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भारत चीन सीमा पर तनाव बढ़ा, हथियार पहुंचे, क्या चीन फिर छेड़ सकता है भारत से युद्ध?



ताजा खबर ये है कि लद्दाख में तनाव बढ गया है। चीन ने भारतीय सीमा के पास तोप और दूसरे हथियार जमा किए हैं। भारतीय सीमा से सिर्फ 25 किलोमीटर दूर हथियारों का ये जखीरा चीन ने इकट्ठा किया है। हथियारों की ये खेप कुछ ही समय में एलएसी पर लाई जा सकती है। दूसरी तरफ भारत ने भी सैनिकों और हथियारों का जमावड़ा बार्डर पर बढ़ा दिया है। ITBP और Army के जवान LAC की तरफ लद्दाख से भेजे गए हैं।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या भारत और चीन के बीच युद्ध होगा। देश के जाने माने वरिष्ठ पत्रकार रवि पाराशर जी ने इस परिस्थिति की समीक्षा सवाल और जवाब के रुप में की है। कोरोनाकाल के दौरान सीमा पर इस बार पाकिस्तान नहीं बल्कि चीन की तरफ से बढ़ रहे तनाव का ये विश्लेषण जरुरी है हर उस भारतीय के लिए जो जानता है अपनी सीमाओं के महत्व के।

क्या चीन फिर छेड़ सकता है भारत से युद्ध?

(विश्वेषण- पहली किश्त)



भारत की जवाबी रणनीति की वजह से चीन ने तीखे बयानों की तलवार भले ही वापस फिर से म्यान में रख ली हो, लेकिन उसकी कथनी और करनी एक नहीं होती, ये बात हम अच्छी तरह जानते हैं। चीन पर पूरी दुनिया से जिस तरह चौतरफ़ा वार हो रहे हैं, उन्हें देखते हुए फिलहाल तो वो शांत रहने का दिखावा कर रहा है, लेकिन उसकी कुटिल चालों को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं रहा जा सकता। हालांकि भारत को चीन के साथ अपने विवादों के निपटारे के लिए अमेरिका की मध्यस्थता की ज़रूरत नहीं है, फिर भी अमेरिकी रुख़ की वजह से कूटनैतिक पलड़ा फिलहाल भारत की ओर झुकता दिखाई दे रहा है।

क्या फिर चालाक चीन छेड़ेगा भारत से युद्ध?

एक बहुत सीधा सा सवाल फिर से हवा में तैर रहा है कि क्या भारत और चीन के बीच युद्ध हो सकता है— इसका बहुत सीधा सा जवाब तो यही है कि निकट भविष्य में ऐसा होने वाला नहीं है, क्योंकि चीन जानता है कि आज का भारत अपनी आन-बान-शान की रक्षा मामले में पूरी तरह सक्षम है और हमारी एक इंच जमीन भी चीन किसी क़ीमत पर हड़प नहीं पाएगा।


भारत से जंग छेड़ने की हिम्मत नहीं है चीन में

फिर ऐसा क्या है कि चालाक चीन ऐसे समय में भारत को जमीन की जंग में उलझाकर दिमागी लड़ाई छेड़ना चाहता है, जबकि भारत समेत पूरी दुनिया कोरोना के ख़िलाफ़ महायुद्ध में उलझी हुई है... इसका उत्तर भी बहुत सीधा है कि कोरोना वायरस को लेकर पूरी दुनिया के निशाने पर आ चुका चीन बुरी तरह बौखला चुका है और इस तरह की हरकतों के ज़रिए वो मूल आरोपों से ध्यान हटाने की साजिशों में लगा है। तेज़ी से तरक्की की राह पर चल रहे भारत जैसे महा-देश से सीधा युद्ध छेड़ने का मतलब होगा कि चीन पूरी दुनिया से लड़ाई छेड़ना चाहता है। आज के दौर में इतनी हिम्मत चीन सपने में भी नहीं कर सकता।

पाकिस्तान तो चीन की चाल का पिटा हुआ मोहरा बहुत पहले से है ही, लेकिन नेपाल जैसा परंपरागत दोस्त देश भी अगर कोरोना के काले काल में ग़ैरज़रूरी सीमा विवाद का मसला उठा कर भारत को आंखें दिखाने पर आमादा है, तो समझने वाले अच्छी तरह समझते हैं कि ऐसा चीन की नापाक शह पर ही हो सकता है।

कोरोना संकट के इस काल में अगले कुछ महीनों तक दुनियावी घटनाक्रम चाहे जो भी रहें, लेकिन एक बात पूरी तरह साफ है कि जब दुनिया कोरोना के साथ जीना सीख लेगी, या कोरोना वायरस के भय का अंत कर देगी, तब चीन का गुरूर भी पूरी तरह टूट चुका होगा। दुनिया में शक्ति के नए महा-समीकरण स्पष्ट तौर पर उभरे हुए होंगे, जिनमें भारत की भूमिका निर्णायकों वाली होगी। भारत जो चाहेगा, दुनिया को मानना होगा। चीन को ये बात पूरी तरह समझ में आ रही है, यही वजह है कि वो भारत को खोखली गीदड़भभकी या बंदरघुड़की देने में लगा है।

हर समय तैयार रहती हैं भारतीय सेनाएं

चीन के राष्ट्रपति ने लाल सेना को तैयार रहने को कह कर माइंड गेम में बढ़त हासिल करने का बड़बोला प्रयास किया है, लेकिन यह हास्यास्पद लगता है। चीन इस तरह के टोटकों से भारतीय नेतृत्व के माथे पर शिकन डालने में कामयाब नहीं होता, बल्कि अधजल गगरी छलकत जाए वाले मुहावरे की याद ही दिलाता है। चीन की सेनाएं ख़ास मौक़ों के लिए तैयार होती होंगी, लेकिन भारतवासी जानते हैं कि भारतीय सेनाएं हर वक़्त तैयार रहती हैं। चालाक चीन की ओर से सीमा विवाद को तूल देने के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी बिना अनावश्यक बयानबाज़ी के भारत की तैयारियों की समीक्षा कर चुके हैं। भारत की राजधानी दिल्ली में पहले से तय सैन्य कमांडरों के सम्मेलन के बीच चीन के प्यादे हर मोर्चे पर पस्त हो चुके पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने 27 मई को इस्लामाबाद से आरोप जड़ा कि मोदी सरकार विस्तारवादी है और उसकी नीतियां नाजी विचारधारा जैसी हैं।

चीन के लिखे बयान ही बोलते हैं पाकिस्तान के हुक़्मरान

आतंकवाद को गोद और सिर-माथे पर बैठाने वाले इमरान ख़ान के इस बयान पर कौन यक़ीन करेगा कि भारत अपने पड़ोसी देशों के लिए ख़तरा बन रहा है। पूरी दुनिया जानती है कि दक्षिण पूर्व एशिया में अपनी हैसियत बढ़ाने के लिए चीन हमेशा से विस्तारवादी रवैया अपनाता रहा है। अब इमरान ख़ान ने अगर भारत के लिए विस्तारवादी शब्द का इस्तेमाल किया है, तो ज़ाहिर है कि चीन पर लगने वाला पुख़्ता आरोप ही उनके ज़ेहन में रहा होगा। बौखलाहट में अक्सर इस तरह के ही असावधान बेग़ैरत बयान दिमाग़ में आते हैं और इससे फिर से ये साबित हो जाता है कि चीन के चंगुल में बुरी तरह जकड़े पाकिस्तान के हुक़्मरान चीन के पीठ थपथपाने पर ही ज़ुबान खोलते हैं। ये भी संभव है कि चीन उन्हें लिख कर भेजता हो कि उन्हें क्या बोलना है। कुल मिलाकर चालाक चीन की मौजूदा चाल हिंदी भाषा के मशहूर मुहावरे थोथा चना बाजे घना के अर्थ को ही सार्थक सिद्ध कर रही है।

क्या चीन लंबे समय से गढ़ रहा था कोरोना की काया?

चीन भारत के साथ सीमा विवाद को सोच-समझ कर गर्माने में लगा है, तो टाइमिंग के हिसाब से यह बात भी स्पष्ट हो जाती है कि उसे विश्व दबदबे के कूटनैतिक अखाड़े में भारत के महाशक्ति के तौर पर उभरने की बात पर पूरा यक़ीन है और सीमावर्ती इलाक़ों में पिछले कुछ वर्षों की उसकी हरक़तों से ये भी साफ़ है कि भारत को लेकर यह विश्वास चीन को अचानक नहीं हुआ है। किसी भूल के कारण कोरोना संकट अगर अचानक भी सामने आ गया हो, तो चीन को अब ये भरोसा भी हो गया होगा कि महाशक्ति होने के उसके गुमान के चूर-चूर हो जाने के बाद उसकी जगह भारत निकट भविष्य में ही लेने वाला है। भारत समेत पूरी दुनिया कोरोना संकट का सामना कर रही है, ऐसे में भारत के साथ इस समय ग़ैरज़रूरी सीमा विवाद को इस हद तक सुलगाने की चीन की साज़िश से तो यही दुर्गंध आ रही है।

हमें यह समझना चाहिए कि चीन, भारत का उज्ज्वल भविष्य भांप कर बहुत ज्यादा डर गया है... क्यों बेहद डरे हुए चीन के कानों में यही गाना लगातार गूंज रहा लगता है कि हम तो डूबेंगे सनम, तुमको भले डूबेंगे... क्यों चीन ये समझने के लिए राज़ी नहीं है कि वो भले ही डूब जाए, भारत को अपने साथ डुबोने में किसी भी स्तर पर कामयाब नहीं हो पाएगा...

रवि पाराशर .


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