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अब उड़े तो मंहगा पड़ेगा



मोदी सरकार पार्ट-1 में सरकार का दावा था कि विमान किराया ऐसा है कि हवाई चप्पल पहनने वाला भी हवाई जहाज का सफर कर पाएगा। कोरोनाकाल के बाद स्थिति बदल गई है। अब सूट-बूट वालों को भी विमान के सफर से पहले अपनी जेब टटोलनी पड़ेगी।


सरकार ने घरेलू विमान यात्रा किराया की निचली व ऊपरी सीमा में 10 से 30 फीसद तक बढ़ोतरी की दी है। नागरिक विमानन मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि नई सीमा इस वर्ष 31 मार्च या अगले आदेश तक लागू रहेगी। नई व्यवस्था के तहत 40 मिनट से कम उड़ान समय वाली यात्रा के लिए न्यूनतम किराया अब 2,200 रुपये कर दिया गया है, जो पहले 2,000 रुपये था। इसी अवधि के लिए अब विमान कंपनियां अधिकतम 7,800 रुपये वसूल सकेंगी, जो सीमा पहले 6,000 रुपये थी। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि घरेलू विमानों में यात्रियों की अधिकतम संख्या उनकी कुल क्षमता के 80 फीसद से ज्यादा नहीं होगी। यह फैसला भी इस वर्ष 31 मार्च या अगले आदेश तक लागू रहेगा।


जहां तक किराया का सवाल है तो अब 40-60 मिनट अवधि वाली फ्लाइट के लिए यात्रियों को कम से कम 2,800 रुपये और अधिकतम 9,800 रुपये देने होंगे। पहले यह सीमा 2,500-7,500 रुपये थी।

एक घंटे से अधिक और 90 मिनट यानी डेढ़ घंटे तक की यात्रा के लिए अब यात्रियों को 3,300-11,700 रुपये तक चुकाने पड़ेंगे।


डेढ़ घंटे से अधिक और दो घंटे तक (90-120 मिनट) की यात्रा अब कम से कम 3,900 रुपये में हो सकेगी, जबकि विमानन कंपनियां इसके लिए अधिकतम 13,000 रुपये वसूल सकेंगी।


नई सीमा के तहत दो घंटे से लेकर ढाई घंटे (120-150 मिनट) तक की यात्रा के लिए अब 5,000-16,900 रुपये, ढाई घंटे से लेकर तीन घंटे (150-180 मिनट) तक के लिए 6,100-20,400 रुपये तथा तीन घंटे से लेकर साढ़े तीन घंटे (180-210 मिनट) तक की यात्रा के लिए यात्रियों को 7,200-24,200 रुपये देने पड़ेंगे। इससे पहले घरेलू विमान यात्रा के लिए किराया की अधिकतम सीमा 18,600 रुपये थी।


पिछले वर्ष 21 मई को नागरिक विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने विमानन कंपनियों को निर्देश दिया था कि वे कम से कम 40 फीसद सीटों के लिए न्यूनतम और अधिकतम मूल्य के मध्य से कम किराया लेंगी। उदाहरण के लिए, अगर किसी समयावधि के लिए न्यूनतम किराया 5,000 रुपये और अधिकतम 10,000 रुपये था, तो विमानन कंपनियों को कम से कम 40 फीसद सीटें 7,500 रुपये से कम में उपलब्ध करानी थी। उस समय डीजीसीए ने कंपनियों से यह भी कहा था कि उनकी किसी भी फ्लाइट में कुल क्षमता के 33 फीसद से अधिक यात्री नहीं होंगे। पिछले वर्ष जून में यह सीमा बढ़ाकर 45 फीसद और धीरे-धीरे 80 फीसद कर दी। डीजीसीए ने 80 फीसद की यह सीमा इस वर्ष 31 मार्च तक के लिए बरकरार रखी है।


अब अगर आप विमान से सफर करने वाले हैं तो विमान के बैठने के बाद भी पेटी बांधनी है और विमान के बैठने के लिए भी कमर कसनी होगी।


टीम स्टेट टुडे


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