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दत्तात्रेय होसबले को सौंपी गई आरएसएस सरकार्यवाह की जिम्मेदारी, करने हैं ये महत्वपूर्ण काम



दत्तात्रेय होसबले। अगले तीन साल तक ये नाम राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के संगठन संचालन की अतिमहत्वपूर्ण जिम्मेदारी इन्हीं के कंधों पर होगी।


दत्तात्रेय होसबोले को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नए सरकार्यवाह यानी जनरल सेक्रेटरी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अब तक वह संघ के सह सरकार्यवाह यानी ज्वाइंट जनरल सेक्रेटरी का दायित्व लखनऊ केंद्र से देख रहे थे।

बेंगलुरु के चेन्नहल्ली स्थित जनसेवा विद्या केंद्र में चल रही प्रतिनिधि सभा की बैठक के अंतिम दिन शनिवार को नए सरकार्यवाह का चुनाव किया गया।



कौन हैं दत्तात्रेय होसबोले


कर्नाटक के शिमोगा जिले के सोरबा तालुक के एक छोटे से गांव के दत्तात्रेय रहने वाले हैं। एक आरएसएस कार्यकर्ता के परिवार में 1 दिसंबर 1955 को जन्मे दत्तात्रेय होसबोले करीब 13 वर्ष की उम्र में वर्ष 1968 में संघ से जुड़े। आगे चलकर वह 1972 में संघ परिवार के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में चले गए।

वर्ष 1978 में एबीवीपी के फुलटाइम कार्यकर्ता बन गए। दत्तात्रेय ने 15 वर्ष तक लगातार अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रहकर इस संगठन को मजबूत बनाया। इस दौरान उनका केंद्र मुंबई रहा। उन्होंने गुवाहाटी में युवा विकास केंद्र के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी तरह अंडमान निकोबार द्वीप समूह और पूर्वोत्तर भारत में विद्यार्थी परिषद के कार्य-विस्तार का पूरा श्रेय उन्हें जाता है।


इसके बाद करीब 2002-03 में संघ के अखिल भारतीय सह बौद्धिक प्रमुख बनाए गए। वे वर्ष 2009 से सह सर कार्यवाह थे।


दत्तात्रेय की शिक्षा-दीक्षा


दत्तात्रेय होसबोले की शुरूआती पढ़ाई-लिखाई उनके गांव में हुई। वह कॉलेज की पढ़ाई करने के लिए बेंगुलुरु पहुंचे और नेशनल कॉलेज में एडमिशन लिए। उन्होंने बेंगलुरु यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी में मास्टर्स की शिक्षा ली। दत्तात्रेय होसबोले को मातृभाषा कन्नड़ के अतिरिक्त अंग्रेजी, तामिल, मराठी, हिंदी व संस्कृत सहित अनेक भाषाओं का ज्ञान है। दत्तात्रेय होसबले शिक्षा और साहित्यिक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं। कर्नाटक के लगभग सभी लेखकों और पत्रकारों से करीबी संबंध हैं। जिनमें वाइ एन कृष्णमूर्ति और गोपाल कृष्ण अडिगा का नाम प्रमुखता से आता है।


फुटबॉल के प्रशंसक हैं


फुटबॉल के प्रशंसक दत्तात्रेय ने फुटबाल को वैश्विक एकता का प्रतीक करार दिया।


‘दत्ताजी’ के नाम से लोकप्रिय


राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में लोग उनका पूरा नाम लेने की जगह सम्मान और प्यार से ‘दत्ताजी’ कहकर ही पुकारते हैं। दत्ता जी बौद्धिक रूप से बहुत प्रखर हैं। यही वजह है कि उनकी प्रतिभा को देखते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शीर्ष अधिकारियों ने 2004 में उन्हें संगठन का सह बौद्धिक प्रमुख बनाया। वर्ष 2009 में जब डॉ. मोहन भागवत संघ के सरसंघचालक बने तो दत्तात्रेय होसबोले को उन्हें अपनी टीम में सह सरकार्यवाह यानी जॉइंट जनरल सेक्रेटरी बनाया।



आपातकाल का मुखर विरोध


इंदिरा गांधी के शासनकाल में लगे आपातकाल के दौरान एक सामाजिक कार्यकर्ता के रुप में दत्तात्रेय होसबोले अत्यंत मुखर रहे। वर्ष 1975 से 1977 के बीच करीब 16 महीने वह आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था अधिनियम (मीसा ऐक्ट) के तहत जेल में बंद रहे। जेल में होसबोले ने दो हस्तलिखित पत्रिकाओं का संपादन भी किया। इनमें से एक कन्नड़ भाषा की मासिक पत्रिका असीमा थी।


अन्तर्राष्ट्रीय व्यक्तित्व हैं दत्तात्रेय होसबोले


दत्तात्रेय होसबले ने नेपाल, रूस, इंग्लैंड, फ्रांस और अमेरिका की यात्राएं की हैं। संपूर्ण भारतवर्ष की कई बार यात्रा की। कुछ साल पहले नेपाल में आए भीषण भूकंप के बाद संघ द्वारा भेजी गई राहत-सामग्री और राहतदल के प्रमुख के नाते वह काफी दिनों में नेपाल में भी रहे थे। वहां कई दिनों तक सेवा-कार्य किया था। होसबले संयुक्त राज्य अमेरिका और ब्रिटेन में हिंदू स्वयंसेवक संघ की संगठनात्मक गतिविधियों के संरक्षक भी थे।


क्या है खास दत्तात्रेय में


दत्तात्रेय होसबोले युवाओं की ऊर्जा का रचनात्मक इस्तेमाल करने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने युवाओं के लिए भी खासा काम किया। उन्होंने असम के गुवाहाटी में यूथ डेवलपमेंट सेंटर स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई। वर्ल्ड ऑर्गनाइजेशन ऑफ स्टूडेंट एंड यूथ भी स्थापित कर चुके हैं। अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम (यूके) में हिंदू स्वयंसेवकों को एकजुट करने के लिए बने हिंदू स्वयंसेवक संघ के मेंटर की भी भूमिका निभाई।



नरेंद्र मोदी के करीबी


दत्तात्रेय होसबोले नरेंद्र मोदी के करीबी माने जाते हैं। दत्तात्रेय और मोदी की नजदीकी का अंदाजा इस बात से भी लगा सकते हैं कि साल 2015 में ही दत्तात्रेय को सरकार्यवाह की जिम्मेदारी दी जाने की कोशिश की गई थी लेकिन विफल साबित हुई। संघ के ही एक धड़े ने उनका विरोध किया था। दत्तात्रेय ने एबीवीपी से छात्र राजनीति की शुरुआत की है। यही वजह है कि संघ में ही दत्तात्रेय को सरकार्यवाह बनाने का एक धड़ा अब तक उनका विरोध करता रहा है।


अतिमहत्वपूर्ण काम करने हैं दत्तात्रेय होसबोले को


संघ दक्षिण भारत में तेजी से अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। दक्षिण से ताल्लुक रखने वाले होसबोले इसमें भी मददगार हो सकते हैं। इस बार की प्रतिनिधि सभा का आयोजन बंगलूरू में किया गया। वैसे महाराष्ट्र के नागपुर में संघ का हेडक्वाटर है लेकिन कोरोना के बढ़ते मामलों से भी संघ चितिंत है। है। वे वर्तमान में 65 वर्ष के है। वे 71 साल की उम्र होने तक सरकार्यवाह का दो कार्यकाल पूरा कर सकते हैं। इन दो कार्यकाल में साल 2024 का लोकसभा चुनाव और 2025 में संघ का जन्मशताब्दी वर्ष भी आ जाएगा।


टीम स्टेट टुडे


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