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आज स्टेट टुडे के साथ चलिए मंगल ग्रह पर – देखिए क्या क्या भेजा है नासा के पर्सवियरेंस रोवर ने



अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा के जरिए मंगल ग्रह पर भेजे गए पर्सवियरेंस रोवर 4 मार्च, 2021 को पहली बार अपनी लैंडिंग वाली जगह से सफलतापूर्वक आगे बढ़ा है। नासा के मुताबिक, रोवर ने अपने अभियान का पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। साथ ही छह पहियों वाला रोवर गुरुवार को 33 मिनट में 6.5 मीटर यानी 21.3 फीट आगे चला।



रोवर चार मीटर आगे बढ़ा, फिर वहां से 150 डिग्री पर बाएं मुड़ा और फिर 2.5 मीटर पीछे आया आ गया। इस दौरान उसके पहियों के निशान मंगल ग्रह की सतह पर दर्ज भी हो गए हैं। नासा ने इसका वीडियो भी जारी किया है।



कैलिफोर्निया के पासाडेना में नासा के जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी में पर्सवियरेंस की गतिशीलता का परीक्षण करने वाली इंजीनियर अनीस ज़रीफ़ियन के मुताबिक "पर्सविरयरेन्स के टायर को किक और उसे बाहर घुमाने का यह हमारा पहला मौका था। परीक्षण अभियान 'अविश्वसनीय रूप' से बहुत सफतलापूर्वक बढ़ा और मिशन को पूरा करने वाली टीम के लिए यह बहुत बड़ा 'मील का पत्थर' साबित हुआ है। जल्द ही नासा रोवर लेकर लंबी ड्राइव पर निकलने वाले हैं, यह तो अभी शुरुआत है।



रोवर रोज 200 मीटर की दूरी तय कर सकता है, जो पृथ्वी पर एक दिन की तुलना में थोड़ा लंबा है। 18-19 फरवरी की मध्यरात्रि में रोवर मंगल ग्रह पर जीवन की तलाश करने के लिए सफलतापूर्वक उतरा था। नासा ने दावा किया है कि मंगल ग्रह पर यह अबतक की सबसे सटीक लैंडिंग है।


अब से पहले जो भी रोवर नासा द्वारा भेजे गये हैं, उनकी तुलना में पर्सिवियरेंस रोवर में सबसे मज़बूत पहिये लगे हैं।



अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा की ओर से मंगल ग्रह पर उतारा गया ये दूसरा एक टन वज़न का रोवर है।


पर्सिवियरेंस रोवर नासा द्वारा मंगल ग्रह की सतह पर उतारा गया अब तक का सबसे तेज़ रोवर भी है।


पर्सिवियरेंस रोवर से उम्मीद है कि वो अगले हफ़्ते में मंगल ग्रह की सतह की कई तस्वीरें लेगा, ताकि वैज्ञानिक आसपास के इलाक़े को बेहतर समझ सकें।



मंगल ग्रह की सतह पर जिस जगह पर्सिवियरेंस रोवर उतरा, उसे बतौर सम्मान लेखिका ओक्टाविया ई बटलर के नाम पर चिह्नित किया गया है।


मंगल तक पहुँचने के लिए सात महीने पहले धरती से गये इस रोवर ने तक़रीबन आधा अरब किलोमीटर की दूरी तय की।


रोवर एक पुरानी सूख चुकी झील की ज़मीन की जाँच करने के साथ-साथ अरबों साल पहले मंगल ग्रह पर माइक्रो-ऑर्गानिज़्म्स की किसी भी गतिविधि यानी जीवन के होने के चिन्हों की जाँच करेगा और उन्हें पृथ्वी पर भेजेगा।



1970 के बाद नासा का यह पहला मिशन है, जो मंगल ग्रह पर जीवन के निशान तलाशने के लिए गया है।


एजेंसी की ओर से बताया गया है कि यह रोवर क़रीब दो वर्ष के काल-खण्ड में मंगल ग्रह की सतह पर तक़रीबन 15 किलोमीटर चलेगा।


इस रोवर का एक उद्देश्य मंगल ग्रह पर कम वज़न वाले एक हेलिकॉप्टर को उड़ाना भी है।


पर्सिवियरेंस अपने साथ एक छोटे-से हेलिकॉप्टर को लेकर गया है। रोवर इस हेलिकॉप्टर को उड़ाने का प्रयास करेगा जो कि किसी अन्य ग्रह पर इस तरह की पहली उड़ान होगी।



मंगल तक पहुंचने के लिए सात महीने पहले धरती से गए इस अंतरिक्षयान ने तक़रीबन आधा अरब किलोमीटर की दूरी तय की है। 'पर्सिवियरेंस रोवर' मंगल गृह पर एक गहरे क्रेटर यानी गड्ढ़े में उतरा है जो कि मंगल ग्रह की भूमध्य रेखा जेज़ेरो के नज़दीक है।





मंगल गृह की सतह पर उतरने के बाद रोवर ने एक तस्वीर ट्वीट की है। ये रोवर एक पुरानी सूख चुकी झील की ज़मीन की जांच करने के साथ-साथ अरबों साल पहले मंगल पर माइक्रो-ऑर्गानिज़्म्स की किसी भी गतिविधि यानी जीवन के होने के चिन्हों की जांच करेगा और उन्हें पृथ्वी पर भेजेगा।


छह पहियों वाला ये रोवर आगामी 25 महीनों में मंलग के पत्थरों और चट्टानों की खुदाई करेगा ताकि उन सबूतों को तलाशा जा सके जो इस बात की ओर इशारा करते हों कि यहां कभी जीवन संभव था।



ऐसा माना जाता है कि अरबों साल पहले जेज़ेरो के पास एक विशाल झील हुआ करती थी। और जहां पानी होता है, वहां इस बात की संभावना रहती है कि वहां कभी जीवन भी रहा होगा।


टीम स्टेट टुडे


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