प्रियंका ने बुनकरों की समस्याओं पर की वीसी चैट, प्रदेश अध्यक्ष अजय लल्लू ने सरकार पर बोला हमला



उत्तर प्रदेश में बुनकर एक बार फिर लामबंद हो रहे हैं। यूपीए समेत लगभग हर सरकार से मदद लेने के बावजूद बुनकरों की स्थिति में कोई फर्क नहीं आया है। बुनकर बिजली के फ्लैट रेट की बहाली की मांग कर रहे हैं।

बुनकरों का कहना है कि आने वाले कुछ दिनों में फ्लैट रेट की पुरानी प्रणाली नहीं बहाल की जाती, और मुकदमे नही वापस किए जाते तो हम सब अब केवल मुर्री बंद करके बैठे नहीं रहेंगे बल्कि जल्दी ही उत्तर प्रदेश के ज़िला मुख्यालयों को घेरने की तरफ बढ़ेंगे और जरूरत पड़ी तो मुख्यमंत्री आवास को को भी घेरने से परहेज़ नहीं करेंगे। बुनकरों की सभा और जुलूस में मुख्य रूप से फजलुर्रहमान अंसारी, अंसार अहमद, जमाल अहमद, मुस्तकीम, फिरोज़ अहमद, नियाज अहमद, कैसर जमाल, अब्दुल कलाम, बिलाल अहमद, जोखु भाई, शमशेर भाई आदि ने संबोधित किया।


बुनकरों की समस्याओं से रुबरु होते हुए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने की वीडियो कांफ्रेंसिंग से बात की। वाराणसी के बुनकरों ने प्रियंका गांधी से अपनी समस्याएं बताईं। बुनकरों का कहना है कि वो बिजली की बढ़ी दर से परेशान हैं और बिल ना चुकाने पर उनके कनेक्शन काटे जा रहे हैं। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने बुनकरों से कहा कि हर नाइंसाफी के खिलाफ हम साथ खड़े हैं।


आपको याद दिला दें कि कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार के समय से ही बुनकरों की मदद सरकारें हर तरह से करती रही हैं। यूपीए सरकार के समय तो टेक्सटाइल मंत्रालय ने वाराणसी में बुनकरों की समस्याओं को हमेशा के लिए खत्म करने का काम किया था। यूपीए सरकार ने बुनकरों के लिए 6,234 करोड़ रुपये के राहत पैकेज दिया था।



दूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने कहा कि प्रदेश में व्याप्त महंगाई से आम जानता कराह रही है, उसका जीना मुहाल हो गया है। रोजमर्रा की जरूरतों में शामिल साग-सब्जी और दलहन में 30-40 फीसदी का उछाल आया है। कोरोना काल के चलते जहाँ सरकारी नौकरी कर रहे और पेंशन धारको को छोड़ कर समाज का लगभग हर तबका भयंकर आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहा है, एक-एक पैसे जुटाने उस पर भरी पड़ रहे हैं ऐसे में आम आदमी की जरुरत की हर चीजों के दाम सरकार के गलत फैंसलो के चलते आसमान छू रहे हैं।


आवश्यक वस्तु अधिनियम की सूची से बाहर किए गए खाद्य पदार्थ और अनाज, तेल, दलहन, आलू-प्याज जैसी आवश्यक जरुरत की वस्तुओं की काला बाजारी शुरू हो गयी है। परिणाम स्वरुप इन वस्तुओं के दाम आसमान छूने लगे हैं और आम आदमी की पहुँच से बाहर हो चुके हैं। सारी दालें 100 रुपए से ऊपर 120 से 150 रु. में बिक रही हैं। खाद्य तेल के दाम भी आम आदमी की पहुँच से बाहर और पहले के मुकाबले 30 से 50 रु. अधिक है। प्याज 80 से 100 रु किलो की दर से मिला रहा है। आलू 40 से 45 रु. प्रति किलो और नया आलू 60 रूपये किलो की दर से मिल रहा है। जबकि सरकार ने खुद स्वीकार किया था की किसानों से आलू 475 रूपये क्विंटल खरीदा गया था। बाकी पैसा सरकार समर्थक बिचैलिये आम आदमी से मुनाफाखोरी के रूप वसूल रहे हैं।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यह महंगाई सरकार जनित है। कोरोना महामारी के चलते जहाँ आम जानता आर्थिक रूप से टूटी हुयी है, एक एक पैसे जोड़ कर जैसे-तैसे घर चला रहा है ऐसे में सरकार जनित कमर तोड़ महंगाई जिसमे पूंजीपतियों और धन्नासेठो को आवश्यक वस्तुओं का कानून बना कर जमाखोरी करने और जानता को लूटने की खुली छूट दी हुयी है।


टीम स्टेट टुडे