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सुनसान समाधि, जहाँ चिरनिद्रा में लीन हैं अयोध्या का चक्रवर्ती सम्राट - रामोत्सव 2024 (अयोध्या की विकास गाथा)



वर्षों से उपेक्षित पड़ी चक्रवर्ती राजा दशरथ की समाधि स्थल का योगी सरकार ने कराया कायाकल्प

 

- आध्यात्मिक अनुभूति व सांस्कृतिक संपदा का भी मार्ग प्रशस्त कर रहा दशरथ समाधि स्थल

 

- मान्यता है कि यहां पूजन से होता है शनिदेव की साढ़ेसाती का शमन

 

- नव्य अयोध्या से जोड़ा गया, द्वितीय चरण में 24 मीटर चौड़ी सड़क की बनाई जा रही योजना

 

- पर्यटन की दृष्टि से भी इसे अभी और समृद्ध करेगी योगी सरकार

 

अयोध्या, 11 जनवरीः चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ की समाधि स्थल के गौरव का वर्णन पुराणों में भी उल्लेखित है। ऐसी मान्यता है कि यहां मांगी गई सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। पूरा बाजार ग्राम पंचायत के उत्तर दिशा में धार्मिक, पौराणिक इतिहास समेटे बिल्वहरि घाट के समीप राजा दशरथ की समाधि स्थली व भव्य मंदिर है। मान्यता यह भी है कि इस समाधि स्थल पर पूजन-अर्चन करने वाले साधकों को शनि की साढ़ेसाती जैसी महादशा के प्रकोप से छुटकारा मिल जाता है। अनेक धार्मिक व पौराणिक प्रतीकों वाले दशरथ समाधि स्थल की पूर्ववर्ती सरकारों ने सुधि नहीं ली, लेकिन जब योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनी तो अयोध्या के साथ ही इस स्थल के जीर्णोद्धार का मार्ग प्रशस्त हो गया। राम जन्मभूमि से लगभग 15 किमी. दूर इस स्थान का प्रथम चरण में सुदृढ़ीकरण व सौंदर्यीकरण कराया गया है। द्वितीय चरण में भी योगी सरकार यहां विकास के लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

 



अनदेखी से निरंतर जूझती रही राजा दशरथ की समाधि स्थली


जिस रामनगरी में प्रभुश्रीराम से जुड़ी हर एक चीजों का विशिष्ट महत्व होना चाहिए, वहीं उनके पिता चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ की समाधि स्थली अनदेखी से निरंतर जूझती रही, लेकिन योगी सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति से यहां का जीर्णोद्धार कराया गया। पद्मपुराण में भी दशरथ समाधि स्थल के आध्यात्मिक महत्व का वर्णन करते हुए कहा गया है कि जो भी मनुष्य एक बार यहां आकर दर्शन करके दशरथ कृत शनि स्तोत्र का पाठ व स्मरण करता है उसे शनिजन्य कष्टों से मुक्ति मिलती है। यहां विद्यमान कर्मफल दाता शनिदेव का एक विलक्षण विग्रह भी विद्यमान है। इसके दर्शन मात्र से ही साढ़ेसाती, ढैय्या समेत सभी प्रकार के शनिजन्य कष्टों से मुक्ति मिल जाती है। यह भी दावा किया जाता है कि एक बार जो यहां आकर शनिदेव के इस अनोखे विग्रह का दर्शन कर राजा दशरथ द्वारा कृत शनि स्तोत्र का स्मरण-पठन करता है उसे जीवनपर्यंत शनि की शुभ दृष्टि व कृपा प्राप्त होती है। 

 

समाधि स्थल के उत्तराधिकारी संदीप दास जी महराज के मुताबिक यहां चारों भाइयों की चरण पादुका, पिंड वेदी, गुरु वशिष्ठ का चरण चिह्न, प्राचीन ऐतिहासिक अस्त्र-शस्त्र मौजूद हैं, जिसमें आज तक जंग तक नहीं लगी। यहां दशरथ जी, भरत व शत्रुघ्न और गुरु वशिष्ठ की प्रतिमा विद्यमान है। उन्होंने बताया कि भरत ने राजा दशरथ के निधन के उपरांत पूछा कि यहां सबसे पवित्र स्थल कौन है, जहां दशरथ जी का दाह संस्कार हो सके, तब गुरु वशिष्ठ के नेतृत्व में इस जगह का चयन किया गया। 

 



प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम के मद्देनजर होंगे विविध आयोजन


अयोध्या में प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम के मद्देनजर योगी सरकार इस स्थली पर भी अनेक आयोजन भी कराएगी। यहां भी सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। रामलीला, भजन-संकीर्तन, विशिष्ट कलाकारों की तरफ से अनेक कार्यक्रम व अनुष्ठान आदि का कार्यक्रम होगा। नव्य अयोध्या में इसकी पौराणिकता से योगी सरकार आम जनमानस को अवगत कराएगी। इसके लिए संस्कृति व पर्यटन विभाग के अधिकारी खाका तैयार कर रहे हैं।

 

नव्य अयोध्या से बढ़ेगी कनेक्टिविटीः दशरथ समाधि स्थल तक जाने के लिए सड़क के 24 मीटर चौड़ीकरण की योजना है। इसे नव्य अयोध्या से जोड़ा जाएगा। योगी सरकार द्वारा दशरथ समाधि स्थल के महत्व को देखते हुए पहले चरण में यहां मंदिर का सुंदरीकरण किया गया है।

 



परिसर का विस्तारीकरणः यहां परिसर का विस्तारीकरण, सौंदर्यीकरण व सुदृढ़ीकरण किया गया। योगी सरकार ने इस कैंपस को भव्य व दिव्य रूप भी दे दिया।

 

बाउंड्रीवॉल का सुदढ़ीकरणः योगी सरकार में दशरथ समाधि स्थल पर बाउंड्रीवॉल का सुदृढ़ीकरण किया गया। इसके रंग रोगन के साथ ही इसे सुरक्षा के लिहाज से ऊंचा भी कराया गया है। 

 

सत्संग भवन का जीर्णोद्धारः योगी सरकार में ही यहां कीर्तन-भजन स्थल के रूप में सत्संग भवन का जीर्णोद्धार किया गया है। यहां लगभग 200 से 250 सत्संगी एक साथ भजन के आनंद सागर में डुबकी लगा सकते हैं।

 

सोलर पैनल के जरिए विद्युत निर्माण, पारंपरिक ऊर्जा निर्भरता में हुई कटौतीः अयोध्या को सोलर सिटी बनाने के क्रम में यहां भी सोलर पैनल के जरिए विद्युत निर्माण को सुनिश्चित किया गया है। इसके जरिए पारंपरिक ऊर्जा निर्भरता को कम करने में मदद मिली है।



 

रामोत्सव 2024 (अयोध्या की विकास गाथा)

 

रामलला की किलकारियों के साक्षी रहे दशरथ महल को योगी सरकार ने संवारा

 

- रामलला की बाललीलाओं का प्रतीक रहे त्रेता की धरोहर, दशरथ महल की वर्षों तक हुई अनदेखी

 

- 2017 से पहले केवल इस टेबल से उस टेबल घूमती थी फाइल

 

- योगी सरकार की प्रतिबद्धता ने कायाकल्प का मार्ग प्रशस्त कर दिया नया रूप

 

- रैन बसेरा, यात्री सहायता केंद्र तैयार, आध्यात्मिक गंगा में डुबकी लगवाएगा सत्संग भवन, नई अनुभूति कराएगा प्रवेश द्वार

 

अयोध्या-- चाहे वाल्मीकि रामायण हो, महान कवि तुलसीदास कृत रामचरित मानस हो या चलचित्र के आधुनिक रूपांतरण रामानंद सागर कृत रामायण ही क्यों न हो, रामलला के बाल्यकाल के सुलभ हठ, किलकारियां, हंसने-मुसकुराने, रोने-मनाने की लीलाओं का संबंध जिस महल के प्रांगण से था, त्रेतायुग से लेकर आज तक भी वह यथावत है। 22 जनवरी को रामलला अपने दिव्य-भव्य मंदिर में विराजमान होंगे, तो उसी सुकोमल राजपुष्प के कदमों की आहट एक बार फिर सुनने के पूर्व दशरथ महल का यह प्रांगण भाव विह्वल हो उठा है। उन सरकारों से क्या उम्मीद की जाए, जो कभी सुप्रीम कोर्ट में राम के अस्तित्व पर ही सवाल उठा दिया करती थीं। अखिलेश सरकार में दशरथ महल के जीर्णोद्धार की कोशिशें तो हुईं मगर यह फाइलों में सिमट कर रह गईं। कभी एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर तो कभी एक मेज से दूसरे मेज, कभी बजट का बहाना तो कभी इच्छाशक्ति की कमी। इसका असर यह हुआ कि 31 मार्च 2013 में पहली बार दशरथ महल के जीर्णोद्धार के लिए करीब 2.4 करोड़ का प्रावधान हुआ पर इच्छाशक्ति के अभाव, लालफीताशाही और हीलाहवाली के कारण जीर्णोद्धार का इंतजार बढ़ता गया पर जब महंत योगी आदित्यनाथ सीएम बने तो 16 फरवरी 2021 को लिए गए उनके फैसले ने दशरथ महल से अनदेखी के बादलों को दूर कर नव वैभव की आभा से दैदीप्यमान करने का मार्ग प्रशस्त किया।

 

योगी सरकार के प्रयास ने इस महल को गौरवशाली आभा प्रदान की


हम बात कर रहे हैं उसी दशरथ महल की, जहां माता कौशल्या की गोद में पैजनिया पहने ठुमक कर चलते सकल ब्रह्मांड के नायक अपने पिता से चांद पाने का हठ कर लेते हैं और पिता थाली में जल सजाकर दर्पण के रूप में चंद्रमा के प्रतिबिंब को रामलला के लिए साकार कर देते हैं। चंद्रमा को देख पल भर में राम का रुदन पुलकित किलकारियों में परिवर्तित हो गया, जिसकी प्रतिध्वनि से पूरा महल गुंजायमान हो उठता था। क्या माता-क्या पिता, क्या राजा-क्या प्रजा, पुलकित आह्लादित उस सुकुमार के दैदीप्य मुखमंडल पर अपना सब कुछ हार जाने वाली अयोध्या का साक्षी रहा यह खास महल तबसे लेकर अब तक विद्यमान है। इस महल ने त्रेतायुग में साकार राम को देखा और अब कलि काल में भी जल्द ही अपने प्रिय लला को पुनर्प्रतिष्ठित होने की घड़ी देखने वाला है। यह वही दशरथ महल है, जो 500 साल के पराभव काल के दौरान भी मौजूदा रामजन्म भूमि क्षेत्र पर श्रीराम के मंदिर होने के साक्ष्यों की गवाही देता रहा। वर्षों की उपेक्षा के बाद योगी सरकार के प्रयास ने इस महल रूपी मंदिर को गौरवशाली आभा प्रदान की है।

 

कभी बनते थे एस्टिमेट, घूमती भी फाइल, पर अमलीजामा योगी ने पहनाया


31 मार्च 2013 को पहली बार दशरथ महल के सौंदर्यीकरण का प्रावधान यूपी सरकार ने किया, लेकिन 2017 तक प्रक्रिया जटिल कागजी प्रणाली में उलझकर रह गई। कभी एस्टिमेट बनते तो कभी फाइल, एक टेबल से दूसरे टेबल तक जाने का यह क्रम चलता रहा। इस क्रम को बदलने का कार्य किया योगी आदित्यनाथ ने। योगी सरकार ने दशरथ महल के जीर्णोद्धार व सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण की प्रक्रिया को अमली जामा पहनाते हुए करीब तीन करोड़ रुपये के जरिए सत्संग भवन, प्रवेश द्वार, रैन बसेरा व यात्री सहायता केंद्र के निर्माण- पुनरोद्धार व सुदृढ़ीकरण की प्रक्रिया को मूर्त रूप देना प्रारंभ किया। समाजवादी पार्टी की सरकार में 2.4 करोड़ का प्रावधान था, लेकिन इसकी फाइल घूमती रही और दिनोदिन लागत बढ़ती गई। योगी सरकार ने करीब तीन करोड़ रुपये खर्च कर इसे सुसज्जित कर दिया।

 

चार में से दो परियोजना पूर्ण,  22 के पहले प्रवेश द्वार व सत्संग भवन का काम भी हो जाएगा पूरा


दशरथ महल में रैनबसेरा, यात्री सहायता केंद्र, प्रवेश द्वार व सत्संग भवन का कार्य कराने के लिए धन अवमुक्त किया गया था। रैन बसेरा, यात्री सहायता केंद्र का कार्य 2023 में पूर्ण हो चुका है। प्रवेश द्वार भी लगभग पूर्णता की ओर है। पहले यहां सत्संग भवन में केवल संरचना का कार्य पूर्ण हुआ था पर अब यह सत्संग भवन भी 22 जनवरी के पहले बनकर तैयार हो जाएगा। 650 स्कवायर मीटर में बने सत्संग भवन में मिट्टी, लेवलिंग, टाइल्स, फ्लोरिंग, विंडो, दरवाजे लगाने का कार्य तेजी से चल रहा है। उप्र निर्माण निगम की देखरेख में सत्संग भवन में मंच भी तैयार हो चुका है। एई बीवी निरंजन के मुताबिक सत्संग भवन में लगभग 300 से 350  सत्संगी एक साथ कीर्तन-भजन की गंगा में डुबकी लगा सकेंगे। एक दिसंबर से शुरू हुआ निर्माण कार्य 22 जनवरी के पहले हर हाल में पूर्ण हो जाएगा।

 

2017 के बाद का दशरथ महल

 

  • फसाड लाइटः यह दशरथ भवन की तरफ श्रद्धालुओं को भौतिक रूप से आकर्षित करती है। इसकी शोभा काफी विशिष्ट सज्जा से आभा प्रदान करता है।  

  • उत्कृष्ट साज सज्जाः भवन का जीर्णोद्धार, चूना-सुर्खी से पुताई, चहारदीवारी का सुदृढ़ीकरण, पहले से खड़े स्ट्रक्चर को श्रद्धालुओं की आस्था के अनुरूप सुसज्जित किया गया। यहां श्रीराम के जीवन को चित्रित करते हुए वाल पेंटिंग, रामचरित मानस के दोहे लिखे हैं।

  • सत्संग भवनः यहां 80 फीसदी से अधिक काम हो गए हैं। 22 जनवरी तक यह पूर्ण हो जाएगा। इसके बाद यहां भजनानंदी कीर्तन-सत्संग कर श्रीराम के चरणों में अपनी श्रद्धा निवेदित कर सकेंगे। 

  • प्रवेश द्वारः पुराने वैभव को संरक्षित करते हुए आधुनिकता का समावेश किया गया है। लंबे समयावधि तक टिकाऊ रहने वाले पेंट-कोटिंग की परत चढ़ाने का कार्य चल रहा है।

  • रैन बसेराः रैन बसेरा यहां बनकर तैयार है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को इसका लाभ मिल रहा है।

  • यात्री सहायता केंद्रः यहां आने वाले श्रद्धालुओं को यहां की समृद्ध विरासत, ऐतिहासिक महत्व, सांस्कृतिक योगदान व आध्यात्मिक महत्व के बारे में अवगत कराता है।

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