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राजस्थान में रातोंरात हुआ बड़ा खेल, सत्ता संघर्ष में चौंकाने वाला घटनाक्रम



राजस्थान में सरकार गिराने की कथित साजिश के मामले में अब तक का सबसे बड़ा मोड़ सामने आया है। इस पूरे मामले की जांच कर रही राजस्थान पुलिस के विशेष कार्यबल (एसओजी) ने विधायक खरीद फरोख्त से जुड़ी तीनों FIR करीब 28 दिन बाद क्लोज कर दी हैं। 14 अगस्त को विधानसभा सत्र से पहले हुए इस चौंकाने वाले घटनाक्रम को किसी बड़ी सियासी चाल से भी जोड़कर देखा जा रहा है।


राजस्थान में मचे सियासी घमासान के बीच अब भारतीय जनता पार्टी भी अपने विधायकों की घेराबांदी करने जा रही है। 14 अगस्त से राजस्थान विधानसभा का अहम सत्र शुरू होने जा रहा है। इससे पहले बीजेपी अपने सभी विधायकों को टूटने से बचाने की कोशिश कर रही है।

उदयपुर संभाग के 12 विधायकों को गुजरात भेजा गया है। ये विधायक 12 अगस्त तक गुजरात में ही रहेंगे। कुछ और विधायकों को मध्य प्रदेश शिफ्ट किए जाने की तैयारी है।


भारतीय जनता पार्टी बहुजन समाज पार्टी के विधायकों के कांग्रेस में विलय पर आने वाले हाई कोर्ट के फैसले का इंतजार करेगी। अगर यह कांग्रेस के खिलाफ फैसला आता है तो भारतीय जनता पार्टी अपने विधायकों को सुरक्षित ठिकानों पर रखेगी। आशंका जताई जा रही है कि कांग्रेस बीजेपी के विधायकों में सेंधमारी कर सकती है।


दूसरी तरफ दिल्ली में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात के बाद इन विधायकों को गुजरात शिफ्ट किए जाने पर भी कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. शिफ्ट किए गए ज्यादातर विधायक वसुंधरा राजे के समर्थक हैं। वसुंधरा राजे ने जेपी नड्डा से पार्टी की कार्यशैली को लेकर अपनी नाराजगी जताई है।


जेपी नड्डा से वसुंधरा राजे ने कह दिया है कि वे पार्टी के साथ हैं मगर स्वाभिमान से समझौता नहीं करेंगी। वसुंधरा राजे फिलहाल 12 अगस्त तक दिल्ली में ही रहेंगी और 13 को जयपुर लौटेंगी।



इस बीच वसुंधरा राजे ने शनिवार को दिल्ली में वरिष्ठ बीजेपी नेता राजनाथ सिंह से भी मुलाकात की है। दोनों नेताओं के बीच राजस्थान के राजनीतिक घटनाक्रम पर बात हुई है।


वसुंधरा राजे ने राजस्थान कांग्रेस में मचे घमासान पर एक लंबे वक्त तक इस चुप्पी साध रखी थी, इसे लेकर बीजेपी में चर्चाओं का बाजार गरम था। पिछले महीने जब राजस्थान बीजेपी कांग्रेस के खिलाफ सियासी दांव चलने की तैयारी कर रही थी तो इस दौरान वसुंधरा पूर्व सीएम होने के बावजूद इन बैठकों से गायब थीं।


आपको ये भी याद दिला दें कि राजस्थान की मुख्यमंत्री रहते वसुंधरा राजे बीजेपी के दो अध्यक्षों की नाक में दम कर चुकी हैं। जब राजनाथ सिंह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे तो वसुंधरा ने उनके आदेश की नाफरमानी की थी और फिर अमित शाह के साथ भी यही हुआ था। इसके बाद हुए विधानसभा चुनाव में वसुंधरा की अगुवाई में बीजेपी को राजस्थान में हार मिली।


गहलोत और पायलट के बीच चल रहे सियासी घमासान में इस बात के कयास लग रहे हैं कि अगर पायलट की चली तो बीजेपी अपने समर्थन से उन्हें राजस्थान का मुख्यमंत्री बना सकती है। पायलट को इस बात के लिए बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व से आश्वासन भी मिला है। ऐसे में बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व एक तीर से दो निशाने लगाएगा। पायलट के रुप में राजस्थान की पसंद का मुख्यमंत्री देने के साथ ही वसुंधरा को किनारे लगा दिया जाएगा। वंसुधरा पार्टी की इसी रणनीति को भांप कर अब अपने मान स्वाभिमान का शोर कर रही हैं।


दूसरी तरफ जिस तरह राजस्थान एसओजी ने विधायकों की खरीद फरोख्त से जुड़ी तीन एफआईआर क्लोज़ की हैं उससे बीजेपी में सेंधमारी की कांग्रेसी तैयारियों को बल मिल रहा है।


आगामी 14 अगस्त से राजस्थान विधानसभा का सत्र शुरू होना है। इस सत्र में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बहुमत साबित कर सकते हैं।


टीम स्टेट टुडे



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