटी गिर जाती है 1990 का दोर हमने देखा है I हमे वोकल फॉर लोकल के साथ ही साथ लोकलाईजेसन ऑफ़ वैल्यूज भी करना होगा I आगे बढ़ने के लिए आज हमारे पास अच्छा मोका है हम मजदूरों का सदुपयो करके आगे बढे, बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में इसकी बहुत अच्छी सम्भावनाये है I



सभी के विचार व प्रश्न के बाद --- समारोप टिप्पणी


चर्चा के अंत में मुख्य वक्ता आलोक कुमार ने कहा कि आयुष मंत्रालय की पहल पर मेरे घर में दो तीन दिन काढ़े का प्रयोग हुआI मैंने पूछा क्या क्या पड़ता है इसमें, तो बाद में काढ़ा बनाना बंद कर दिया गया, क्योकि हमारी रसोई में वह रोज के प्रयोग की वस्तुएं है, हमारी रसोई एक छोटी सी आयुर्वेद्शाला ही हैI सरकार से बड़ी ताकत समाज की हैI हमें अपनी मानसिकता को बदलना होगा, आधा गिलास खाली है ये नकारात्मकता की सोच हैI आधा गिलास भरा है यह सकारात्मकता की सोच है, हमें अपनी मनोवृतियों में बदलाव करना चाहिएI



कार्यकम में भारत के विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व रहा - उतर प्रदेश , बिहार, झारखण्ड, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखण्ड, हिमांचल, जम्मू एवं कश्मीर, पश्चमी बंगाल, त्रिपुरा, उड़ीसा, महारष्ट्र, तमिलनाडू आदि क्षेत्रो से विभिन विश्वविद्यालयों से शिक्षाविद, प्रो., अर्थशास्त्री, ट्रेड यूनियन लीडर, सामाजिक कार्यकर्ता, वकील, शोधार्थी, पत्रकार, दलित चिंतक व सामाजिक में सक्रिय व्यक्तियों के द्वारा चर्चा में भाग लिया। इन में मुख्य रूप से श्री रितेश अग्रवाल , डॉ. गीता सहारे, डॉ. नरेंद्र कुमार तुली, सरदार गुरमीत सिंह, डॉ. डोरी लाल, डॉ. नितीश कुमार, डॉ. ज्योति , डॉ. मख्खन लाल , डॉ. सुभाष पहाड़िया , श्री नेतराम ठगेला, डॉ. अंजलीधर, मीनक्षी चटर्जी,, डॉ. विजय आर्या, श्री जयश अग्रवाल, डॉ त्रिमूर्ति, अधिवक्ता सुमन वीर, डॉ चन्द्रकांता, डॉ. संजीव कुमार, डॉ. रुकमनी, डॉ. अजय शास्त्री, डॉ. सुनील कौशिक, डॉ. संतोष , डॉ. अमरजीत परिहार , डॉ.मनोरमा, डॉ. धर्मेन्द्र कुमार, डॉ. रमानाथ नायक, डॉ. सतीश कुमार , डॉ. सुधीर कुमार , डॉ. मुकेश शर्मा, श्री विनय , पंकज, कविता , मो. नफीज़, सुमित, राहुल इत्यादि शामिल हुए।


टीम स्टेट टुडे

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