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निकाय चुनाव के जरिए कानपुर में फिर खड़े होने के प्रयास में कांग्रेस


कानपुर, 9 जुलाई 2022 : प्रदेश में अर्से से अपने अस्तित्व को लेकर जूझ रही कांग्रेस जिले में भी शून्य के आसपास है। कई प्रयोगों के बावजूद बीते लोकसभा और विधानसभा चुनाव में कुछ खास हाथ नहीं लगा है। कानपुर नगर निगम में दूसरे नंबर की पार्टी रही कांग्रेस अब निकाय चुनाव के भरोसे संगठन मजबूत कर फिर से खड़े होने के प्रयास में है। निकाय चुनाव को 'हथियार' बनाकर सियासी बिसात पर दांव चलने को कदम बढ़ा चुकी है। इसके लिए नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत में पार्षद-सभासद का चुनाव लड़ने के इच्छुक कार्यकर्ताओं से उनके वार्ड के 320 समर्थकों के नाम और मोबाइल फोन नंबरों की सूची के साथ फार्म भरवाये जा रहे हैं। इन नंबरों पर बातचीत करके नेतृत्व पता लगाएगा कि आवेदक के नाम पर वह सहमत हैं या फर्जी तरीके से उन्हें सूची में शामिल कर दिया गया है। वार्ड के मोर्चे पर सक्रियता दिखाने वालों को इसके बाद संगठन से जोड़ा जाएगा।

वर्ष 2000 में अनिल शर्मा के कांग्रेस के महापौर चुने के बाद से उसकी झोली खाली है। इससे पहले पार्षदों के माध्यम से महापौर चुने जाने के दौर में श्रीप्रकाश जायसवाल, सरदार महेंद्र सिंह महापौर चुने जा चुके हैं। वर्ष 2006 के बाद से लगातार भाजपा के रवींद्र पाटनी, जगतवीर सिंह द्रोण और अब प्रमिला पांडेय महापौर की कुर्सी पर हैं। कांग्रेस नेतृत्व इसबार निकाय चुनाव में कोई कसर छोड़ने के मूड में नहीं है। पिछले दिनों लखनऊ में हुई बैठक में पार्टी पदाधिकारियों से कहा गया है कि निकाय चुनाव मजबूती से लड़ना है। इससे 2024 के लोकसभा चुनाव में कानपुर और अकबरपुर सीटों के लिए भी रोडमैप तैयार होगा। दोनों लोकसभा क्षेत्रों की 10 विधानसभा सीटों पर वर्तमान में कांग्रेस का एक भी विधायक नहीं है।

निकाय चुनाव में यहां निशाना

02 नगर पालिका क्षेत्र घाटमपुर और बिल्हौर।

02 नगर पंचायत क्षेत्र बिठूर व शिवराजपुर।

110 वार्ड कानपुर नगर निगम में हैं अभी।

13 वार्ड महाराजपुर और 17 वार्ड कल्याणपुर विधानसभा क्षेत्र में हैं।

34 वार्ड गोविंदनगर व किदवईनगर विधानसभा सीट में।

46 वार्ड छावनी, आर्यनगर और सीसामऊ सीटों में हैं।

नेतृत्व से कार्यकर्ताओं का संवाद नहीं होने से लगातार पार्टी कमजोर हो रही है। सत्ता के लालच में दलबदल करने वालों को मौके मिल रहे। मुझ जैसे जमीनी व्यक्ति को 32 साल से कोई जिम्मा न सौंपना ही इसकी बानगी है। -भूधर नारायण मिश्रा, पूर्व विधायक एवं सदस्य, प्रदेश कांग्रेस कमेटी।


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