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ओहो! तो जितिन प्रसाद इसलिए आए बीजेपी में...




जितिन प्रसाद ने बीजेपी का दामन थाम लिया। जितिन प्रसाद ने पीयूष गोयल की मौजूदगी में भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन की।


राजनीतिक रुप से कांग्रेस में रहते हुए उनका कद जितना बड़ा रहा वर्तमान में उपलब्धि और उपयोगिता बेहद कम नजर आ रही थी। कांग्रेस जितिन का इस्तेमाल ब्राह्मण चेहरे के तौर पर करती रही। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव और 2017 के विधानसभा चुनाव की हार के बाद कांग्रेस ने जितिन को हाशिये पर ढकेल दिया।


कांग्रेस के बड़े ब्राह्मण चेहरों में से एक जितिन प्रसाद पिछले कई दिनों से पार्टी हाईकमान से नाराज थे। वह यूपी कांग्रेस के कुछ नेताओं से अपनी नाराजगी जाहिर भी कर चुके थे, लेकिन फायदा नहीं हुआ।



क्या कहा बीजेपी में शामिल होते समय जितिन ने


भाजपा में शामिल होने के बाद जितिन प्रसाद ने कहा, ' मेरा कांग्रेस पार्टी से 3 पीढ़ियों का साथ रहा है। मैंने ये महत्वपूर्ण निर्णय बहुत सोच, विचार और मंथन के बाद लिया है। आज सवाल ये नहीं है कि मैं किस पार्टी को छोड़कर आ रहा हूं, बल्कि सवाल ये है कि मैं किस पार्टी में जा रहा हूं और क्यों जा रहा हूं। पिछले 8-10 वर्षों में मैंने महसूस किया है कि अगर कोई एक पार्टी है जो वास्तव में राष्ट्रीय है, तो वह भाजपा है। अन्य दल क्षेत्रीय हैं, लेकिन यह राष्ट्रीय दल है, आज देश जिस स्थिति से गुजर रहा है, अगर कोई राजनीतिक दल या नेता देश के हित के लिए खड़ा है, तो वह भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं।'



क्यों छोड़ी कांग्रेस


उत्‍तर प्रदेश कांग्रेस में जब से प्रियंका गांधी की एंट्री हुई है, तब से जितिन प्रसाद की अहमियत पार्टी की नजरों कम होती नजर आने लगी। प्रियंका के आने के बाद यूपी प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार उर्फ लल्लू बनाए गए। कई अहम समितियों में भी जितिन प्रसाद का नाम नदारद रहा। इसके बाद जितिन प्रसाद को पश्चिम बंगाल का चुनाव प्रभारी बना दिया था। जितिन प्रसाद के लिए ये संकेत काफी था। उन्‍हें उत्‍तर प्रदेश की राजनीति से दूर करने का प्रयास किया जा रहा था। जितिन कांग्रेस में राहुल गांधी के बेहद करीबियों में गिने जाते रहे हैं।


जितिन कांग्रेस के असंतुष्ट समूह "जी-23" का हिस्‍सा भी थे, जिसने पार्टी में व्यापक सुधार के लिए सोनिया गांधी को पत्र लिखा था। इस पत्र में जी-23 समूह ने कांग्रेस में पूर्णकालिक नेतृत्‍व की आवाज उठाई थी। हालांकि 'असंतोष' जताने के बाद उन्‍हें पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के प्रचार अभियान से जोड़ा गया था, लेकिन इन चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद खराब रहा। कांग्रेस को बंगाल चुनाव में एक भी सीट नहीं मिली।


2019 के लोकसभा चुनाव से पहले ही ऐसी अटकलें जोरों पर थीं कि जितिन प्रसाद भाजपा में जा सकते हैं। माना जाता है कि कांग्रेस हाई कमान के त्वरित हस्तक्षेप के कारण जितिन प्रसाद ने अपना फैसला तब वापस ले लिया था।



भाजपा को जितिन प्रसाद की जरूरत क्यों


उत्तर प्रदेश में 14 फीसदी आबादी वाले वोटर ब्राह्मण भाजपा से नाराज हैं। योगी आदित्यनाथ सरकार के कई फैसलों से उत्तर प्रदेश के ब्राह्मणों की भाजपा से नाराजगी बनी हुई है और इस विधानसभा चुनाव में पार्टी से अलग वोट कर सकते हैं। भाजपा अपने इस कोर वोट बैंक को किसी भी हालत में संभालना चाहती है। इधर, कांग्रेस में रहते हुए जितिन प्रसाद ब्राह्मण चेतना मंच नाम से एक संगठन बनाकर ब्राह्मणों की राजनीति करते रहे हैं। वे उत्तर प्रदेश के बड़े ब्राह्मण चेहरे भले न हों, लेकिन शाहजहांपुर, ललितपुर और आसपास के इलाके में उनका आंशिक प्रभाव है और वे वहां भाजपा को लाभ पहुंचा सकते हैं। यही कारण है कि ब्राह्मणों की नाराजगी को कम करने के लिए भाजपा उन्हें अपने साथ लाना चाहती है।


क्या बोले ज्योतिरादित्य सिंधिया


जितिन प्रसाद के कांग्रेस से भाजपा में शामिल होने पर भाजपा के राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि वो मेरे छोटे भाई की तरह है। भाजपा में जितिन प्रसाद का तहे दिल से, आत्मा की गहराइयों से स्वागत करता हूं। मुझे विश्वास है कि आने वाले समय में ये भारतीय जनता पार्टी को आगे करने में पूरा योगदान करेंगे।



जितिन प्रसाद की राजनीतिक यात्रा


जितिन प्रसाद 2001 में भारतीय युवा कांग्रेस में सचिव बने। 2004 में अपने गृह लोकसभा सीट, शाहजहांपुर से 14वीं लोकसभा चुनाव में किस्मत आजमायी और जीते। पहली बार जितिन प्रसाद को 2008 में केन्द्रीय राज्य इस्पात मंत्री नियुक्त किया गया। उसके बाद सन् 2009 में जितिन प्रसाद 15 वीं लोकसभा चुनाव लोकसभा धौरहरा से लड़े और 184,509 वोटों से विजयी भी हुए। जितिन प्रसाद 2009 से जनवरी 2011 तक सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, 19 जनवरी 2011 से 28 अक्टूबर 2012 तक पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और 28 अक्टूबर 2012 से मई 2014 तक मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय, यूपीए सरकार में केन्द्रीय राज्यमंत्री रहें हैं। जितिन प्रसाद शाहजहांपुर, लखीमपुर और सीतापुर में काफी लोकप्रिय नेता हैं। जितिन प्रसाद को उत्तर प्रदेश में शांतिप्रिय व विकासवादी राजनीती के लिए जाना जाता है।


तो इसलिए आए जितिन बीजेपी में..


जितिन प्रसाद को भाजपा में आने के बदले में क्या मिलने की डील हुई है, अभी तो यह साफ नहीं है। इसके पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया को भाजपा में लाकर पार्टी उन्हें राज्यसभा भेज चुकी है। जितिन प्रसाद को भी राज्यसभा भेजे जाने की संभावना बन सकती है। एक संभावना यह भी जताई जा रही है कि उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार में महत्वपूर्ण जगह देकर चुनाव में उतारा जाए, जिससे वे अगले विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए अहम साबित हों। इसमें दोराय नहीं है कि मौजूदा समय में कांग्रेस के भीतर जितिन प्रसाद राजनीतिक लिहाज से हाशिए पर थे और जितनी जरुरत बीजेपी को उनकी नहीं है उससे कहीं ज्यादा जरुरत जितिन को पोलिटिकल हाईड-आउट की थी।


टीम स्टेट टुडे


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