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वो 11 सीटें जिस पर Akhilesh Yadav ने कांग्रेस से खेला दांव, बंगाल और बिहार के बाद यूपी में Congress खुद ही दबा कर देख रही है "हाथ का पंजा"



बिहार में सत्ता परिवर्तन और नए सिरे से शपथ ग्रहण की खबरों के बीच कांग्रेस ने I.N.D.I.A.को लेकर संतुलन साधना शुरु कर दिया है। पैर के नीचे से बंगाल निकला, हाथ से बिहार फिसला तो उत्तर प्रदेश में कांग्रेस यूपी में पंजा मजबूत करना चाहती है।


मौके की नजाकत देखते हुए अखिलेश यादव ने तुरुप का पत्ता फेंका और यूपी में कांग्रेस को 11 सीटें देने का सोशल मीडिया पर ऐलान कर दिया। इस ऐलान ने कांग्रेस को एक प्रकार से राहत ही दी है। पार्टी लोकसभा चुनाव 2019 में रायबरेली सीट ही बचा पाने में कामयाब हुई थी। यूपी चुनाव 2022 में पाटी को महज दो सीटों पर जीत मिली। ऐसे में लोकसभा चुनाव के लिए 11 सीटें कौन सी होंगी? इस सवाल पर बहस शुरू हो गई है।


25 सीटें मांग रही थी कांग्रेस


कांग्रेस और सपा के बीच दिल्ली में तीन दौर की बैठकें हुई। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस 25 सीटों की मांग कर रही थी। हालांकि 11 सीटों पर बात फाइनल हो गई है। वर्तमान में कांग्रेस के पास यूपी में रायबरेली की ही एकमात्र लोकसभा सीट है।


एक-एक सीट पर हुई चर्चा


सीटों को लेकर हुई इन बैठकों में कांग्रेस की ओर से प्रदेश अध्यक्ष अजय राय, सलमान खुर्शीद, आराधना मिश्रा मौजूद रहीं। वहीं, सपा की ओर से रामगोपाल यादव, जावेद अली खान और उदयवीर सिंह उपस्थित रहे। जानकारी के अनुसार, यूपी की हर एक सीट को लेकर चर्चा हुई। जीत की हर संभावना को टटोला गया। हांलाकि बाद में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने अपना एक वीडियो जारी कर कहा कि कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व ने मुकुल वासनिक की अगुवाई जो कमेटी बनाई है वो अंतिम निर्णय लेगी।


2019 में अलग था समीकरण


लोकसभा चुनाव 2019 में अलग समीकरण था। समाजवादी पार्टी तब महागठबंधन का हिस्सा थी। इसमें बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल शामिल थे। कांग्रेस ने यूपीए के बैनर तले चुनाव लड़ा था। वहीं, भाजपा और अपना दल एस एनडीए का हिस्सा थे। इस चुनाव में भाजपा ने 49.98 फीसदी वोट शेयर के साथ 62 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं, बसपा 19.43 फीसदी वोट शेयर के साथ 10 और सपा 18.11 फीसदी वोट शेयर के साथ 5 सीटों पर जीत दर्ज करने में कामयाब हुई। कांग्रेस 6.36 फीसदी वोट शेयर के साथ एक सीट पर दर्ज करने में कामयाब रही।


2019 में बसपा जैसे दल के साथ समझौते के बाद भी सपा को 4.24 फीसदी वोट शेयर का नुकसान हुआ था। वहीं, कांग्रेस ने अकेले चुनाव लड़ा और 1.17 फीसदी वोट शेयर के नुकसान में रही। इस बार यूपी के चुनावी मैदान में महागठबंधन की जगह I.N.D.I.A. लेती दिख रही है।

 

अखिलेश यादव विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. के तहत कांग्रेस को 11 सीटों में से तीन सीटें तो तय हैं। इसमें से एक कांग्रेस की सिटिंग सीट रायबरेली मानी जा रही है। वहीं, अमेठी से पिछली बार कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी हार गए थे। उन्हें स्मृति ईरानी ने करारी मात दी थी। हालांकि, वे यहां से दूसरे नंबर पर रहे थे। एक बार फिर वे अमेठी के रण से किस्मत आजमा सकते हैं। इनके अलावा वाराणसी यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय का गढ़ रहा है। पिछली बार वे यहां से तीसरे स्थान पर थे।


लोकसभा चुनाव 2019 में फतेहपुर सीकरी में राज बब्‍बर और कानपुर से श्रीप्रकाश जायसवाल दूसरे नंबर पर रहे। इसी चुनाव में अकबरपुर, धौरहरा, बाराबंकी सुरक्षित, गाजियाबाद, सहारनपुर, हमीरपुर, कुशीनगर, लखनऊ, संतकबीरनगर, उन्‍नाव और वाराणसी में कांग्रेस तीसरे स्‍थान पर रही थी। तीसरे नंबर पर रहने के बावजूद उसे एक लाख से ज्‍यादा वोट मिले थे। कांग्रेस उम्‍मीदवार को सहारनपुर में 2.07 लाख, बाराबंकी में 1.59 लाख, लखनऊ में 1.80 लाख, उन्‍नाव में 1.85 लाख और वाराणसी लोकसभा सीट पर 1.52 लाख वोट मिले थे। माना जा रहा है कि बसपा से निलंबित अमरोहा सांसद कुंवर दानिश अली कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं। ऐसे में पार्टी उनको अमरोहा से ही चुनावी मैदान में उतार सकती है। 


रायबरेली, अमेठी,वाराणसी, फतेहपुर सीकरी, कानपुर, अमरोहा , अकबरपुर, धौरहारा, बाराबंकी, गाजियाबाद, सहारनपुर, हमीरपुर, कुशीनगर, संतकबीरनगर और लखनऊहालांकि, सपा ने यहां से उम्मीदवार घोषित कर दिया है।


पिछले तीन चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन

2009- कांग्रेस 69 सीटों पर चुनाव लड़ी और 21 जीती। इस चुनाव में सपा 75 पर लड़कर 23 और बसपा 69 पर लड़ी और 20 सीटें जीतीं।

2014- कांग्रेस 67 पर लड़कर सिर्फ दो सीट जीती। सपा 75 में पांच और बसपा 80 पर लड़ी और एक भी सीट नहीं जीत पाई।

2019- सपा- बसपा का गठबंधन था। कांग्रेस 67 पर लड़ी और सिर्फ रायबरेली जीत पाई। सपा 37 पर लड़ी और पांच जीती, जबकि बसपा 38 पर लड़ी और 10 जीती। रामपुर और आजमगढ़ हारने के बाद सपा के सिर्फ तीन सांसद हैं।

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