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चुनावी चौसर पर भाजपा का जातीय दांव, डिंपल यादव से मुकाबले को उतारा शिवपाल का करीबी


लखनऊ, 15 नवंबर 2022 : सपा के गढ़को ध्वस्त करनेके दावों मेंजुटी भाजपा नेजातीय चौसर बिछादी है। मंगलवारको इटावा केसांसद रहे रघुराजसिंह शाक्य कोप्रत्याशी घोषत करदिया। वह लंबेसमय तक सपासे जुड़े रहेहैं और प्रसपाअध्यक्ष शिवपाल के भीकरीबी माने जातेहैं। भाजपा कीरणनीति, अपने परंपरागतवोट बैंक केसाथ शाक्य औरअन्य जातियों कीजुगलबंदी की है।जसवंतनगर विधानसभा क्षेत्र मेंभी उनका प्रभावमाना जाता है, भाजपा इस फैक्टरको भी अपनेपक्ष में मानरही है। ऐसेमें कहा जारहा है किसपा प्रत्याशी डिंपलयादव के साथइस बार कांटेंका मुकाबला होगा।

क्या हैजातीय समीकरण

मैनपुरी लोकसभा सीटको सपा कागढ़ कहा जाताथा। वर्ष 1996 सेलेकर बीते लाेकसभाचुनाव तक यहांसपा ने लगातारजीत हासिल कीहै। पांच बारतो खुद मुलायमसिंह सांसद काचुनाव जीते। वर्ष 2014 और 2019 में जबर्दस्तमोदी लहर मेंभी भाजपा इससपाई किले मेंपराजित हुई थी।सपा की इससीट पर मजबूतीकी सबसे बड़ीवजह यादव मतोंकी बहुलता कोमाना जाता है।जातीय समीकरण ऐसेहैं कि यादववोटर अहम भूमिकानिभाते रहे हैं।पूरे लोकसभा क्षेत्रमें पिछड़ा वर्गके मतदाता करीब 45 प्रतिशत से अधिकहैं, इनमें सेयादव मतदाताओं कीहिस्सेदारी करीब 25 प्रतिशत है।संख्या के हिसाबसे यह चारलाख से अधिकपहुंचते हैं। इनकेबाद शाक्य मतदाताओंका नंबर आताहै, जिनकी संख्यातीन लाख केआसपास मानी जातीहै। सवर्णों कीबात करें तोइनका कुल आंकड़ा 25 प्रतिशत तक पहुंचताहै। इनमें क्षत्रियऔर ब्राह्मण मतोंकी भागीदारी अधिकहै। लगभग इतनेही दलित मतदाताहैं। अल्पसंख्यक मतदातालगभग पांच प्रतिशतमाने जाते हैं।पूर्व के चुनावोंमें सपा कोयादव मतों केसाथ अन्य वर्गोंका भी समर्थनमिलता रहा है।सपा की जातीयगणित की इसरणनीति की काटके लिए भाजपाबीते दो चुनावोंसे शाक्य जातिका प्रत्याशी उताररही है। बीतेचुनाव में भाजपाको इससे काफीलाभ नजर आयाथा, ऐसे मेंइस बार भीरघुराज सिंह शाक्यको प्रत्याशी चुनागया है।

शाक्य समाज केबड़े नेता हैंरघुराज सिंह

रघुराज सिंह शाक्यवर्ष 2012 में सपाकी टिकट इटावाविधानसभा सीट सेविधायक बने थे।इससे पहले वहवर्ष 1999 और 2004 के लोकसभाचुनाव में भीइटावा संसदीय सीटसे सांसद रहेहैं। वर्ष 2009 केचुनाव मेें वहआगरा की फतेहपुरसीकरी लोकसभा सीटसे भी मैदानमें उतरे थे, परंतु जीत हासिलनहीं कर पाएथे। बीते विधानसभाचुनावों से पहलेवह भाजपा मेंशामिल हुए थे।रघुराज शाक्य को समाजके बड़े नेताओंमें गिना जाताहै। रघुराज शाक्यमूल रूप सेजसवंतनगर विधानसभा क्षेत्र केरहने वाले हैंऔर वहां उनकाखासा प्रभाव भीमाना जाता है।वह प्रसपा अध्यक्षशिवपाल सिंह यादवके भी करीबीरहे हैं। रघुराजशाक्य को प्रत्याशीचुने जाने केलिए जसवंतनगर विधानसभाक्षेत्र में उनकाप्रभाव सबसे बड़ाकारण बताया जारहा है। मैनपुरीलोकसभा सीट परभाजपा को सबसेबड़ा नुकसान इसीविधानसभा क्षेत्र से होतारहा है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव मेंमुलायम सिंह यादव 3.66 लाख मतों केअंतर से जीतथे। इनमें से 1.60 लाख वोटों की बढ़तअकेले जसवंतनगर विधानसभासीट से मिलीथी। वर्ष 2019 केलोकसभा चुनाव में भाजपाने मुलायम सिंहयादव की जीतके अंतर को 94 हजार वोटों तक समेटदिया था, परंतुउसमें 62 हजार मतोंकी बढ़त अकेलेजसवंतनगर की शामिलथी।

भाजपा की रणनीति

जसवंतनगर में सेमिलने वाली सपाकी बढ़त कोरोकना और पूरेलोकसभा क्षेत्र में शाक्यव अन्य मतोंको एकजुट करजीत तक पहुंचनेकी है। मानाजा रहा हैकि रघुराज शाक्यके प्रत्याशी बननेसे मुकाबला बहुतदिलचस्प होगा।

सपा केलिए आसान नहींहोगा मुकाबला

सपा संरक्षकमुलायम सिंह यादवके निधन केबाद हो रहेउपचुनाव में सपाके सामने अपनेवर्चस्व को बनाएरखने की चुनौतीहै। पार्टी नेसपा मुखिया अखिलेशयादव की पत्नीडिंपल यादव काेप्रत्याशी घोषित किया है।अखिलेश यादव सेलेकर अन्य नेताओंतक सब, बार-बार मुलायमसिंह यादव केनाम पर पूराचुनाव लड़ने केसंकेत दे रहेहैं। इसके साथही सपा नेपूर्व मंत्री आलोकशाक्य को जिलाध्यक्षबनाकर शाक्य मतोंको साधने कादांव भी चलाहै। इसके बादभी माना जारहा है किसपा के लिएइस बार मुकाबलाआसान नहीं होगा।शिवपाल से नजदीकीसे फायदे परभी नजर रघुराजशाक्य वर्ष 2017 मेंमुलायम परिवार में तकरारहोने के बादशिवपाल सिंह यादवके साथ चलेगए थे। उनकोशिवपाल सिंह यादवका बहुत नजदीकीमाना जाता है।भाजपा को इसमेंभी अपने लिएलाभ नजर आरहा है।

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