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Business friendly governance से उद्योग प्रदेश बन रहा यूपी, आस्था ही नहीं रोजगार के भी बड़े केंद्र बनेंगे अयोध्या, काशी और मथुरा

 



उत्तर प्रदेश के धार्मिक स्थलों में लग रहे बड़े प्रोजेक्ट्स हजारों लोगों के सेवायोजन का बनेंगे साधन

 

इन तीन धार्मिक स्थलों पर जीबीसी 4.0 के माध्यम से हो रहा 48 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश

 

टॉप-5 बड़े प्रोजेक्ट्स के जरिए इन तीनों धार्मिक महत्व वाले जिलों में 14 हजार लोगों को मिल सकेगा रोजगार

 

बड़ी संख्या में टूरिज्म फैसिलिटी, वेलनेस सेंटर, होटल्स समेत कई अन्य सेक्टर्स में मिल सकेंगी नौकरियां

 

लखनऊ, 1 मार्च। अयोध्या, काशी और मथुरा, उत्तर प्रदेश में ये तीनों स्थल हिंदु समाज के आस्था के सबसे बड़े केंद्र के रूप में विख्यात हैं। हालांकि अब ये आस्था के केंद्र उत्तर प्रदेश में रोजगार के बड़े केंद्र में शुमार होने जा रहे हैं। ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (जीबीसी 4.0) के माध्यम से इन तीनों स्थानों पर 48 हजार करोड़ रुपए से अधिक के प्रोजेक्ट्स को धरातल पर उतारने की शुरुआत हो चुकी है। इस निवेश के जरिए व्यापक स्तर पर यहां रोजगार के द्वार खुल रहे हैं। इन तीनों स्थलों पर जो टॉप-5 प्रोजेक्ट्स शुरू हो रहे हैं, अकेले उनके माध्यम से यहां पर करीब 14 हजार लोगों को रोजगार मिलने जा रहा है। इन स्थलों पर खासतौर पर टूरिस्ट्स फैसिलिटी सेंटर, वेलनेस सेंटर और होटल्स की शुरुआत हो रही है, जिसमें व्यापक स्तर पर लोगों की आवश्यकता होगी।

 

रोजगार का माध्यम बनेगी प्रभु राम की नगरी अयोध्या


प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या में करीब 13 हजार करोड़ के कुल 372 प्रोजेक्ट्स की शुरुआत होने जा रही है। इसमें अभिनंदन लोढ़ा हाउस रीयल एस्टेट एवं कॉमर्शियल प्रोजेक्ट के माध्यम से 3 हजार करोड़ रुपए का निवेश कर रहा है, जो 100 से अधिक रोजगार के अवसर सृजित करेगा। इसी तरह, पीकेएच वेंचर्स लि. 600 करोड़ के निवेश से प्रदेश सरकार की पॉलिसी के तहत टूरिस्ट फैसिलिटेशन सेंटर की स्थापना कर रहा है, जिसमें 500 कमरों का एक होटल बन रहा है। इसके माध्यम से 300 नौकरियों का सृजन होगा। वहीं, पक्का लिमिटेड अयोध्या में 550 करोड़ रुपए की लागत से पेपर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की स्थापना कर रहा है। इसके जरिए अयोध्या में 600 से अधिक रोजगार सृजित होने की संभावना है। द इनोवेटर्स डिजिटल एड्स प्रा. लि. 510 करोड़ की लागत से अयोध्या में लग्जरी स्टार कैटेगरी होटल निर्मित कर रहा है। इस प्रोजेक्ट से 100 रोजगार उपलब्ध होंगे। वहीं, क्रेसकेंडो इंटीरियर्स 500 करोड़ रुपए से प्राइवेट इंडस्ट्रियल पार्क का निर्माण करने जा रहे हैं। यह 100 से अधिक लोगों के लिए रोजगार का सृजन करेगा। इस तरह इन टॉप-5 प्रोजेक्ट्स से ही 1200 रोजगार उपलब्ध हो रहे हैं।

 

काशी में बढ़ेंगे रोजगार के साधन


भगवान शिव की नगरी काशी यानी वाराणसी की बात करें तो करीब 19250 करोड़ की निवेश राशि से 277 प्रोजेक्ट्स शुरू हो रहे हैं। इसमें टॉप-5 प्रोजेक्ट्स से 1500 से ज्यादा लोगों को रोजगार प्राप्त होगा। भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लि. (भेल) 500 करोड़ रुपए की धनराशि से कंपनी के मौजूदा और उभरते व्यावसायिक क्षेत्र (मैकेनिकल/इलेक्ट्रिकल/इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट/सिस्टम) के लिए रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आरएंडडी) और फैब्रिकेशन/मैन्युफैक्चरिंग/टेस्टिंग फैसिलिटीज की स्थापना कर रहा है। इसके माध्यम से 225 रोजगार सृजित होंगे। वहीं, रोमा बिल्डर्स और प्रमोटर्स प्रा. लि. 5 स्टार रिजॉर्ट, मेडिटेशन के साथ वेलनेस सेंटर, फलों के फॉर्म्स, क्लब हाउस और हाउसिंग सोसाइटी का मिक्स डेवलपमेंट आधारित प्रोजेक्ट शुरू कर रहा है। 500 करोड़ के निवेश से शुरू हो रहे इस प्रोजेक्ट से 300 लोगों को रोजगार प्राप्त होगा। इसी तरह, गजाधर टेक्नोसिस एलएलपी हाउसिंग प्रोजेक्ट्स पर 350 करोड़ रुपए खर्च कर रहा है जो क्षेत्र में 300 लोगों को रोजगार प्रदान करने में सक्षम होगा। अंश निर्माण प्रा. लि. 275 करोड़ रुपए से रेजिडेंशियल ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट और कॉमर्शियल मॉल की स्थापना कर रहा है जिसके माध्यम से 200 लोगों को नौकरियां प्रदान की जा सकेंगी। वहीं, जेएस रेजिडेंसी प्रा. लि. 250 करोड़ से होटल स्थापित करने जा रहा है, जो 500 लोगों को सेवायोजन का अवसर प्रदान करेगा।

 

कृष्ण जन्मस्थली में बंपर रोजगार के अवसर


श्रीकृष्ण जन्मस्थली मथुरा में करीब 16,600 करोड़ रुपए से 415 प्रोजेक्ट्स की ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी संपन्न हुई है। यहां टॉप-5 प्रोजेक्ट्स से 11 हजार से अधिक नौकरियां मिलने की संभावना है। इसके अनुसार, एयर लिक्विड नॉर्थ इंडिया प्रा. लि. ने मथुरा में 3075 करोड़ रुपए से उद्योगों और अस्पतालों की सेवा के लिए एक नई अत्याधुनिक स्टेट आफ आर्ट एयर सेपरेशन यूनिट स्थापित करने की योजना बनाई है। यह यूनिट अत्याधुनिक, पूरी तरह से स्वचालित और पर्यावरण के अनुकूल होगी।  यूनिट को लिक्विड ऑक्सीजन (मेडिकल ऑक्सीजन सहित) 305 टीपीडी, लिक्विड नाइट्रोजन 45 टीपीडी, लिक्विड आर्गन 12 टीपीडी बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। इसके जरिए 50 लोगों को रोजगार प्रदान किया जा सकेगा। द बेनिसन 1310 करोड़ रुपए से होटल स्थापित कर रही है, जिससे कई रोजगार प्रदान किए जाएंगे। केशव पब्लिकेशन प्रा. लि. स्टेशनरी सामान, बिजली के सामान के प्रोडक्ट्स, प्लास्टिक प्रोडक्ट्स मोल्डिंग और मैन्युफैक्चरिंग आइटम्स और पब्लिकेशंस और अन्य कई प्रोडक्ट्स मैन्युफैक्चरिंग की शुरुआत की है। इस पर 1250 करोड़ रुपए का निवेश किया जा रहा है, जबकि 10 हजार रोजगार उपलब्ध कराए जाने की तैयारी है। आईएफपी पेट्रो प्रोडक्ट्स यूज्ड ल्युब्रिकेटिंग ऑयल रिफाइनिंग प्लांट स्थापित कर रहा है, जिस पर 1100 करोड़ निवेश की योजना है। इससे 700 लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं अवदी इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड 500 करोड़ रुपए से एसीएसआर कंडक्टर्स मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित कर रहा है जो 400 लोगों के लिए नौकरी का प्रबंध करेगी।

 

अन्य चार प्रमुख धार्मिक स्थलों में बड़े प्रोजेक्ट्स से मिलेंगे 12,500 रोजगार 


प्रदेश के अन्य धार्मिक स्थलों (प्रयागराज, चित्रकूट, नैमिषारण्य (सीतापुर), बरेली) के जरिए भी 77,312 करोड़ रुपए के कुल 902 प्रोजेक्ट्स धरातल पर उतर रहे हैं। इसके माध्यम से हजारों रोजगार मिलने की संभावना है। इन चारों धार्मिक स्थलों में होने जा रहे टॉप-5 प्रोजेक्ट्स के जरिए यहां 12,500 से ज्यादा रोजगार प्रदान करेंगे। संगमनगरी प्रयागराज में वरुण बेवरेजेस (1053 करोड़ रुपए), डीएनडी इंडिया (600 करोड़ रुपए), ओमेक्स लि. (600 करोड़ रुपए), शौर्य नेचुरोपैथी एंड रिसॉर्ट्स इंडिया प्रा. लि. (500 करोड़ रुपए)और जेकेसेम (400 करोड़ रुपए) मिलकर करीब 2500 रोजगार सृजित करने जा रहे हैं। इसी तरह, धार्मिक स्थल चित्रकूट में टस्को लि. (4700 करोड़ रुपए), सहस्त्रभुज फूड प्रोडक्ट्स प्रा. लि. (500 करोड़ रुपए), वरुण बेवरेजेस लि. (496 करोड़ रुपए), श्री सीमेंट प्रा. लि. (202 करोड़ रुपए) और जय बल्ब कंपनी लि. (300 करोड़ रुपए)करीब 1900 नौकरियां सृजित करेंगे। वहीं, ऋषि मुनियों की तपोस्थली नैमिषारण्य की पुण्य धरती वाले जिले सीतापुर में ग्रीनलैम साउथ लि. (1500 करोड़ रुपए), सेंचुरी प्लाइवुड्स इंडिया लि. (1500 करोड़ रुपए), आरएवी ग्लोबल सॉल्यूशन प्रा. लि. (200 करोड़ रुपए), डालमिया भारत शुगर एंड एंडस्ट्रीज लि. (170 करोड़ रुपए) और द सेकसरिया बिस्वान शुगर फैक्ट्री लि. (132 करोड़ रुपए) 6 हजार से ज्यादा रोजगार सृजित करेंगे। जबकि नाथ नगरी के रूप में प्रसिद्ध बरेली में इफ्को (638 करोड़ रुपए), सिंह एंटरप्राइजेज (605 करोड़ रुपए), रिंकू डेयर प्रोप (490 करोड़ रुपए), रियलप्लाई प्लाइवुड्स एलएलपी (408 करोड़ रुपए) और धामपुर बायो ऑर्गेनिक्स लि. (350 करोड़ रुपए) मिलकर करीब 3000 लोगों को सेवायोजन के अवसर उपलब्ध कराएंगे।



 


 

- सीएम ने बदली यूपी की कार्य संस्कृति, बदल गये प्रदेश के हालात

 

- 'उलटा प्रदेश' से 'उद्योग प्रदेश' बनाने में बिजनेस फ्रेंडली गवर्नेंस ने निभाई बड़ी भूमिका

 

- योगी सरकार ने उद्योगों के लिए तैयार कराई 25 से ज्यादा सेक्टोरियल पॉलिसी

 

- एफडीआई के लिए अलग पॉलिसी और 46 हजार एकड़ लैंडबैंक योगी सरकार की बड़ी उपलब्धि

 

- 41 विभागों की 481 लाइसेंस सेवाओं के लिए सिंगल विंडो सिस्टम ने उद्योग जगत की बदली राय

 

- 4500 से अधिक कंप्लायंसेज का न्यूनिकरण, 577 से अधिक कंप्लायंस को किय गया खत्म

 

सात-आठ साल पहले कोई यकीन भी नहीं कर सकता था कि यूपी एक दिन 'उलटा प्रदेश' की तोहमत से बाहर आकर 'उद्योग प्रदेश' जैसे अलंकरण से नवाजा जाने लगेगा। उत्तर प्रदेश आज विकास के नित नये कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। फिर चाहे बात इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की हो, यातायात कनेक्टिविटी की हो, विद्युत व्यवस्था, कानून व्यवस्था, स्वास्थ्य या शिक्षा। हर सेक्टर में प्रदेश बुलंदियों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशानिर्देशन और सतत मॉनीटिरिंग का नतीजा है कि उत्तर प्रदेश के इतिहास में पहली बार एक ही दिन में 10 लाख 24 हजार करोड़ रुपए के निवेश को विभिन्न उद्योगों के जरिए धरातल पर उतारा गया। जो प्रदेश कभी उद्यमियों के मन में खौफ पैदा कर देता था आज वह बिजनेस फ्रेंडली स्टेट के रूप में विकसित हो चुका है। हर स्तर पर कार्य संस्कृति में व्यापक बदलाव कर के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने असंभव से लगने वाले लक्ष्य को आखिरकार संभव बना दिया है।

 

योगी सरकार ने मील का पत्थर स्थापित कर दिया


प्रदेश की कमान संभालने के बाद कानून व्यवस्था को सुदृढ़ और पटरी पर लाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथन ने पहले दिन से ही मिशन मोड में कार्य करना शुरू कर दिया था। प्रदेश के नौजवानों को हर हाल में रोजगार से जोड़ने की सीएम योगी की चाह ने बड़े स्तर पर उद्योगों को स्थापित करने की राह भी दिखाई। प्रदेश में 25 से ज्यादा सेक्टोरियल पॉलिसी, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को आकर्षित करने के लिए अलग से पॉलिसी, प्रदेश में एक्सप्रेसवे का तेजी से विकास और इनके किनारे पर 46 हजार एकड़ का लैंड बैंक बनाकर योगी सरकार ने मील का पत्थर स्थापित कर दिया है।

 

577 से अधिक कंप्लायंसेज को समाप्त किया


उद्योगों के लिए बेहतर वातावरण बनाने के लिए योगी सरकार ने न केवल 41 विभागों के 481 लाइसेंस सेवाओं को सिंगल विंडो सिस्टम के तहत ला दिया है, बल्कि 13 लाख से अधिक लाइसेंस अप्लीकेशन्स को भी 97 प्रतिशत डिस्पोजल रेट से निस्तारित करके नया रिकॉर्ड कायम किया है। यही नहीं बिजनेस रिफॉर्म एक्शन प्लान (बीएआरपी) के अंतर्गत एक हजार से अधिक यूनिक रिफॉर्म भी पहली बार योगी सरकार में ही संभव हो सका है। इसके अलावा 200 से अधिक सेवाओं में तय समय में एनओसी प्रदान करने की व्यवस्था हो या लगभग 4500 से अधिक कंप्लायंसेज का न्यूनिकरण अथवा 577 से अधिक कंप्लायंसेज को समाप्त किया जाना हो, योगी सरकार ने उद्योगों की राह में आने वाले एक एक रोड़े को दुरुस्त कराते हुए प्रदेश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस का माहौल स्थापित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी।

 

योगी सरकार की छवि पॉलिसी बेस्ड गवर्नेंस की

इसके साथ प्रदेश आज भारत के टॉप 5 मैन्यूफैक्चरिंग स्टेट में शामिल हो चुका है, जिसके पास 86 लाख से अधिक एमएसएमई का विशाल क्लस्टर है, जोकि भारत में किसी भी राज्य की तुलना में सर्वाधिक है। साथ साथ ही की इकोनॉमिक जोन और एक्सप्रेसवे एवं कॉरीडोर्स के पास योगी सरकार ने 46 हजार एकड़ से अधिक लैंडबैंक तैयार करके बड़े औद्योगिक अवसरों को आकर्षित करना शुरू कर दिया है। यही नहीं आज देश और दुनिया के उद्योग जगत के सामने योगी सरकार की छवि पॉलिसी बेस्ड गवर्नेंस की बन चुकी है, जिसके पास उद्योगों के लिए 25 से अधिक सेक्टोरियल पॉलिसी हैं, साथ ही साथ प्रत्यक्ष विदेश निवेश के लिए भी अलग से नीति भी सरकार की बड़ी उपलब्धियों में शुमार है।

 

उद्योगों को आकर्षित कर रहा विशाल उपभोक्त बाजार


उत्तर प्रदेश 10 लाख से अधिक आबादी वाले सात शहर और 5 लाख से अधिक आबादी वाले पांच शहरों वाला बड़ा राज्य है, जिसकी 56 प्रतिशत आबादी कामकाजी है। प्रदेश 250 मिलियन की आबादी और तकरीबन 425 मिलियन के आस पड़ोस के राज्यों की जनसंख्या के साथ विशाल कंज्यूमर बेस रखता है। उत्तर प्रदेश में उद्योग-व्यापार करने वालों को इतना विशाल उपभोक्त बाजार भी आकर्षित कर रहा है।

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