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योगी मंत्रिमंडल के जरिए शह-मात की सजाएंगे बिसात, अमित शाह रखेंगे 'मिशन-2024' की नींव


लखनऊ, 16 मार्च 2022 : अभी विधानसभा चुनाव जीता ही है कि भाजपाई रणनीतिकारों के दिमागी घोड़े अगला विजय रथ खींचने के लिए तैयार हो गए। गृहमंत्री अमित शाह को उत्तर प्रदेश का पर्यवेक्षक बनाए जाने के पीछे उद्देश्य ही यह है कि वह योगी आदित्यनाथ के नए मंत्रिमंडल का गठन कराते हुए ऐसी बिसात बिछाएं, जिस पर भाजपा मजबूती से शह-मात का खेल खेल सके। प्रदेश की राजनीति को करीब से देखते हुए पर्याप्त समय गुजार चुके अमित शाह ताजा चुनाव परिणामों से और भी अच्छे से कच्ची-पक्की जमीन का आकलन कर चुके होंगे।

उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव में 255 सीटों पर भाजपाकी विजय कापरिणाम आते हीयह चर्चा शुरूहो गई थीकि नए मंत्रिमंडलका गठन 2024 मेंहोने वाले लोकसभाचुनाव को ध्यानमें रखते हुएकिया जाएगा। इसपर अपने-अपनेतर्कों के साथसंगठन पदाधिकारी भीबहस छेड़े हैंकि कितने उपमुख्यमंत्रीहोंगे, किस क्षेत्रया जाति कोप्राथमिकता मिलेगी और किन-किन नेताओंका कदम बढ़ेगा।

इसबीच भाजपा शीर्षनेतृत्व ने यहसारा जिम्मा सौंपतेहुए गृहमंत्री अमितशाह को यूपीका पर्यवेक्षक औरउनके साथ झारखंडके पूर्व मुख्यमंत्रीरघुवर दास कोसह-पर्यवेक्षक बनादिया। अब होलीके बाद उनकालखनऊ आना प्रस्तावितहै। शाह केप्रदेश और केंद्रीयसंगठन के साथविमर्श के बादकिन-किन नामोंपर सहमति बनतीहै, यह बादमें पता चलेगा, लेकिन यह तयहै कि मंत्रिमंडलका गठन शतरंजकी उस बिसातकी तरह होगा, जिस पर मंत्रिमंडलका एक-एकसदस्य 2024 के चुनावीखेल का मोहराहोगा।

दरअसल, 2014 के लोकसभा चुनाव मेंजब भाजपा नेप्रदेश की 80 में से 73 लोकसभा सीटें जीतीं, तबप्रदेश प्रभारी के रूपमें मोर्चा अमितशाह ने हीसंभाला था। उन्होंनेसूबे की सूखीधरती की निराई-गुड़ाई अपने रणनीतिकअस्त्रों से करयहां कमल खिलायाथा। इसकेबाद वह पार्टीके राष्ट्रीय अध्यक्षबना दिए गए, लेकिन फिर 2017 काविधानसभा चुनाव हो या 2019 को लोकसभा चुनाव, यूपीकी रणनीति कीकमान शाह नेअपने हाथ मेंही रखी। परिणामसामने आए। संगठनका आत्मविश्वास बढ़ाऔर 2017 में सपा-कांग्रेस गठबंधन तो 2019 में सपा-बसपाके चुनौतीपूर्ण गठबंधनको भी भाजपाके रणबांकुरों नेधूल चटा दी।

इसबार 2022 के विधानसभाचुनाव में भीप्रदेश प्रभारी राधा मोहनसिंह और प्रदेशचुनाव प्रभारी धर्मेंद्रप्रधान को बनाएजाने के बावजूदरणनीति पर नजरशाह की हीरही। अब पार्टीको विश्वास हैकि यूपी कीनब्ज को गृहमंत्रीअच्छे से पकड़चुके हैं। चूंकि, चुनावी रणनीति में उनकीभागीदारी थी, इसलिएपरिणामों की समीक्षावह बेहतर करसकते हैं किकहां अपेक्षित परिणाममिले और कहांपार्टी कमजोर रही। अबउसी के मुताबिक, वह मंत्रिमंडल मेंक्षेत्रीय-जातीय समीकरण इसतरह दुरुस्त करनाचाहेंगे कि 2024 के लोकसभाचुनाव में भाजपाके विजय रथकी राह मेंइस तरह काकोई रोड़ा नआ पाए।

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