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सांगली जिले से सीखिए, 400 साल पुराने बरगद को बचाने की मुहिम, बदला हाइवे का नक्शा



नयी दिल्ली अगर वास्तव में पेड़ों को बचाना है तो सांगली जिले के लोगों से सीखना चाहिए। जिनकी पहल से मंदिर के बगल में बना सैकड़ों वर्ष पुराना बरगद का पेड कटने से बच गया है। हालाँकि चिपको आंदोलन के जरिये वृक्षों को बचाने की मुहिम जरूर वर्षों पहले चलाई गयी। लेकिन आज तकनीक के दौर में ऐसे तमाम आंदोलन ऊंट के मुंह में जीरा साबित होंगे।



दरअसल महाराष्ट्र के सांगली जिले में एक मंदिर के बगल में लगे 400 साल पुराने पेड़ को बचाने के लिए केंद्र सरकार ने एक नैशनल हाइवे का नक्शा ही बदल दिया। इस हाइवे को एनएचएआई के अधिकारियों ने बनाया था। महाराष्ट्र के सांगली जिले में एक ऐतिहासिक बरगद के पेड़ को बचाने के लिए केंद्र सरकार ने एक अनोखा फैसला लिया। हाइवे प्रॉजेक्ट के लिए पास हुए नक्शे में बदलाव करते हुए सरकार ने पेड़ को ना काटने का फैसला किया। जिस हाइवे के लिए ये फैसला किया गया, उसे एनएचएआई के अफसर बना रहे हैं। सांगली जिले में लगे इस 400 साल पुराने पेड़ से स्थानीय लोगों का बहुत लगाव है। बीते दिनों एनएचएआई ने इस पेड़ को हटाकर यहां पर हाइवे बनाने का प्लान तैयार किया तो बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध शुरू कर दिया।



इसके बाद मामला महाराष्ट्र सरकार के मंत्री आदित्य ठाकरे तक पहुंचा। आदित्य ठाकरे ने इस पेड़ को संरक्षित करने और हाइवे का प्लान बदले जाने की मांग लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मदद मांगी। गडकरी के हस्तक्षेप के बाद तत्काल एनएचएआई के अफसरों ने हाइवे का प्लान बदलने की तैयारी शुरू की। 400 साल पुराने इस पेड़ के बचाने के लिए केंद्रीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने हाइवे का मैप बदला और फिर सड़क को मोड़कर पेड़ से दूरी पर बनाया गया। सरकार के इस फैसले के बाद पेड़ और नई सड़क की तस्वीरों को आदित्य ठाकरे ने सोशल मीडिया पर भी शेयर किया है। वहीं पर्यावरणविद अब इस खास फैसले की तारीफ भी कर रहे हैं। ऐसे में पूरे देश को सांगली की इस शानदार मुहिम से सीख लेना चाहिए क्योंकि सैकड़ों वर्ष पुराने वृक्ष बाकायदा पूरी संस्कृति और सभ्यता तक को सहेजे होते हैं


टीम स्टेट टुडे



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