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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का एकमात्र पद जिसके लिए होता है चुनाव – जानिए सरकार्यवाह चुनने की प्रक्रिया



  • सरकार्यवाह का चुनाव हर तीन साल में अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में होता है।

  • आम तौर पर ये बैठक मार्च के दूसरे या तीसरे हफ्ते में तीन दिन के लिए होती है।

  • निर्वाचन वर्ष में होने वली प्रतिनिधि सभा की बैठक हमेशा से नागपुर में होती आई है।

  • वर्ष 2020 में बैठक बेंगलुरु में होनी थी, लेकिन कोरेाना संक्रमण के कारण इसे रद्द कर दिया गया था।

  • संघ की सालाना होने वाली बैठक देशभर में कहीं भी हो सकती है।

  • राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में सरसंघचालक के बाद सरकार्यवाह का पद सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

  • विश्व के सबसे बड़े संगठन के दूसरे प्रमुख पद के लिए जब चुनाव होता है तो कोई तामझाम नहीं रहता है और न ही कोई दिखावा होता है।

  • इस चुनाव की प्रक्रिया में पूरी केंद्रीय कार्यकारिणी, क्षेत्र व प्रांत के संघचालक, कार्यवाह व प्रचारक और संघ की प्रतिज्ञा किए हुए सक्रिय स्वयंसेवकों की ओर से चुने गए प्रतिनिधि शामिल होते हैं।

  • आरएसएस के रोजाना के कार्यों की जिम्मेदारी सरकार्यवाह की होती है।

  • आरएसएस में यह इकलौता पद है जिसपर संघ में चुनाव होता है।



संघ में सबसे महत्वपूर्ण पद सरसंघचालक का होता है। 
वर्तमान में मोहन भागवत आरएसएस के सरसंघचालक हैं। 
सरसंघचालक द्वारा अपना उत्तराधिकारी स्वयं चुना जाता है।
सरकार्यवाह संगठन में कार्यकारी पद होता है, जबकि सरसंघचालक का पद मार्गदर्शक का होता है।
संगठन में सरसंघचालक का निर्णय ही अंतिम माना जाता है।



सरकार्यवाह का चुनाव प्रक्रिया


  • एबीपीएस की बैठक हर वर्ष मार्च के दूसरे और तीसरे हफ्ते में होती है।

  • प्रतिनिधि सभा की बैठक में अंतिम दिन सरकार्यवाह का चुनाव होता है।

  • चुनाव अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (एबीपीएस) करती है।

  • बैठक में वर्तमान सरकार्यवाह अपने कार्यकाल में किए गए कामों की जानकारी देते है।

  • इसके बाद उसका कार्यकाल खत्म हो जाता है।

  • इस प्रतिनिधि सभा के 1400 सदस्य होते हैं।

  • सरकार्यवाह से पहले जिला संघचालक, महानगर संघचालक, विभाग संघचालक और प्रांत संघचालक का चुनाव किया जाता है।

  • इसके बाद प्रतिनिधि सभा की बैठक में सरकार्यवाह का चुनाव किया जाता है।

  • चुने जाने के बाद नया सरकार्यवाह ही अपनी टीम की घोषणा करते है।

  • केंद्रीय प्रतिनिधियों के इस चुनाव में केंद्रीय प्रतिनिधि ही वोटर होते हैं, कोई भी प्रचारक वोटर नहीं होता।

  • नए सरकार्यवाह का नाम चुनाव अधिकारी बताते हैं और सभी लोग ॐ उच्चारण के साथ हाथ उठाकर नए सरकार्यवाह का चुनाव सम्पन्न कराते हैं।

  • सरकार्यवाह (महासचिव) ही पूरे संगठन की प्रशासनिक व्यवस्था चलाते हैं।

  • सरकार्यवाह को संगठन के संचालन के लिए अपनी टीम बनाने का अधिकार होता है।


टीम स्टेट टुडे



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