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जंग ए बदर...50 किलो आईडीएक्स, कठुआ की कार, पुलवामा का रास्ता, नीले ड्रम, और फिर...

Updated: May 29, 2020



जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सुरक्षाबलों ने आतंकियों की एक बड़ी साजिश का खुलासा करते हुए एक सैंट्रो कार से 50 किलो विस्फोटक बरामद किए हैं। 2019 में हुए आतंकी हमले की तर्ज पर इस विस्फोटक को यहां सुरक्षाबलों के किसी काफिले पर हमले के लिए लाए जाने का शक जताया जा रहा है। गाड़ी में सुरक्षाबलों को 50 किलोग्राम के आसपास आईईडी मिली थी, जिसके बाद इसे कंट्रोल्ड एक्सप्लोजन के जरिए ब्लास्ट करते हुए एक बड़ी साजिश को टाल दिया गया।

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तीन दिन से मिल रहे थे खुफिया इनपुट्स


इस कार की मूवमेंट के बारे में सुरक्षाबलों को खुफिया इनपुट्स के जरिए जानकारी मिली थी। कार की घेराबंदी किए जाने के बाद इसमें सवार लोग अंधेरे का लाभ लेकर भागने में कामयाब हुए हैं, जिनकी तलाश के लिए घाटी में बड़े स्तर पर तलाशी अभियान चलाए जा रहे हैं। खुफिया इनपुट्स के जरिए पुलिस को इस बात की जानकारी मिली थी कि विस्फोटकों से लदी एक कार को लेकर कुछ आतंकी पुलवामा के राजपोरा इलाके की ओर जा रहे हैं।

नीले रंग के ड्रम में थे विस्फोटक


रात 11-12 बजे के बीच राजपोरा के आइनगुंड के पास एक संदिग्ध वाहन के नाके की तरफ आने पर पुलिस ने उसके चालकों को रुकने का इशारा किया। इस दौरान जब गाड़ी नहीं रुकी तो जवानों ने उसकी तरफ फायरिंग की। इस बीच तेज गति से जंगली इलाके में वाहन ले जाकर वाहन चालक ने उसे वहीं छोड़ दिया और फिर मौके से फरार हो गया। जानकारी के बाद मौके पर पहुंचे जवानों ने गाड़ी की तलाशी ली, जिसके बाद सैंट्रो कार की रेयर सीट पर एक नीले रंग के ड्रम में करीब 50 किलो आईईडी बरामद की गई। बम डिस्पोजल स्क्वॉड की मदद से गुरुवार सुबह कंट्रोल्ड एक्सप्लोजन के जरिए इस कार को उड़ा दिया।


जैश के टेरर मॉड्यूल ने कराया था पुलवामा में हमला


इस वाहन में लाए गए विस्फोटक को कश्मीर घाटी में पाकिस्तान के आतंकी संगठनों की मदद से एक्सपोर्ट किया गया था। जिस वाहन में यह विस्फोटक मिले हैं, वह कठुआ के किसी वाहन के नंबर प्लेट के साथ मिली है। एजेंसियों ने इस घटना के पीछे जैश या लश्कर के किसी टेरर मॉड्यूल के शामिल होने का शक जताया है। पुलवामा में 2019 में हुआ हमला भी जैश के ही दहशतगर्दों ने अंजाम दिया था और उसकी भी साजिश कार में विस्फोटक लादकर रची गई थी। कश्मीर घाटीका पुलवामा जिला सुरक्षाबलों की मूवमेंट के लिहाज से काफी संवेदनशील माना जाता रहा है। पूर्व में कई बार यहां पर जवानों के काफिले पर हमले होते रहे हैं। साल 2019 के हमले के अलावा भी यहां पर सीआरपीएफ की रोड ओपनिंग पार्टी और आर्मी की पट्रोलिंग टीमों पर कई बार हमले किए जा चुके हैं।

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नाइकू और मूसा का बदला लेने का प्लान तो नहीं था?


पुलवामा श्रीनगर शहर से करीब 46 किलोमीटर दूर है। इस इलाके को हिज्बुल के आतंकियों से सबसे संवेदनशील हिस्सों में से एक माना जाता रहा है। हाल ही में सेना ने जिन टॉप आतंकियों को मार गिराया है, उनमें से कई का अंत पुलवामा के ही अलग-अलग हिस्सों में हुआ है। ऐसे में इस बात का भी शक है कि रियाज नाइकू और जाकिर मूसा जैसे आतंकियों के मारे जाने का बदला लेने के लिए आतंकी संगठनों ने इस साजिश को अंजाम दिया है। फिलहाल आईईडी की बरामदगी के बाद एनआईए को इसकी जांच सौप दी गई है।


400 जवान थे आतंकियों के निशाने पर


पुलिस को शक है कि जैश के निशाने पर सीआरपीएफ के 400 जवान थे। गुरुवार को सीआरपीएफ की 20 गाड़ियों का काफिला श्रीनगर से जम्मू पहुंचा है। पता चला है कि काफिला सुबह 7 बजे बक्शी स्टेडियम कैंप से जम्मू के लिए निकलना था। इस काफिले में सभी रैंक के अफसर और जवान शामिल थे।

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जंग-ए-बदर क्या है


रमजान के 17वें रोजे को जंग-ए-बदर के नाम से जाना जाता है। इसी दिन इस्लाम के लिए पहली जंग लड़ी गई थी। जंग-ए-बदर 624 ई. में मदीना में लड़ी गई थी। कहा जाता है कि लड़ाई में एक तरफ मक्का के कुरैश कबिले के तकरीबन 1000 बड़े-बड़े योद्धा शामिल और दूसरी तरफ थे पैगम्बर और उनके 313 साथी। इनमें से ज्यादातर ने पहले कभी जंग नहीं लड़ी थी।

अरब क्षेत्र में यह लड़ाई बुराई के खिलाफ हुई बताई जाती है लेकिन जम्मू कश्मीर में इसी दिन आतंकी कई बार हमलों को अंजाम देने के लिए चुन चुके हैं। कश्मीर में भी कथित 'आजादी' के नाम पर हो रहे आतंकी हमले भी इसी का हिस्सा हैं। आतंकी वहां इसी दिन को इसलिए भी चुन रहे क्योंकि जंग 'आजादी' की न होकर इस्लाम की होती जा रही है। इस बात को मजबूत करता एक तथ्य भी है। दरअसल, पुलवामा आतंकी हमले में CRPF के 44 जवानों को शहीद करने वाला जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी आदिल अहमद डार ने अपने आखिरी मैसेज में यह बात साफ तौर पर कही थी कि उसकी जंग कश्‍मीर की आजादी के लिए नहीं, बल्कि इस्‍लाम के लिए है।


प्लान में शामिल था आतंकी 'फौजी भाई' और आदिल


कश्मीर पुलिस के आईजी विजय कुमार ने बताया कि उन्हें पहले से ऐसे हमले के इनपुट मिल रहे थे और वे पूरी तरह तैयार थे। बुधवार को इनुपट के बाद उन्होंने जगह-जगह पुलिस नाके लगाए। सेंट्रो कार जिसका इनपुट पुलिस पर था उसे नाके पर रोकने को कहा गया। नहीं रुकने पर फायरिंग हुई फिर आतंकी गाड़ी छोड़कर भाग गया। अंधेरे का फायदा उठाकर वह कहीं गायब हो गया। सुबह बम स्कॉड आया तो गाड़ी में आईईडी मिला। विजय कुमार के मुताबिक, इस साजिश में जैश का पाकिस्तानी कमांडर फौजी भाई शामिल है। उसकी उम्र करीब 45 साल बताई जाती है। आदिल नाम का कोई आतंकी भी इसमें शामिल था जो हिजबुल और जैश दोनों के लिए काम करता है। आदिल डार नाम का ही शख्स पुलवामा आतंकी हमले में शामिल था।

टीम स्टेट टुडे


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