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खजाने में 96 करोड़, फाइल पर चढ़ी धूल, सड़ रहा 18.50 लाख टन कूड़ा


लखनऊ, 21 जून 2023 : एक तरफ राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण का आदेश है तो दूसरी तरफ नगर निगम में एक ऐसी फाइल पांच माह से धूल चाट रही है, जिसे अगर समय से हरी झंडी मिल जाती तो मोहान रोड पर शिवरी प्लांट पर एकत्र 18.50 लाख टन पुराने कूड़े का वैज्ञानिक तरह से उपचार तेजी से होने लगता है। अब बारिश में यह कूड़ा भीगकर फिर सडऩे लगेगा और मोहान रोड से लेकर दूर तक उसकी दुर्गंध हर किसी को प्रभावित करेगी।

यह हाल तब है, जब कई माह पहले शासन ने पुराने कूड़े का वैज्ञानिक तरह से उपचार करने के लिए 96 करोड़ का बजट भी पास कर दिया था। बस, टेंडर न होने से सड़ चुके कूड़े का उपचार नहीं हो पा रहा है। टेंडर न होने से मोहान रोड शिवरी प्लांट पर कूड़े का प्रबंधन अभी कछुआ से भी धीमी गति से हो रहा है। मोहान रोड के शिवरी में कूड़ा प्रबंधन का प्लांट लगा हुआ है। यहां दो दशक से अधिक से कूड़े का पहाड़ बनता जा रहा है, जो 18.50 लाख टन हो गया है। लीगेसी वेस्ट (पुराने कूड़ा) के प्रबंधन के नाम पर पहले भी कई करोड़ की रकम खर्च भी हो चुकी थी, जिसमें अधिकांश रकम अफसर ही खा गए और इस कारण कूड़े का प्रबंधन न होने से उसका पहाड़ खड़ा होता गया।

इससे आसपास क्षेत्र की हवा भी प्रदूषित हो रही है। कूड़े का पानी भूगर्भ जल को प्रदूषित कर रहा है, ऐसी शंका भी जताई जा चुकी है। दो साल पहले तत्कालीन प्रमुख सचिव नगर विकास डा. रजनीश दुबे ने भी शिवरी प्लांट का निरीक्षण किया और यह पाया था कि कूड़ा प्रबंधन करने में घोर लापरवाही बरती गई थी। उन्होंने कूड़े का पानी धरती में जाने पर भूगर्भ जल के प्रदूषित होने का खतरा भी जताया था और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की थी।

पांच माह से नगर निगम में दबी है फाइल पुराने हो गए कूड़े का उपचार करने का काम जलनिगम की सीएंडडीएस (कांस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज) को दिया गया था लेकिन शासन ने सीएंडडीएस से काम वापस लेकर नगर निगम को दे दिया था। नगर निगम को काम मिले भी पांच माह का समय भी बीत गया है और मार्च में बैठक भी हो चुकी है लेकिन नगर निगम टेंडर नहीं कर पा रहा है। शासन से मिले बजट का उपयोग न होने से उपयोगिता प्रमाण पत्र भी नहीं जा रहा है, जिससे भविष्य में बजट को शासन की तरफ से वापस लिए जाने की आशंका जताई जा रही है।

नगर निगम के पर्यावरण अभियंता संजीव प्रधान की तरफ से नगर आयुक्त को भेजी रिपोर्ट में कहा है कि शासन की तरफ से योजना मंजूर है, लेकिन योजना पर प्रभावी कार्यवाही न होने से पर्यावरणीय सुधार संबंधित परियोजना का पूरा लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। नई लाइन की फाइल गायब शिवरी प्लांट में लगी बिजली ग्रामीण इलाकों से जुड़ी है, जिस कारण दिन में कई बार उसका आना और जाना लगा रहता है।

नई लाइन डालने और नया ट्रांसफार्मर लगाने के लिए चार करोड़ खर्च होने की फाइल भी डंप हो गई है। नगर निगम के विद्युत यांत्रिक और लेखा विभाग एक दूसरे के पास फाइल होने की बात कह रहा है और इस कारण वहां लाइट का नया कनेक्शन नहीं हो पा रहा है। हाल यह है कि नगर निगम की तरफ से वैकल्पिक तरह से कराया जा रहा कूड़े का उपचार एक सप्ताह से बंद था।


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