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'रिमोट कंट्रोल मॉडल' ने कांग्रेस को किया बर्बाद, आजाद ने राहुल को सुनाई खरी खोटी


नई दिल्ली, 26 अगस्त 2022 : कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता सहित सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। 5 पन्नों की चिट्ठी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेजी है। इस चिट्ठी में उन्होंने कांग्रेस में शामिल होने से छोड़ने तक के सफर के बारे में बताया है। इसके साथ ही उन्होंने वर्तमान कांग्रेस की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने राहुल गांधी पर आरोप लगाते हुए कहा कि आज कांग्रेस रिमोट कंट्रोल मॉडल से चल रही है। हालात इतने खराब हो गए हैं कि राहुल गांधी के पीए और सुरक्षाकर्मी पार्टी के बारे में फैसले ले रहे हैं।

सोनिया गांधी को संबोधित पत्र में गुलाम नबी आजाद ने खत की शुरुआत कांग्रेस से अपने जुड़ाव से किया है। बताया है कि किस तरह वह तमाम अहम जिम्मेदारियों को निःस्वार्थ भाव से और पूरी शिद्दत से पूरा किया। याद किया कि किस तरह संजय गांधी के कहने पर 1975-76 में वह उस समय यूथ कांग्रेस में शामिल हुए जब कश्मीर में कोई पार्टी से जुड़ना नहीं चाहता था। आजाद ने खत में लिखा है कि किस तरह इंदिरा गांधी के जेल जाने के विरोध में प्रदर्शन की वजह से उन्हें 1978-79 में जेल जाना पड़ा। उन्होंने बताया है कि किस तरह वह इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, पीवी नरसिम्हा राव और डॉक्टर मनमोहन सिंह की सरकारों में केंद्रीय मंत्री के तौर पर काम किया।

1980 के दशक के मध्य से कांग्रेस के हर अध्यक्ष के कार्यकाल में महासचिव रहे। किस तरह राजीव गांधी ने उन्हें कांग्रेस संसदीय बोर्ड का सदस्य बनाया। कैसे वह 4 दशकों तक कांग्रेस वर्किंग कमिटी का करीब 4 दशकों तक सदस्य रहे। 7 सालों तक राज्यसभा में विपक्ष के नेता समेत तमाम बड़ी और अहम जिम्मेदारियों को निभाया। खत में उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर सोनिया गांधी के कार्यकाल की खुलकर तारीफ की खासकर यूपीए-1 और यूपीए-2 सरकार के दौरान उनकी भूमिका को सराहा।

राहुल गांधी को लेकर नाराजगी

आजाद ने राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने लिखा कि दुर्भाग्य से, राहुल गांधी की राजनीति में एंट्री से आपके द्वारा स्थापित संपूर्ण कंसल्टेटिव मकैनिज्म ध्वस्त हो गया। खासकर जनवरी 2013 में जब आपने उन्हें उपाध्यक्ष बनाया उसके बाद उन्होंने बंटाधार कर दिया। सभी वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं को साइडलाइन कर दिया गया और अनुभवहीन चाटुकारों से घिरे रहे। राहुल गांधी पर पहले भी पार्ट टाइम पॉलिटिशियन होने के आरोप लगते रहे हैं। इससे पहले भी हार्दिक पटेल और हिमंत बिस्वा सरमा ने उन पर समय न देने का आरोप लगाया था।

कांग्रेस जोड़ो यात्रा करनी चाहिए

गुलाम नबी आजाद ने सोनिया गांधी को लिखा कि कांग्रेस ने अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस चलाने वाली राष्ट्रीय कार्यसमिति ने इच्छाशक्ति और क्षमता खो दी है। कांग्रेस ने भारत जोड़ो यात्रा शुरू की है, उसको लेकर आजाद ने लिखा है कि 'भारत जोड़ो यात्रा' शुरू करने से पहले पार्टी नेतृत्व को 'कांग्रेस जोड़ो यात्रा' करनी चाहिए थी।

राहुल गांधी की अपरिपक्वता से मिली हार

गुलाम नबी आजाद ने लिखा कि दुर्भाग्य से राहुल गांधी के राजनीति में आने के बाद जब उन्हें पार्टी का उपाध्यक्ष बनाया गया था, उन्होंने कांग्रेस के कार्य करने के तौर-तरीकों को खत्म कर दिया। उन्होंने संपूर्ण सलाहकार तंत्र को ध्वस्त कर दिया। इसके साथ ही राहुल का प्रधानमंत्री द्वारा जारी किया गया अध्यादेश फाड़ना उनकी अपरिवक्ता दिखाता है। इस बचकाने व्यवहार ने प्रधानमंत्री और भारत सरकार के अधिकारों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया था। 2014 में यूपीए सरकार की हार के लिए यह घटना सबसे ज्यादा जिम्मेदार थी। बता दें, राहुल गांधी ने दागी नेताओं को बचाने वाले यूपीए सरकार द्वारा पारित अध्यादेश को राहुल गांधी ने मीडिया के सामने फाड़ दिया था। इस दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह विदेश दौरे पर गए हुए थे।

गांधी परिवार पर साधा निशाना

गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस अध्यक्ष पद पर चुनाव न कराने को लेकर भी गांधी परिवार पर निशाना साधा है। उन्होंने अपनी चिट्ठी में लिखा है कि संगठन में किसी भी स्तर पर कहीं भी चुनाव नहीं हुआ। कांग्रेस के चुने हुए लेफ्टिनेंट्स को पार्टी चलाने वाली मंडली द्वारा तैयार की गई सूचियों पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया है। पार्टी पर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी करने के लिए नेतृत्व पूरी तरह से जिम्मेदार है।

रिमोट कंट्रोल मॉडल से चल रही कांग्रेस

गुलाम नबी आजाद ने पत्र में सोनिया गांधी को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि इससे भी बदतर 'रिमोट कंट्रोल मॉडल' था, जिसने यूपीए सरकार की संस्थागत अखंडता को ध्वस्त कर दिया। 'रिमोट कंट्रोल मॉडल' अब कांग्रेस में भी लागू हो गया है। राहुल गांधी के पीए और सुरक्षाकर्मी पार्टी के बारे में फैसला ले रहे हैं। राहुल के नेतृत्व में 39 विधानसभा चुनावों में हार मिली।

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