google.com, pub-3470501544538190, DIRECT, f08c47fec0942fa0
 

11 सीटों में से बीजेपी के आठों प्रत्याशियों का निर्विरोध राज्यसभा जाना तय, समझिये गणित


लखनऊ, 31 मई 2022 : उत्तर प्रदेश के कोटे से राज्यसभा में रिक्त हो रहीं 11 सीटों में से आठ पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने प्रत्याशी उतार दिए हैं। मंगलवार को अंतिम दिन सभी प्रत्याशियों ने विधानभवन के सेंट्रल हाल में पहुंचकर पर्चा जमा किया। वोटों के प्रत्यक्ष गणित के अनुसार नामांकन के साथ ही इन सभी का निर्विरोध राज्यसभा पहुंचना तय हो गया है। इसी तरह समाजवादी पार्टी (एसपी) के भी तीनों प्रत्याशियों का निर्विरोध निर्वाचन हो जाना है। हालांकि, मथुरा निवासी संत मौनी फलहारी बापू ने नौवें प्रत्याशी के रूप में निर्दलीय नामांकन कर दिया है।

भाजपा प्रत्याशी डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी, डा. राधा मोहन दास अग्रवाल, डा. के. लक्ष्मण, संजय नागर, डा. दर्शना सिंह, संगीता यादव, बाबूराम निषाद और मिथलेश कुमार एक साथ नामांकन करने के लिए विधानभवन पहुंचे। यहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक और प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह की उपस्थिति में नामांकन पत्र दाखिल किया। भाजपा के सभी ने प्रत्याशियों ने पत्रकारों से बातचीत में शीर्ष नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त किया। कहा कि पार्टी के निर्देशानुसार उच्च सदन के लिए अपनी प्राथमिकताएं तय करेंगे।

भाजपा के सभी प्रत्याशियों का निर्विरोध राज्यसभा में पहुंचना तय है, क्योंकि भाजपा के पास 273 विधायक हैं। प्रत्येक उम्मीदवार के लिए 34 विधायकों के वोट चाहिए। ऐसे में इन आठों की जीत में प्रत्यक्ष रूप से कोई संशय नहीं है। इसी तरह सपा के पास भी इतने विधायकों की संख्या है कि उसके प्रत्याशी जावेद अली, सपा-रालोद गठबंधन प्रत्याशी जयंत चौधरी और सपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार कपिल सिब्बल आसानी से उच्च सदन पहुंच जाएंगे। इससे पहले बुधवार को नामांकन पत्रों की जांच होगी और तीन जून नाम वापसी के लिए निर्धारित है।

प्रदेश मुख्यालय में परिचय, एकजुटता का दिया संदेश : नामांकन करने से पहले भाजपा के सभी उम्मीदवार पार्टी के प्रदेश मुख्यालय पहुंचे। यहां प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव और प्रदेश महामंत्री संगठन सुनील बंसल से भेंट के बाद परिचयात्मक बैठक हुई, जिसका संचालन प्रदेश महामंत्री जेपीएस राठौर ने किया। हाथ उठाकर एकजुटता प्रदर्शित की। यहां प्रत्याशियों की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए यह भी संदेश देने का प्रयास किया है कि राज्यसभा चुनाव के प्रत्याशी तय करने में जातीय-क्षेत्रीय संतुलन साधने के साथ संगठन के प्रति समर्पण और निष्ठा रखने वालों को प्राथमिकता दी गई है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। उनके कार्यकाल में हुए 2014 के लोकसभा चुनावों में प्रदेश में भाजपा को सर्वाधिक 75 सीटें मिली थीं। वह चार बार मेरठ सदर सीट से विधायक और प्रदेश सरकार में मंत्री भी रहे हैं। महिलाओं का प्रतिनिधित्व करने वाली डा. दर्शना सिंह भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं और मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुकी हैं।

दूसरी महिला उम्मीदवार संगीता यादव हैं, जो पहली बार 2017 में गोरखपुर की चौरीचौरा सीट से विधायक चुनी गई थीं। इस बार उनकी सीट गठबंधन में निषाद पार्टी के खाते में जाने के कारण वह चुनाव नहीं लड़ सकी थीं। उनका समायोजन राज्यसभा के लिए किया है। वह भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय मंत्री भी हैं। डा. राधा मोहन दास अग्रवाल बाल रोग विशेषज्ञ हैं। गोरखपुर शहर से वह लगातार चार बार विधायक रहे हैं। उस सीट पर इस बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विधानसभा चुनाव लड़ने के कारण उनको सीट छोड़नी पड़ी थी।

इसके अलावा बाबूराम निषाद राज्य पिछड़ा वर्ग वित्त विकास निगम के अध्यक्ष हैं। पार्टी में सुरेंद्र नागर गुर्जर समाज के बड़े नेता हैं और वर्तमान में भी राज्यसभा के सदस्य हैं। उन्हें पार्टी ने फिर से मौका दिया है। शाहजहांपुर से सांसद रहे मिथलेश कुमार को राज्यसभा का टिकट देकर भाजपा ने दलित वर्ग को भी प्रतिनिधित्व दिया है। आठवें प्रत्याशी हैदराबाद के रहने वाले भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. के. लक्ष्मण हैं, जो कि उत्तर प्रदेश से राज्यसभा भेजे जा रहे हैं।


1 view0 comments