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ठेकेदार, दुकानदार को सरकारी वकील न बनाएं, अनुभवी वकीलों को कोर्ट में भेजें-HC


प्रयागराज, 14 फरवरी 2023 : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि सरकार ऐसे अधिवक्ताओं को नियुक्त करे जिन्होंने कुछ तो वकालत की हो। जान पहचान वालों, ठेकेदार ,दुकानदार जिसने कभी वकालत नहीं की, को सरकारी वकील नियुक्त करना संस्था व सरकार के हित में नहीं है। कोर्ट ने महाधिवक्ता से कहा कि वह कोर्ट की ओर न देखें, क्राइटेरिया तय कर परीक्षण करें। जिन्होंने बहस की हो , अनुभवी वकीलों का पैनल कोर्ट में भेजें।

'सरकार का सही पक्ष रख सकने वाले वकील ही तैनात करे'

कोर्ट ने कहा सरकार किसे नियुक्त करें , इससे कोर्ट का सरोकार नहीं है। वह कुछ लोगों को वजीफा देना चाहती है तो दे किंतु कोर्ट में सरकार का सही पक्ष रख सकने वाले वकील ही तैनात करे। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति सुनीत कुमार तथा न्यायमूर्ति राजेन्द्र कुमार की खंडपीठ ने राजेश्वर सिंह की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है।

महाधिवक्ता अजय कुमार मिश्र ने कोर्ट को बताया कि सरकार राज्य विधि अधिकारियों के पैनल सूची का पुनर्विलोकन कर रही है, प्रक्रिया जारी है। उन्होंने इसके लिए छह हफ्ते का समय मांगा। यह भी बताया कि कोर्ट इसी मामले में जनहित याचिका की सुनवाई कर रही है। अधिवक्ता पैनल के लिए सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के दिशानिर्देश है,जिस पर अमल किया गया है। उठे कुछ सवालों की समीक्षा की जा रही है।

प्रैक्टिस करने वाले वकीलों की ही नियुक्ति की जाए

कोर्ट ने महाधिवक्ता को राज्य विधि अधिकारियों के पैनल बनाने की क्राइटेरिया की जानकारी के लिए बुलाया था। कोर्ट ने कहा नियुक्ति में पारदर्शिता हो और कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों की ही नियुक्ति की जाए।ऐसे अधिवक्ताओं को कोर्ट में लगाया जाए जो सरकार का पक्ष सही ढंग से रख सकें।बहस का अनुभव रखने वालों की नियुक्ति ही राज्य व हाई कोर्ट संस्था के हित में है। जिसने कभी कोर्ट में प्रैक्टिस नहीं की। घर में बैठे जान पहचान वाले लोगों को सरकारी वकील बनाना सही नहीं।

कोर्ट ने महाधिवक्ता से कहा वह परीक्षण करें कि क्या बहस करने वाले वकील ही नियुक्त किए गए हैं। सरकार को सलाह दें कि जिसने कभी किसी केस में बहस नहीं किया,उसे न नियुक्त करें। अनुभवी वकीलों की नियुक्ति की जाए।क्राइटेरिया तय कर उचित कार्रवाई की जाए।

कोर्ट ने कहा डिजिटल जमाना है। वकीलों के केस की जानकारी हासिल की जा सकती है।या वह सभी वकीलों से बहस किए हुए केसों की सूची मांग सकते हैं। कोर्ट ने महाधिवक्ता से अगली सुनवाई की तिथि 23 मार्च तक कृत कार्रवाई की जानकारी मांगी है।

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