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डिप्रेशन से डरें नहीं - सही सलाह से जीत पक्की



साईयूनी ट्रस्ट और हौसला फाउंडेशन ने लखनऊ यूनिवर्सिटी के जेके हाल में "बीट द ब्लूज़-डिप्रेशन अवेयरनेस" सेमिनार का आयोजन किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं के अलावा डॉक्टरों और मरीजों ने हिस्सा लिया।


नशे से बढ़ता है डिप्रेशन




मनोचिकित्सक डॉ शाश्वत सक्सेना ने बताया कि डिप्रेशन से परेशान होने की कोई जरूरत नहीं यह कुछ वक्त के लिए होती है इसका इलाज मेडिकल साइंस में संभव है तो इसलिए आत्महत्या जैसा कदम ना उठाएं और इसका प्रॉपर इलाज कराएं। डिप्रेशन या अवसाद से निकलने के लिए जो लोग दवाएं या नशे का सहारा लेते हैं उन्हें कई तरह के रोग घेर लेते हैं।


सही काउंसलिंग से दूर करें डिप्रेशन



मनोवैज्ञानिक डॉ आशुतोष श्रीवास्तव के मुताबिक विशेष प्रकार की काउंसलिंग से अवसाद में सुधार होता है। अवसाद के समय व्यक्ति में जीने की इच्छा खत्म हो जाती है लेकिन अगर उस की काउंसलिंग की जाए और बेहतर इलाज किया जाए तो व्यक्ति 6 महीने के भीतर ही और अवसाद से बाहर आ जाता है।


योग से अवसाद का अंत



अवसाद से परेशान होने की जरूरत नहीं है इसका इलाज चिकित्सा विज्ञान में है अवसाद से ग्रसित मरीज का इलाज 8 महीने के भीतर हो जाता है और व्यक्ति फिर से पहले की तरह अपना जीवन बिता सकता है। नियमित योग करने से अवसाद दूर किया जा सकता है।


कार्यक्रम में डॉ. सुजीत कार, क्लीनिकल साइकोलाजिस्ट स्वाती भागनंदानी सीनियर फिजीशियन डॉ. आरपी सिंह एमडी, योगाचार्य डॉ. यूपी सिंह और डॉ स्मिता सिंह ने हिस्सा लिया और लोगों से खुली चर्चा की। विभिन्न सत्रों में अवसाद की पहचान, अवसाद के कारण, अवसाद का प्रबंधन, अवसाद, अन्य बीमारियों पर अवसाद का प्रभाव, अवसाद पर योग का प्रभाव और कलंक से कैसे लड़ना है, जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।


स्टेट टुडे टीम

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