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अखिलेश के लिए आसान नहीं सपा की विरासत बचा पाना, शिवपाल के रुख से बढ़ी मुश्किलें


लखनऊ, 09 नवम्बर 2022 : समाजवादी पार्टी के संरक्षकमुलायम सिंह यादवके निधन सेरिक्त हुई मैनपुरीलोकसभा सीट बचापाना सपा अध्यक्षअखिलेश यादव केलिए आसान नहींहै। उपचुनाव मेंभाजपा की आक्रामकतैयारी के साथही चाचा शिवपालसिंह यादव केताजा रुख नेअखिलेश यादव कीमुश्किलें और बढ़ादी हैं। मैनपुरीमें मुलायम कीसियासी विरासत आगे बढ़ानेके लिए सैफईपरिवार को एककर अखिलेश अभीतक प्रत्याशी चयनभी नहीं करपाए हैं।

लगातार 7 बार सेजीतती आई हैसपा

मैनपुरी लोकसभा सीटपर सपा वर्ष 1996 से लगातार सात बारजीतती आई है।उसने इस दौरानदो उपचुनाव भीजीते हैं। वर्ष 2004 में जब मुलायमने यहां सेइस्तीफा दिया तोउस उपचुनाव मेंधर्मेन्द्र यादव यहांसे जीते थे।इसी प्रकार वर्ष 2014 में मुलायम ने जबफिर यह सीटछोड़ी तो उनकेपौत्र तेज प्रतापसिंह यादव यहांसे सांसद चुनेगए थे। इसबार भी तेजप्रताप को हीटिकट मिलने कीसबसे अधिक संभावनाहै। वहीं, सपाके इस अभेद्यदुर्ग पर भाजपाइस बार कमलखिलाना चाहती है। इसकेलिए आक्रामक तैयारीके साथ हीलगातार चुनाव जीत रहीभाजपा के हौसलेभी बुलंद हैं।

मैनपुरी लोकसभा सीटमें पांच विधानसभा

मैनपुरी लोकसभा सीटमें पांच विधानसभामैनपुरी, भोगांव, किशनी, करहलव जसवंतनगर आतीहैं। वर्ष 2017 केचुनाव में भाजपाके पास इनमेंसे केवल एकभोगांव सीट हीथी जबकि 2022 केचुनाव में भाजपाभोगांव व मैनपुरीदो सीटें जीतनेमें सफल रहीहै। यानी अबसपा के पासकिशनी, करहल वजसवंतनगर सीट हीहै। करहल सेखुद अखिलेश यादवविधायक हैं जबकिजसवंतनगर से शिवपालविधायक हैं।

लगातार चुनाव हाररही समाजवादी पार्टी

समाजवादी पार्टी एकके बाद एकलगातार चुनाव हार रहीहै। लगातार उपचुनावोंमें असफल होरही सपा केसामने कार्यकर्ताओं मेंजोश बनाए रखनाभी बड़ी चुनौतीहै। आजमगढ़ वरामपुर लोकसभा उपचुनाव मेंपार्टी की हारके बाद गोलागोकर्णनाथ विधानसभा उपचुनाव मेंभी साइकिल कीहवा निकल गई।समाजवादी पार्टी लगातार दावाकर रही थीकि गन्ना किसानभाजपा से नाराजहैं, लेकिन गोलाउपचुनाव जीतकर भाजपा नेसपा के दावेको गलत साबितकर दिया है।

अखिलेश की मुश्किलेंबढ़ा रहे चाचा

चाचा शिवपालभी भतीजे अखिलेशकी मुश्किलें बढ़ारहे हैं। शिवपालने गोरखपुर मेंजिस तरह सेअखिलेश पर हमलाबोला उससे साफहै कि मुलायमके न रहनेके बाद दोनोंके नजदीक आनेकी जो संभावनाएंबनी थीं, वहअब खत्म होचुकी हैं। शिवपालने यहां तककहा कि जोपरिवार का नहींहो सका वोकभी सफल नहींहो सकता है।अखिलेश यादव चापलूसोंसे घिरे हुएहैं, जो उन्हेंगलत राय देतेहैं। असली समाजवादीलोग उनकी पार्टीके साथ हैंऔर उनकी पार्टीही असली समाजवादीहै। मुलायम केअंतिम संस्कार वअस्थि विसर्जन केदौरान शिवपाल वअखिलेश में जोनजदीकियां दिखी थींवह मैनपुरी उपचुनावकी तपिश मेंटूटती नजर आरही हैं।

शाक्य मतदाताओं कोसाधने की कोशिश

मुलायम की मैनपुरीको बचाने केलिए अखिलेश प्रत्याशीकी घोषणा सेपहले यहां कील-कांटे दुरुस्त करनेमें लगे हैं।मैनपुरी में यादवके बाद बड़ीसंख्या शाक्य मतदाताओं कीहै। सपा नेशाक्य मतदाताओं कोसाधने के लिएबुधवार को बड़ादांव खेलते हुएसबसे पहले पूर्वमंत्री आलोक शाक्यको मैनपुरी काजिलाध्यक्ष बना दियाहै।

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