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श्री रामजन्म तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय ने राममंदिर जमीन सौदा मामले में सच रखा सामने



अयोध्या में चल रहे राम मंदिर निर्माण कार्य के लिए खरीदी जा रही जमीनों के मामले में उस समय तूल पकड़ लिया जब 18 मार्च 2021 की एक रजिस्ट्री सुर्खियों में आ गई। दरअसल राम जन्म भूमि न्यास ट्रस्ट की तरफ से एक जमीन खरीदी गई जिसके लिए ट्रस्ट की तरफ से करीब 18 करोड़ रुपए चुकाए गए। बताया जा रहा है कि इस ट्रस्ट ने जब रजिस्ट्री कराई उससे पांच मिनट पहले इसी जमीन की 2 करोड़ रुपए में एक और रजिस्ट्री कराई गई थी।


इसके बाद सियासी भूचाल आ गया। अब श्रीराम जन्म भूमि न्यास ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय की तरफ से मामले का सही पक्ष मीडिया के जरिए देश-दुनिया के सामने रखा गया है। स्टेट टुडे टीवी ज्यों का त्यों ये वकतव्य आपके सामने रख रहा है ताकि किसी प्रकार के शक की कोई गुंजाइश ना रहे।


प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार श्री रामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय के मुताबिक


श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का परकोटा और रिटेनिंग दीवार को वास्तु के अनुसार सुधारने के लिए, मंदिर परिसर के पूर्व और पश्चिम दिशा में यात्रियों के आवागमन मार्ग को सुलभ बनाने के लिए खुला मैदान रखने के लिए, साथ ही साथ मंदिर परिसर की सुरक्षा के लिए पास-पड़़ोस के कुछ छोटे-बडे मंदिर, ग्रहस्थों के मकान खरीदना अत्यावश्यक है। जिनसे खरीदा जायेगा उनके पुनर्वास के लिए उन्हें कहीं अन्यत्र भूमि भी दी जायेगी, इस कार्य के लिए भी भूमि की खरीददारी की जा रही है।



क्रय और विक्रय का यह कार्य आपस के संवाद और परस्पर पूर्व सहमति के आधार पर किया जा रहा है। सहमति के पश्चात् सहमति पत्र पर हस्ताक्षर होते हैं।


सभी प्रकार की कोर्ट फीस व स्टैम्प पेपर की खरीदारी आन-लाइन की जा रही है। सहमति पत्र के आधार पर भूमि की खरीददारी हो रही है। उसी के अनुसार संपूर्ण मूल्य विक्रेता के खाते में आन-लाइन स्थानान्तरित किया जाता है।


9 नवम्बर, 2019 को श्रीराम जन्मभूमि पर सर्वोच्च न्यायालय का र्निणय आने के पश्चात् अयोध्या में भूमि खरीदने के लिए देश के असंख्य लोग आने लगे, उत्तर प्रदेश सरकार अयोध्या के सर्वांगीण विकास के लिए बडी मात्रा में भूमि खरीद रही है, इस कारण अयोध्या में एकाएक जमीनों के दाम बढ़ गये। जिस भूखंड पर अखबारी चर्चा चलाई जा रही है वह भूखंड रेलवे स्टेशन के पास बहुत प्रमुख स्थान है।


श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने अभी तक जितनी भूमि क्रय की है वह खुले बाजार की कीमत से बहुत कम मूल्य पर खरीदी है।


उक्त भूमि को खरीदने के लिए वर्तमान विक्रेतागणों ने वर्षां पूर्व जिस मूल्य पर रजिस्टर्ड अनुबन्ध किया था, उस भूमि को उन्होंने 18 मार्च 2021 को बैनामा कराया तत्पश्चात् ट्रस्ट के साथ अनुबन्ध किया।

जो कतिपय राजनीतिक लोग इस संबंध में प्रचार करा रहे है वह भ्रामक है, समाज को गुमराह करने के लिए है, संबंधित व्यक्ति राजनीतिक है।

अतः राजनीतिक विद्वेष से प्रेरित हैं।


क्या है पूरा मामला


रविवार 13 जून 2021 को समाजवादी पार्टी के नेता पवन पांडेय ने अयोध्या में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि जिस दिन ज़मीन का बैनामा दो करोड़ रुपये में हुआ उसी दिन उस ज़मीन का एग्रीमेंट 18.5 करोड़ रुपये में हुआ। पवन पांडेय का कहना था, "18 मार्च 2021 को क़रीब 10 मिनट पहले बैनामा भी हुआ और फिर एग्रीमेंट भी। जिस ज़मीन को दो करोड़ रुपये में ख़रीदा गया उसी ज़मीन का 10 मिनट बाद साढ़े 18 करोड़ में एग्रीमेंट क्यों हुआ? एग्रीमेंट और बैनामा दोनों में ही ट्रस्टी अनिल मिश्र और मेयर ऋषिकेष उपाध्याय गवाह हैं।



उन्होंने यह भी दावा किया कि ज़मीन खरीदने का सारा खेल मेयर और ट्रस्टी को मालूम था। पवन पांडेय ने इस पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है।


पवन पांडेय ने अयोध्या में मीडिया के सामने रजिस्ट्री के दस्तावेज़ पेश करते हुए कहा, "राम जन्मभूमि की ज़मीन से लगी एक ज़मीन पुजारी हरीश पाठक और उनकी पत्नी ने 18 मार्च की शाम सुल्तान अंसारी और रवि मोहन को दो करोड़ रुपये में बेची थी। वही ज़मीन कुछ मिनट बाद चंपत राय ने राम जन्मभूमि ट्रस्ट की तरफ़ से 18.5 करोड़ रुपये में ख़रीद ली। मैं भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहा हूं।


दूसरे राजनीतिक दल भी उतरे मैदान में


आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके राम मंदिर के नाम पर ख़रीदी जा रही ज़मीन के मामले में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं।

कांग्रेस पार्टी के विधायक दीपक सिंह ने भी राम मंदिर के लिए ख़रीदी गई ज़मीन में भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए सीबीआई जांच की मांग की है।


टीम स्टेट टुडे


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