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बाटला हाउस एनकाउंटर: क्या एक बार फिर रोएंगी सोनिया गांधी और रुमाल निकालेंगे सलमान खुर्शीद!



अदालत का फैसला


देश की राजधानी दिल्ली के बाटला हाउस एनकाउंटर से जुड़े एक केस में दिल्‍ली की साकेत कोर्ट ने इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी आरिज खान को दोषी करार दिया। आरिज खान को दिल्ली पुलिस इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा की हत्या का दोषी करार दिया। अदालत ने कहा कि यह साबित हो गया है कि एनकाउंटर के वक्‍त खान भागने में कामयाब हो गया था। आरिज खान को कितनी सजा होगी, अदालत इसकी घोषणा 15 मार्च को करेगी।


किन धाराओं में दोषी साबित हुआ आरिज


आरिज खान को दिल्ली पुलिस ने 2018 में गिरफ्तार किया था। अदालत ने आरिज खान को आर्म्स एक्ट और भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 307 के तहत दोषी करार दिया है। 2008 में हुए बाटला हाउस एनकाउंटर केस के बाद से ही आरिज फरार था और 2018 में नेपाल से गिरफ्तार किया गया।


इसी मामले में 2013 में शहजाद अहमद को सज़ा हो चुकी है, जबकि दोनों बटला हाउस एनकाउंटर के बीच भाग गए थे। इसके साथ इनके 3 साथी आतिफ आमीन, मोहम्मद सैफ और मोहम्मद साजिद मारे गए थे। इस दौरान दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर मोहनचंद शर्मा शहीद हो गए थे और 2 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।



धमाकों पर धमाके किए हैं आतंकी आरिज़ ने


आरिज़ खान दरअसल, 2008 में दिल्ली, जयपुर, अहमदाबाद और यूपी की अदालतों में हुए धमाकों का मुख्य साज़िशकर्ता था। इन धमाकों में कुल 165 लोग मारे गए थे और 535 लोग घायल हो गए थे।


आतंकी आरिज खान को बाटला हाउस एनकाउंटर में जान गंवाने वाले इंस्पेक्टर मोहन शर्मा की हत्या के लिए दोषी बनाया गया है। वहीं पुलिसकर्मी बलवंत सिंह-राजवीर को जान से मारने की कोशिश भी आरिज ने की थी।


बख्शा नहीं जाएगा परिवार


अदालत ने आरिज को दोषी करार देते हुए जांच अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वो आरिज के परिवार की आर्थिक स्थिति के बारे में जानकारी लेकर अदालत को बताएं। इसी के बाद कोर्ट यह तय करेगी कि उसके परिवार से कितनी राशि वसूल की जा सकती है।


कौन है आतंकी आरिज खान


आरिज खान ऊर्फ जुनैद बम बनाने में एक्सपर्ट होने के साथ ही बम प्लांट कर उसे उड़ाने में एक्सपर्ट है।
वह इंडियन मुजाहिदीन आतंकी संगठन का दहशतगर्द है।
2018 में गिरफ्तार से पहले वह मोस्ट वांटेड अपराधी था।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उसे 2018 में भारत-नेपाल बॉर्डर से गिरफ्तार किया था।
आरिज के इंडियन मुजाहिदीन और सिमी को पुनर्जीवित करने के इरादे थे।
जुनैद 2007 के यूपी ब्लास्ट, 2008 के जयपुर सीरीयल ब्लास्ट, 2008 के अहमदाबाद ब्लास्ट का भी आरोपी है और बाटला हाउस एनकाउंटर के बाद से फरार था।
बाटला हाउस एनकाउंटर के एक महीने बाद आरिज कुछ समय के लिए भारत में था।
बाटला हाउस एनकाउंटर 19 सितंबर 2008 में हुआ था जिसमें दो संदिग्ध आतंकी मारे गए थे और दो संदिग्ध गिरफ्तार किए गए थे।
पीटीआई एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार बाटला हाउस एनकाउंट के दौरान आरिज बाटला हाउस में चार अन्य आतंकियों के साथ था।



आरिज खान पर था 15 लाख रुपये का इनाम


इतने सारे गंभीर आरोपों में आरिज खान का सुराग देने पर दिल्ली पुलिस ने तब इस पर 15 लाख रुपये का इनाम था। इतना ही नहीं, आरिज के खिलाफ इंटरपोल के जरिये रेड कॉर्नर नोटिस निकला हुआ था।



आजमगढ़ का रहने वाला है आरिज खान


दिल्ली पुलिस के मुताबिक, आरिज खान उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ का रहने वाला है। आरिज़ खान उर्फ जुनैद को स्पेशल सेल की टीम ने फरवरी 2018 में गिरफ्तार किया। इसके पकड़े जाने से इंडियन मुजाहिदीन को दोबारा खड़ा करने के मंसूबे ध्वस्त हो गए थे।


देश विरोध गतिविधियों के तैयार कर रहे थे युवाओं को


दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल को पता चला था कि प्रतिबंधित संगठन सिमी और इंडियन मुजाहिदीन के लोग नेपाल से युवाओं को देश मे अवैध गतिविधियों के लिए तैयार कर रहे हैं। इसके बाद सिमी से जुड़े अब्दुल सुहान उर्फ तौकीर को जनवरी 2018 में गिरफ्तार किया गया। तौकीर ने आरिज़ खान के बारे में कई अहम जानकारियां दीं थीं। इसी जानकारी के बाद पता चला कि आरिज़ खान 13 फरवरी 2018 को भारत नेपाल सीमा के बनबसा बॉर्डर से अपने किसी साथी से मिलने यूपी आने वाला है, इसी सूचना पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।



बीटेक की पढ़ाई की है आरिज ने


आतंकी आरिज़ ने मुजफ्फरनगर के एसडी कॉलेज से बी टेक की पढ़ाई की है। आरिज़ बम बनाने में माहिर था। यूपी के आजमगढ़ में जन्में जुनैद ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के दौरान जिहाद से जुड़ने का फैसला लिया और पढ़ाई छोड़ दी। जिस समय जिहाद के लिए आतंकी संगठन को ज्वाइन करने का फैसला लिया, तब जुनैद यूपी के अन्य जिले मुजफ्फरनगर में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था।


आतंकियों गतिविधियों में संलिप्तता के चलते यूपी पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर इनामी राशि 1 लाख से बढ़ाकर 5 लाख कर दी थी। तब वह महज 23 साल का था।


कई सालों तक नेपाल में रहा था आरिज


धमाकों के बाद आरिज़ नेपाल भाग गया गया और वहां की नागरिकता हासिल कर सलीम नाम से रह रहा था ,उसने इसी नाम से पासपोर्ट बनवाया हुआ था। उसने नेपाल में एक रेस्तरां भी खोला था और वहां पढ़ाता भी था। नेपाल में आरिज 2014 तक रहा। इस दौरान वह रियाज़ भटकल के संपर्क में आया। रियाज़ ने ही उसे इंडियन मुजाहिदीन को दोबारा खड़ा करने के लिए सऊदी अरब बुलाया था। इसके लिए वह 2014 में सऊदी अरब भी गया और वहां एक मजदूर बनकर सिमी और आइएम के लोगों से मिलता रहा। इसके बाद 2017 में वह सऊदी अरब से वापस लौटा। फिर वो भारत में इंडियन मुजाहिदीन को खड़ा करने के लिए नेपाल से गतिविधियां चला रहा था और 2018 में इसी सिलसिले में भारत आते वक्त पकड़ा गया। आरिज़ को जिहाद के लिए आतिफ अमीन ने प्रेरित किया,आतिफ अमीन बटला हाउस एनकाउंटर में 2 साथियों मोहम्मद साजिद और मोहम्मद सैफ के साथ मारा गया था जबकि शहजाद अहमद और आरिज़ खान भागने में कामयाब रहे थे।


बाटला हाउस में एनकाउंटर पर रोईं थीं सोनिया गांधी


आपको याद दिला दें कि ये वही आतंकी आरिज है जिसके लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की आंखों में आंसू आ गए थे। ये हम नहीं कह रहे , उस समय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा था कि बाटला हाउस की तस्वीरें देख सोनिया गांधी की आंखों में आंसू आ गए थे। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी समेत कई दलों के नेता भाग भाग कर आजमगढ़ गए थे।


मामला सिर्फ इतना भर नहीं है तत्कालीन कांग्रेस और यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बाटला हाउस एनकाउंटर पर ना सिर्फ आंसू बहाए थे बल्कि देश के गृहमंत्री रहे पी. चिदंबरम ने दिल्ली पुलिस अधिकारी की शहादत पर सवाल उठाया था।



दिग्विजय सिंह ने एनकाउंटर को बताया था फर्जी


वर्ष 2008 में हुए बटला हाउस एनकाउंटर केस में कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने यह कहकर हलचल मचा दी थी कि 'एनकाउंटर फर्जी है'। इतना ही नहीं, काफी हो-हल्ला मचने के बाद भी दिग्विजय अपनी बात पर अड़े रहे और कहा था कि 'बटला हाउस एनकाउंटर फर्जी है। मैं बीजेपी को इसकी न्यायिक जांच की चुनौती देता हूं। मैं अपने बयान पर अडिग हूं। मैं नहीं जानता कि बाबा साजिद या छोटा साजिद कौन है।


क्या है बाटला हाउस एनकाउंटर


दिल्ली के जामिया नगर के बाटला हाउस इलाके में 19 सितंबर, 2008 को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और एक घर में रुके इंडियन मुजाहिदीन (आइएम) के आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई थी।


इस मुठभेड़ में आइएम के तीन आतंकी आतिफ अमीन और मोहम्मद साजिद मारे गए थे, जबकि मोहम्मद सैफ मौके से पकड़ा गया था। इस मुठभेड़ के बीच दो अन्य आतंकी शहजाद अहमद और आरिज खान पुलिस पर फायरिंग करते हुए फरार हो गए थे। इस एनकाउंटर में दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर मोहनचंद शर्मा शहीद हुए थे और दो अन्य पुलिसकर्मी घायल हुए थे। इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा की हत्या के मामले में शहजाद अहमद को वर्ष 2013 में सजा हो चुकी है। एनकाउंटर के दस साल बाद फरवरी, 2018 में स्पेशल सेल की टीम ने आरिज खान को नेपाल और भारत की सीमा से गिरफ्तार किया था।


देर है पर अंधेर नहीं ये कहावत एक बार फिर आतंकी आरिज के गुनाहों बेपर्दा होने से सिद्ध हुई है। इस पूरे घटनाक्रम से ये भी सिद्ध हुआ है कि पढ़ा लिखा मुसलमान भी ना सिर्फ भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल होता है बल्कि अपने ज्ञान का इस्तेमाल भारत के खिलाफ ही करता है। सबसे बड़ा सवाल उत्तर प्रदेश के उस आजमगढ़ जिले का भी है जहां का आरिज और उसके साथी रहने वाले हैं। आजमगढ़ जिला कई कट्टरपंथियों, जेहादियों और आतंकियों की ना सिर्फ जन्मस्थली है बल्कि आज भी यहां बहुत कुछ ऐसा हो रहा है जिस पर खुफिया एजेंसियों को निगाह रखने की जरुरत है।


टीम स्टेट टुडे


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