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टैक्स का नया सिस्टम कैसे है पारदर्शी – समझिए – कैसे खत्म होगी इंकम टैक्स विभाग की रिश्वतखोरी



सरकार का दावा है कि नए टैक्स सिस्टम के तहत आम करदाता को बड़ी राहत मिलेगी। अब दो सवाल पैदा होते हैं।


पहला - भारत में कितने लोग कितना टैक्स देते हैं ।

दूसरा – टैक्स पेयर की दिक्कत क्या है और नए सिस्टम से समस्या का समाधान कैसे हो रहा है।

सबसे पहले आपको भारत में टैक्स से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े बताते हैं –


- 130 करोड़ लोगों में से बहुत कम लोग टैक्स दैते हैं
- 8600 लोगों की आय 5 करोड़ से अधिक
- 3.6 लाख लोगों की आय 50 लाख से अधिक
- 2200 लोगों की उनके प्रोफेशनल काम से आय 1 करोड़ से अधिक
- 2019 में 5.78 करोड़ लोगों ने भरा आयकर रिटर्न
- 1.03 करोड़ लोगों की आय 2.5 लाख से कम
- 3.29 करोड़ लोगों की आय 2.5-5 लाख के बीच
- 4.32 करोड़ लोगों की आय 5 लाख तक

अब आपको बताते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी ने टैक्स सिस्टम में पारदर्शिता लाने के लिए कौन से तीन बड़े सुधार किए हैं जिससे टैक्सपेयर्स को राहत मिलेगी।

1. टैक्सपेयर्स चार्टर

सरल शब्दों में ये चार्टर एक तरह की लिस्ट होगी, जिसमें टैक्सपेयर्स के अधिकार और कर्तव्य के अलावा टैक्स अधिकारियों के लिए भी कुछ निर्देश होंगे। इसके जरिए करदाताओं और इनकम टैक्स विभाग के बीच विश्वास बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। इस चार्टर में टैक्सपेयर्स की परेशानी कम करने और इनकम टैक्स अफसरों की जवाबदेही तय करने की व्यवस्था होगी। इस समय दुनिया के सिर्फ तीन देशों- अमेरिका, कनाडा और आस्ट्रेलिया में ही यह लागू है।

2. फेसलेस अपील

फेसलेस अपील की सुविधा इस साल 25 सितंबर को दीन दयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर शुरू होगी। इस सुविधा के द्वारा भी भ्रष्टाचार और मनमानी को रोकने की कोशिश की जाएगी। इसके तहत टैक्सपेयर्स की अगर कोई शिकायत है तो उसे इसके लिए रैंडम तरीके से चुने गए अफसर के पास अपील का अधिकार होगा। यह अफसर कौन है, इसके बारे में किसी को जानकारी नहीं होगी। आयकर दाता को इसके लिए किसी भी दफ्तर के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी।

3. फेसलेस असेसमेंट

इसके पहले स्क्रूटनी वाले मामलों में असेसमेंट प्रक्रिया के दौरान करदाता को कई बार टैक्स अधिकारियों का चक्कर लगाना पड़ता था। यह एक तरह से भ्रष्टाचार की वजह बनता था और खासकर ज्यादा रकम वाले मामलों में ऐसे आरोप लगते थे। लेन-देन के जरिए मामले निपटाने की कोशिश हो सकती थी। लेकिन फेसलेस असेसमेंट यह रास्ता बंद हो जाएगा।

फेसलेस असेसमेंट इलेक्ट्रॉनिक मोड में होता है। इनमें टैक्सपेयर किसी टैक्स अधिकारी के आमने-सामने होने की या किसी इनकम टैक्स ऑफिस जाने की जरूरत नहीं होती।


टीम स्टेट टुडे



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