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भाजपा संसदीय बोर्ड में सुषमा स्वसराज की जगह सुधा यादव को किया गया शामिल


नई दिल्ली, 17 अगस्त 2022 : भाजपा के संसदीय बोर्ड में बड़ा बदलाव किया गया है। इसमें जहां नितिन गडकरी और शिवराज सिंह चौहान को हटाया गया है, वहीं 6 नए सदस्‍यों को शामिल किया गया है। इसमें कर्नाटक के पूर्व मुख्‍यमंत्री बीएस येदियुरप्पा, अल्‍पसंख्‍यक आयोग के अध्‍यक्ष इकबाल सिंह लालपुरा, केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, के. लक्ष्मण, सुधा यादव और बीएल संतोष (सचिव) को नए सदस्‍यों के रूप में शामिल किया गया है। भाजपा ने दावा किया कि उसका पुनर्गठित संसदीय बोर्ड संगठनात्मक ताकत दिखाता है और विविधता पर जोर देता है।

पहले चुनाव लड़ने से किया था मना

पूर्व विदेश मंत्री और भाजपा की कद्दावर नेता सुषमा स्‍वराज की जगह हरियाणा से सुधा यादव को पार्टी ने संसदीय बोर्ड में जगह दी है। सुधा यादव हरियाणा के रेवाड़ी की रहने वाली हैं। वर्तमान में वह भाजपा की राष्ट्रीय सचिव हैं। सुधा यादव के पति सुखबीर सिंह यादव सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के डिप्टी कमांडेंट थे। कारगिल युद्ध में सीमा पर लड़ते हुए उन्होंने सर्वोच्च बलिदान दिया था। वह पूर्व में 1999 से 2004 तक 13 वीं लोकसभा की हरियाणा के महेंद्रगढ़ सीट से सदस्य भी रह चुकी हैं। उन्‍होंने उस समय के कांग्रेस के नेता राव इंद्रजीत के मुकाबले चुनाव लड़ा था। पहले सुधा यादव ने महेंद्रगढ़ से चुनाव लड़ने से मना कर दिया था।

नरेंद्र मोदी के आग्रह पर चुनाव लड़ने के लिए हुईं थीं तैयार

1999 में नरेंद्र मोदी हरियाणा के प्रभारी थे। वह नरेंद्र मोदी के कहने के चुनाव लड़ने के लिए तैयार हुईं थीं। उन्होंने सुधा से कहा था कि आपकी जितनी जरूरत आपके परिवार को है, उतनी ही जरूरत इस देश को भी है। सुधा बताती हैं कि पति के बलिदान के बाद उनके लिए वो समय काफी कठिन था। ऐसे में वह चुनाव लड़ने के बारे में सोच भी नहीं सकती थीं। उस दौरान नरेंद्र मोदी से बातचीत ने उनमें ऊर्जा भर दी और वह चुनाव लड़ने के लिए तैयार हुईं। नरेंद्र मोदी ने अपनी मां से मिले आशीर्वाद के 11 रुपये सुधा यादव को दिए थे। उस समय गुरुग्राम में हुए कार्यकर्ता सम्‍मलेन में नरेंद्र मोदी ऊर्जावान भाषण दिया था।

भाजपा ओबीसी मोर्चा का प्रभारी रहीं सुधा

हालांकि, 2004 में सुधा यादव को महेंद्रगढ़ सीट से हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने अगला चुनाव 2009 में गुड़गांव लोकसभा सीट से लड़ा था, मगर यहां भी कामयाबी नहीं मिली। 2015 में सुधा यादव को भाजपा ओबीसी मोर्चा का प्रभारी नियुक्त किया गया था। सुधा यादव पेशे से प्रवक्ता हैं। सुधा यादव ने 1987 में रुड़की विश्वविद्यालय से स्नातक किया, जिसे अब आईआईटी रुड़की नाम से जाना जाता है।

महिलाओं और सशस्त्र बलों के प्रति पार्टी का सम्‍मान

भाजपा ने उनके बारे में कहा है कि सुधा यादव एक खुद से बनी हुईं राजनीतिक नेता हैं, जिनके पति कारगिल में शहीद हो गए थे। उनको संसदीय बोर्ड में शामिल किया जाना महिलाओं और सशस्त्र बलों के कर्मियों के परिवारों के प्रति पार्टी के अत्यधिक सम्मान दर्शाता है।

यह है भाजपा का नया संसदीय बोर्ड

संसदीय बोर्ड में जेपी नड्डा (अध्यक्ष), पीएम नरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह, अमित शाह, बीएस येदयुरप्पा, सर्बानंद सोनोवाल, के लक्ष्मण, इकबाल सिंह लालपुरा, सुधा यादव, सत्यनारायण जटिया, बीएल संतोष (सचिव) को शामिल किया गया है।

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