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मथुरा में 22.99 करोड़ का छात्रवृत्ति घोटाला, 71 आइटीआइ के खिलाफ मुकदमा


मथुरा, 1 जून 2023 : मथुरा में वित्तीय वर्ष 2015-16 से 2019-20 तक निजी आइटीआइ संस्थानों में 22.99 करोड़ रुपये का छात्रवृत्ति घोटाला सामने आया है। निदेशालय स्तर से गठित जांच समिति ने स्थलीय व आनलाइन डाटा के आधार पर जांच में यह घपला पकड़ा है।

मास्टर डाटा से मिलान पर हुआ खुलासा

जांच टीम ने शिक्षण संस्थानों द्वारा छात्रवृत्ति के मास्टर डाटाबेस में भरे गए डाटा को लिया और नेशनल काउंसिल फार वोकेशनल ट्रेनिंग नई दिल्ली में जाकर मास्टर डाटा में दर्ज सभी 195 शिक्षण संस्थानों के मान्यता की प्रतियां प्राप्त की। सामने आया है कि जिन छात्र-छात्राओं ने परीक्षा तक नहीं दी उन्हें छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ दिया गया। इस मामले में मथुरा की 71 आइटीआइ के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।

प्राथमिकी होगी दर्ज

निजी आइटीआइ के साथ ही विभाग के उत्तरदायी जिला समाज कल्याण अधिकारियों व कर्मचारियों को निलंबित कर इनके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। वर्तमान में छात्रवृत्ति घोटाले की जांच आर्थिक अपराध शाखा, कानपुर नगर को सौंपी गई है। मथुरा के ही 13 अन्य शिक्षण संस्थानों ने निदेशालय के जाली अभिलेख तैयार कर उच्च न्यायालय में अनुचित लाभ लेने के लिए याचिका दाखिल की थी।

जांच में इन सभी शिक्षण संस्थानों को दोषी मानते हुए इनके खिलाफ भी एफआइआर दर्ज कराई गई है। इस मामले में समाज कल्याण विभाग ने 45 निजी आइटीआइ व फर्जी अभिलेखों का प्रयोग करने वाले 13 शिक्षण संस्थानों यानी कुल 58 शिक्षण संस्थाओं को काली सूची में डाल दिया है। इन संस्थाओं से धनराशि की वसूली की जाएगी। समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने कहा कि घोटाले के आरोपी संस्थान और विभागीय अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

छात्रवृत्ति घोटाले में फिनो बैंक के कर्मचारियों से भी होगी पूछताछ

बहुचर्चित छात्रवृत्ति घोटाले में फिनो बैंक के पांच अधिकारियों व कर्मचारियों और एजेंटों से भी ईडी ने पूछताछ की तैयारी कर ली है। आरोप है कि इनकी मिलीभगत से ही बैंक में अपात्र विद्यार्थियों के खाते खोलकर शिक्षण संस्थानों के संचालकों ने घोटाला किया था। घोटाले में शामिल हाइजिया समूह के संचालक लकी जाफरी बुधवार को भी ईडी के समक्ष नहीं पहुंचे। जांच एजेंसी पांच बार नोटिस भेज चुका है। ईडी ने 2015 से लेकर जनवरी 2023 तक तीन हजार से ज्यादा अपात्र विद्यार्थियों के नाम पर किए गए करोड़ों रुपये के घोटाले की जांच फरवरी में शुरू की थी। दस शिक्षण संस्थानों के खिलाफ एफआइआर दर्ज की गई थी।

इन्होंने हड़पी रकम

फिनों बैंक के एरिया मैनेजर सचिन दुबे, मुरादाबाद निवासी जितेन्द्र सिंह, बाराबंकी के हैदरगढ़ निवासी एजेंट तनवीर अहमद, लखनऊ के आलमबाग निवासी एजेंट अमित मौर्य, बदायूं निवासी मोहम्मद साहिल अजीज से ईडी पूछताछ करेगा। इन्हीं की मदद से बैंक में अपात्र विद्यार्थियों के खाते खोले गए और उनके खातों में आने वाली छात्रवृत्ति की घनराशि हाइजिया समूह सहित अन्य शिक्षण संस्थानों के संचालकों ने हड़पी थी। आरोप है कि इन्होंने संचालकों को बैंक खातों के इलेक्ट्रानिक ट्रांसजेक्शन संबंधी कार्ड उपलब्ध करवाए थे, जिसकी जानकारी विद्यार्थियों को नहीं थी।

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