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सावधान! डॉक्टरों और वैज्ञानिकों ने कहा कोरोना की तीसरी लहर का आना तय–जानिए कब आएगी और क्या होगा तब?




कोरोना वायरस से संक्रमण और कोविड-19 को लेकर तीन महत्वपूर्ण बातें



एक – कोरोना वायरस से लड़ने के लिए दुनिया के पास फिलहाल कुछ वैक्सीन बन चुकी हैं

दूसरा – अब तक कोरोना के इलाज के लिए किसी विशेष दवा का आविष्कार नहीं हुआ है।

तीसरा – कोरोना से बचाव या कोविड बिहेवियर ही कोरोना के खिलाफ सबसे कारगर उपाय बना हुआ है।


ये तीन बातें इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि जिस बीमारी की अब तक दवा नहीं बन पाई सिर्फ प्रतिरोधक क्षमता विकसित करके बचाव के रास्ते तलाशे जा रहे हैं उसका संक्रमण कभी भी, कहीं भी और किसी भी स्तर तक खतरनाक हो सकता है।


कहने का अर्थ है कोरोना की तीसरी, चौथी या पांचवी लहर भी उठ सकती है। हर कोरोना लहर से लड़ाई पहले से ज्यादा मुश्किल होती जाएगी क्योंकि वायरस के नए नए प्रकार या वेरियंट सामने आ रहे हैं।

ऐसी स्थिति में ये तो तय है कि कोरोना वायरस से संक्रमण की तीसरी लहर जरुर आएगी। कुछ लोग इसके आने के समय का अनुमान भी लगा रहे हैं।


बड़ा सवाल यह है कि कहीं तीसरी लहर दूसरी से ज्यादा खतरनाक तो नहीं होगी और उससे निपटने के लिए देश कितना तैयार होगा। वहीं एक बड़ी जनसंख्या को वैक्सीन लगाकर तीसरी लहर के प्रभाव को रोकने की संभावनाओं पर भी चर्चा शुरू हो गई है।



क्या कहना है भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार राघवन का


कोरोना की तीसरी लहर भी आएगी। इसे कोई नहीं रोक सकता है। हालांकि, यह कब आएगी और यह कैसे इफेक्ट करेगी, अभी कहना मुश्किल है। लेकिन, इसके लिए तैयार रहना होगा। सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के. विजय राघवन ने यह चेतावनी दी है। राघवन ने कहा कि कोरोना के नए वैरिएंट सामने आ रहे हैं। इन्‍होंने संक्रमण की रफ्तार बढ़ाई है। कोरोना के नए स्‍ट्रेन से निपटने के लिए वैक्‍सीन को भी अपडेट करने की जरूरत होगी।


राघवन के अनुसार, वैक्‍सीन कोरोना के मौजूदा वैरिएंट के खिलाफ कामयाब है। भारत सहित दुनियाभर में कोरोना के नए वैरिएंट सामने आएंगे। तमाम वैज्ञानिक इन अलग-अलग किस्‍मों का मुकाबला करने की तैयारी कर रहे हैं।


सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार ने कहा कि जिस तरह से यह वायरस बढ़ रहा है, उसे देखते हुए तीसरी लहर अपरिहार्य है। लेकिन, यह कब और किस पैमाने पर आएगी, इसके बारे में कुछ भी कह पाना मुश्किल है।



क्या कहना है सीएसआईआर के महानिदेशक डॉक्टर शेखर मांडे का


सीएसआइआर के महानिदेशक डॉ. शेखर मांडे कोरोना की तीसरी लहर की आशंका को सही बताते हुए कहते हैं कि पूरी दुनिया के वैज्ञानिक इसको लेकर चिंतित हैं और इसे रोकने के उपाय ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं। वैसे डा.मांडे यह भी मानते हैं कि कोरोना की तीसरी लहर को स्पेनिश फ्लू की तीसरी लहर जैसी खतरनाक होने से बचा जा सकता है। कोरोना के खिलाफ वैक्सीन एक कारगर हथियार है और वह हमारे पास है।


वैक्सीन उत्पादन की मौजूदा सीमाओं और बड़ी जनसंख्या के बावजूद डॉ. मांडे भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की बड़ी जनसंख्या को जल्द-से-जल्द वैक्सीन उपलब्ध कराने को लेकर आश्वस्त हैं। उनके अनुसार दुनिया में कई वैक्सीन आ चुकी हैं। उनका उत्पादन तेज करने के प्रयास शुरू हो चुके हैं। इसके साथ कई और वैक्सीन भी अंतिम चरण में हैं। ये सभी वैक्सीन मिलकर पूरी दुनिया की जरूरत को पूरा करने में सक्षम होंगी।


दूसरी तरफ एसबीआइ की ताजा इकोरैप रिपोर्ट भी भी इस दावे का समर्थन कर रही है। इस रिपोर्ट में दुनिया के विभिन्न देशों में टीकाकरण के अनुभवों के आधार पर दावा किया गया है कि किसी भी देश में 15-20 फीसद जनसंख्या को दोनों डोज लग जाने के बाद संक्रमण की रफ्तार स्थिर हो जाती है।


भारत में वैक्सीन के उत्पादन की मौजूदा स्थिति और भविष्य की तैयारियों के आधार पर एसबीआइ ने अक्टूबर तक देश में लगभग 105 करोड़ डोज उपलब्ध होने का दावा किया है। इतने डोज से भारत की 15 फीसद जनसंख्या को दोनों डोज और 63 फीसद को पहला डोज लग चुका होगा। यानी करीब 70 फीसद आबादी को सुरक्षित हो चुकी होगी।


कई अन्य विशेषज्ञों का मानना है कि दो तीन महीनों में ही कम से कम 30 फीसद आबादी को दोनों डोज सुनिश्चित करना होंगे। नेशनल एक्सपर्ट ग्रुप आन वैक्सीन एडमिनिस्ट्रेशन फार कोविड-19 (नेगवैक) के सदस्य डा. एनके अरोड़ा के अनुसार कोरोना की पहली लहर का पीक सितंबर में आया था। फिर चार महीने तक धीरे-धीरे मामले घटते गए। दूसरी लहर की शुरुआत फरवरी में शुरू होकर मई में पीक तक पहुंचने के आसार हैं।



कब आ सकती है कोरोना की तीसरी लहर


मई में पीक के बाद अगले चार महीने तक कोरोना का प्रकोप कम होता रहेगा और उसके बाद ही तीसरी लहर की शुरुआत होगी। तीसरी लहर का पीक आने में दो-तीन महीने का समय लगेगा। इस तरह अक्टूबर या नवंबर तक तीसरे चरण की शुरुआत होगी।


वैसे अक्टूबर तक आते-आते भारत की बड़ी आबादी को वैक्सीन लग चुकी होगी। कोवैक्सीन और कोविशील्ड का उत्पादन बढ़ने और स्पुतनिक-वी का देश में उत्पादन शुरू होने के अलावा जिनोवा की आरएनए पर आधारित और कैडिला की डीएनए पर आधारित वैक्सीन भी बाजार में आ चुकी होगी।


दोनों वैक्सीन असली गेमचेंगर साबित होंगी


इन दोनों वैक्सीन के तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल चल रहे हैं। इन्हें जून-जुलाई में आपात इस्तेमाल की इजाजत मिल सकती है। डाक्टरों के अनुसार ये दोनों वैक्सीन असली गेमचेंगर साबित होंगी क्योंकि कम समय में इनका उत्पादन काफी बड़े पैमाने पर किया जा सकता है।


टीम स्टेट टुडे


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