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राफेल ने चूमी भारतवर्ष की धरती, जानिए ताकत हिंदुस्तान की


फ्रांस से 5 राफेल लड़ाकू विमानों का पहला बेड़ा भारत पहुंच गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके स्वागत में ट्वीट किया। प्रधानमंत्री ने अंबाला में राफेल के टच डाउन पर संस्कृत में ट्वीट किया कि राष्ट्र रक्षा के समान कोई पुण्य, व्रत या यज्ञ नहीं होता। उन्होंने इंडियन एयर फोर्स के आदर्श वाक्य 'नभः सदृशं दीप्तम्' के साथ स्वागतम् भी लिखा।



भारत ने फ्रांस की सरकार के साथ करीब 60 हजार करोड़ रुपये में हथियारों से सुसज्जित 36 राफेल लड़ाकू विमानों का सौदा किया है। ये विमान सोमवार को फ्रांस से रवाना हुए थे। यूएई में फ्रांसीसी बेस पहुंचने के बाद बुधवार को वहां से भारत के लिए रवाना हुए।


रूस से सुखोई विमानों की खरीद के करीब 23 साल बाद नए और अत्याधुनिक पांच राफेल लड़ाकू विमानों का बेड़ा अंबाला एयरबेस पहुंचा है। निर्विवाद ट्रैक रिकॉर्ड वाले इन राफेल विमानों को दुनिया के सबसे बेहतरीन लड़ाकू विमानों में से एक माना जाता है।



फ्रांस के बोरदु शहर में स्थित मेरिगनेक एयरबेस से 7,000 किलोमीटर की दूरी तय करके ये विमान आज दोपहर हरियाणा में स्थित अंबाला वायुसेना अड्डे पर उतरे। राफेल विमानों के भारतीय हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद दो सुखोई 30एमकेआई विमानों ने उनकी आगवानी की और उनके साथ उड़ते हुए अंबाला तक आए।

दसॉ एविएशन के साथ आपात स्थिति में राफेल विमानों की खरीद का यह सौदा भारतीय वायुसेना की कम होती युद्धक क्षमता में सुधार के लिए किया गया था। वायुसेना के पास फिलहाल 31 लड़ाकू विमान हैं जबकि वायुसेना के स्क्वाड्रन में इनकी स्वीकृत संख्या के अनुसार कम से कम 42 लड़ाकू विमान होने चाहिए।

अंबाला पहुंचे पांच राफेल विमानों में से तीन विमान एक सीट वाले जबकि दो राफेल दो सीट वाले लड़ाकू विमान हैं। इन्हें भारतीय वायुसेना के अंबाला स्थित स्क्वाड्रन 17 में शामिल किया जाएगा जो ‘गोल्डन एरोज’ के नाम से प्रसिद्ध है।



राफेल को दुनिया का सबसे ताकतवर लड़ाकू विमान माना जाता है। राफेल सैकड़ों किलोमीटर तक अचूक निशाना लगा सकता है।


राफेल में जो हवा से हवा में और हवा से जमीन में निशाना लगाने की क्षमता है, वैसी क्षमता फिलहाल चीन और पाकिस्तान दोनों की ही वायुसेना के किसी एयरक्राफ्ट में नहीं है, जिसके चलते भारत इन दोनों देशों से कहीं आगे है।


राफेल में बिल्ड की गई मिसाइलें इसे सबसे अलग लड़ाकू विमान बनाती हैं। राफेल में लगी है मीटियॉर मिसाइल। मीटियॉर मिसाइल हवा से हवा में मार कर सकती है। इसकी मारक क्षमता 150 किलोमीटर है, यानी यह मिसाइल 150 किलोमीटर दूर मौजूद दुश्मन पर भी अचूक निशाना लगा सकती है। इसका मतलब है कि राफेल बिना देश की सीमा पार किए ही दुश्मन के विमान को ढेर कर सकता है।



राफेल में दूसरी मिसाइल है- स्काल्प मिसाइल। स्काल्प की मारक क्षमता 600 किलोमीटर की, यानी मीटियॉर से कहीं ज्यादा, है। स्काल्प मिसाइल के जरिए राफेल इतनी दूर बैठे दुश्मन पर निशाना लगा सकता है. स्काल्प अपनी अचूक मारक क्षमता के लिए जाना जाता है।


तीसरी मिसाइल जिसकी, बात हो रही है, वो है हैमर मिसाइल. भारतीय वायुसेना ने इस लड़ाकू विमान की क्षमता को बढ़ाने के लिए फ्रांस से हैमर मिसाइल भी खरीद रहा है। अभी इस मिसाइल के लिए ऑर्डर प्रोसेस किया जा रहा है. चीन के साथ विवाद के बीच भारत ने यह फैसला लिया है। हैमर मिसाइल की मारक क्षमता 60-70 किलोमीटर है।


राफेल डीएच (टू-सीटर) और राफेल ईएच (सिंगल सीटर), दोनों ही ट्विन इंजन, डेल्टा-विंग, सेमी स्टील्थ कैपेबिलिटीज के साथ चौथी जनरेशन का फाइटर है। ये न सिर्फ फुर्तीला है, बल्कि इससे परमाणु हमला भी किया जा सकता है।


राफेल सिंथेटिक अपरचर रडार (SAR) भी है, जो आसानी से जाम नहीं हो सकता। इसमें लगा स्पेक्ट्रा लंबी दूरी के टारगेट को भी पहचान सकता है। किसी भी खतरे की आशंका की स्थिति में इसमें लगा रडार वॉर्निंग रिसीवर, लेजर वॉर्निंग और मिसाइल एप्रोच वॉर्निंग अलर्ट हो जाता है और रडार को जाम करने से बचाता है।

राफेल का रडार सिस्टम 100 किमी के दायरे में भी टारगेट को डिटेक्ट कर लेता है। राफेल में आधुनिक हथियार भी हैं, जैसे- इसमें 125 राउंड के साथ 30 एमएम की कैनन है। ये एक बार में साढ़े 9 हजार किलो का सामान ले जा सकता है।



राफेल में लगी हैमर (हाइली एजाइल मॉड्यूलर म्यूनिशन एक्सटेंडेड रेंज) मीडियम रेंज मिसाइल है। ये आसमान से जमीन पर वार करती है। यह लद्दाख जैसे पहाड़ी इलाकों में भी मजबूत से मजबूत शेल्टर और बंकरों को तबाह कर सकती है।





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