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सीएम योगी की बड़ी घोषणा, पुनर्वास से पहले नहीं हटेगी गरीब की झोपड़ी


गोरखपुर, 10 अप्रैल 2022 : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की जनता को आश्वस्त किया कि पुनर्वास से पहले गरीब की झोपड़ी नहीं हटाई जाएगी। अगर किसी गरीब की झोपड़ी सरकारी जमीन पर है तो पहले उसे पुनर्वासित किया जाएगा, फिर भूमि को कब्जा मुक्त कराया जाएगा। सरकार गरीबों के प्रति संवेदनशील है। अधिकारियों को भी निर्देश दिया गया है किसी भी गरीब की झोपड़ी तब तक न हटाएं, जब तक उसे आवास न उपलब्ध करा दिया जाए।

एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स गरीबों के लिए, पेशेवर माफिया के लिए है

मुख्यमंत्री ने गोरखपुर में पत्रकारों से कहा कि यदि भूमि अनारक्षित श्रेणी की होगी तो गरीब को वही जमीन पट्टे में दे दी जाएगी। भूमि के आरक्षित श्रेणी का होने पर उसे अन्यत्र आवास उपलब्ध कराया जाएगा। इसी प्रकार स्ट्रीट वेंडर के सुव्यवस्थित पुनर्वास के भी निर्देश दिए गए हैं। उनके रोजगार के लिए प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना एवं अन्य तरीके से व्यवस्था की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स की कार्रवाई पेशेवर माफिया के लिए है, न कि गरीबों के लिए। प्रदेश में माफिया के खिलाफ जीरो टालरेंस की नीति जारी रहेगी। पेशेवर माफिया व अपराधी सत्ता का संरक्षण प्राप्त कर सरकारी, सार्वजनिक, गरीबों व व्यापारियों की जमीन पर कब्जा करते थे। इसके विरुद्ध एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स का गठन किया गया। अबतक पेशेवर माफिया से 2500 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है। कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

दूर होगी औद्योगिक विकास के राह में आने वाली हर बाधा

औद्योगिक क्षेत्र एवं उद्यमियों की समस्याओं को लेकर चैंबर आफ इंडस्ट्रीज के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। उनकी समस्याओं को सुनकर मुख्यमंत्री ने कहा कि औद्योगिक विकास की राह में आने वाली हर बाधा को दूर किया जाएगा। उद्यमियों ने रेडीमेड गारमेंट पार्क की लेटलतीफी का सवाल भी उठाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि 100 दिन के भीतर गारमेंट पार्क का शिलान्यास होगा।

सीएम से मिले गोरखपुर के उद्यमी

चैंबर आफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष विष्णु अजीतसरिया के नेतृत्व में पूर्व अध्यक्ष एसके अग्रवाल, महासचिव प्रवीण मोदी, उपाध्यक्ष आरएन सिंह व अन्य उद्यमी मुख्यमंत्री से मिले। लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर उन्होंने मुख्यमंत्री को बधाई दी। उद्यमियों ने गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) में धीमी कार्यशैली की बात उठाई। पूर्व अध्यक्ष एसके अग्रवाल ने कहा कि वर्ष 1989 में स्थापित गीडा 33 साल बाद भी अपेक्षाकृत प्रगति नहीं हो सकी है जबकि उसी वर्ष स्थापित ग्रेटर नोएडा में औद्योगिक पूंजी निवेश गीडा की तुलना में कई गुना अधिक हुआ है। चैंबर के महासचिव सुमित कक्कड़ ने रेडीमेड गारमेंट उद्योग के विकास के लिए राष्ट्रीय स्तर की मार्केटिंग एजेंसी स्थापित करने की मांग की।

उद्यमियों ने मुख्यमंत्री को बताईं ये समस्याएं

उद्यमियों ने प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं जैसे प्लास्टिक पार्क, लाजिस्टिक पार्क, आईटी पार्क, गारमेंट पार्क की स्थापना की गति धीमी होने की बात कही। गीडा में जल निकासी, नालियों का निर्माण, विद्युत लाइन का उच्चीकरण संबंधी समस्याओं को दूर करान की मांग की। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं जैसे टेक्सटाइल पार्क, फ्लैटेड फैक्ट्री काम्प्लेक्स जैसी प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं की प्रगति बहुत धीमी है। इसमें तेजी लाने की जरूरत है। गीडा में टाउन प्लानर एवं अभियांत्रिकी टीम के नहीं होने से योजनाएं लंबित हैं। उद्यमियों ने कहा कि गीडा बोर्ड के अध्यक्ष अपर मुख्य सचिव उद्योग के होने के कारण निर्णय लेने में देरी होती है। उन्होंने मांग की कि गीडा बोर्ड की बैठकों में उद्यमियों का प्रतिनिधित्व भी होना चाहिए।

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