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“जनता कर्फ्यू” - ये हम हैं, ये कोरोना है और ये अस्पताल फुल हो रहे हैं



जनता कर्फ्यू। देश-दुनिया के लिए एक ऐसा शब्द जिसने आत्मसंयम, नेतृत्व की शक्ति, चुनी हुई सरकार के मायने, संक्रमण काल में एकजुटता और आपात स्थिति में भारतीयों की हस्ती क्यों नहीं मिटती इसे एक झटके में दुनिया को समझा दिया।


22 मार्च 2020। कौन भूल सकता है वो दिन जब देश की चुनी हुई सरकार के चुने हुए प्रधानमंत्री की एक अपील पर पूरे देश की जनता अपनी जगह पर ठहर गई। सिर्फ ठहरी ही नहीं बिना किसी सख्ती या प्रशासनिक आदेश के सिर्फ अपील भर से देश की जनता घरों में रुक गई। सड़के वीरान हो गईं। कारखानों, गाड़ियों और बाजार का शोर थम गया। घड़ी का कांटा बढ़ता रहा। शाम का पांच बजा। अचानक लोग घरों की छत, बालकनी और दरवाजे पर पहुंच गए। बच्चे हो या बड़े बूढ़े हाथ में थाली, घंटा, शंख, मंजीरा का स्वर समवेत हुआ और पूरे पांच मिनट तक आसमान इन ध्वनियों से गुंजायमान रहा।


सिर्फ साल बदल गया है। हालात, बीते साल इसी महीने जो थे वहां से बहुत बेहतर होकर उसी तरफ मुड़ते नजर आ रहे हैं। कोरोना का कहर जिस तरह वर्ष 2020 में दुनिया भर छाया रहा, भारत भी उससे अछूता नहीं रहा। पहले जनता कर्फ्यू, फिर लॉकडाउन का पहला चरण, फिर दूसरा और फिर तीसरा। अनलॉक के दौर में कोरोना से जंग चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ी तो लगा कोरोना का खौफ पीछे छूट जाएगा। साल बदल गया, महीना वही आया है, भूतकाल वर्तमान में डरा रहा है और भविष्य की तरफ खतरनाक इशारे कर रहा है।


22 मार्च 2020, वो दिन था जब पूरे भारत में कोरोना संक्रमण के केवल 396 मामले सामने थे, लगाम लगाने की तैयारी शुरू कर दी थी। सरकार ने पहले जनता कर्फ्यू और बाद में लॉकडाउन का एलान किया था।


पूरी दुनिया में 22 मार्च 2020 तक कोरोना संक्रमण के कुल 311576 मामले सामने आ चुके थे। आज पूरी दुनिया में इसके 123,859,482 मामले सामने हैं। वहीं इसकी वजह से अब तक 2,727,680 मरीजों की मौत भी हो चुकी है। पूरी दुनिया में एक्टिव मामलों की बात करें तो ये 21,347,291 हैं जबकि 99,784,511 मरीज ठीक भी हो चुके हैं।



कोरोना का जिंदा इतिहास वर्तमान और भविष्य के लिए इसलिए भी चुनौती बना हुआ है क्योंकि महामारी का सामना तो दुनिया ने कई बार किया लेकिन पहली बार ऐसा हुआ कि जब किसी वैश्विक महामारी की वैक्‍सीन को वैज्ञानिकों ने एक साल के अंदर तैयार किया और फिर टीकाकरण की शुरुआत भी हो गई।


कोरोना के कहर से जूझती दुनिया के लिए 22 मार्च 2020 का दिन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विकासशील कहे जाने वाले भारत में संक्रमण काल से निपटने की ऐसी रणनीति तैयार कर अमल में लाई कि विकसित देश भी मुंह ताकते रह गए।


22 मार्च 2020 को जनता कर्फ्यू के ऐलान के साथ सवा सौ करोड़ भारतीयों ने पूरे दिन कोरोना से निपटने की एक जुटता दिखाई। और सूर्यास्त से पहले पांच बजे महामारी के खिलाफ युद्ध का बिगुल फूंक दिया। इसके बाद केंद्र सरकार ने फैसले लेने में देर नहीं की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुछ-कुछ देर के लिए नियमित अंतराल पर टेलीवीजन पर आते रहे और देश को संदेश देते रहे। नतीजा ये रहा कि जनता कर्फ्यू के दिन से भारत ने कोरोना पर जिस तैयारी और तेजी के साथ लगाम लगाई, उतना कोई और दूसरा देश नहीं कर पाया।


अमेरिका में आज तक कुल 30,521,765 मामले सामने आ चुके हैं। कोरोना संक्रमित 555,314 मरीजों की मौत अकेले अमेरिका में हुई है। हांलाकि अमेरिका में ही 22,754,252 मरीज ठीक भी हुए हैं। जबकि 22 मार्च 2020 को अमेरिका में कोरोना संक्रमितों की कुल संख्‍या केवल 36050 थी, एक्टिव केस 35252 थे। आज संक्रमण के मामले में अमेरिका विश्‍व का नंबर वन देश है। सिर्फ इतना ही नहीं बीते कई महीनों से वो इसी स्‍थान पर है।



दिसंबर तक कोरोना संक्रमण के मामले में भारत का दूसरे स्‍थान पर था। बाद में लगातार ग्राफ नीचे गया और भारत संक्रमित देशों की लिस्ट में नीचे आ गया। लेकिन हम भारतीय अक्सर संभलने के बाद लापरवाह हो जाते हैं और कहते हैं कि हमें दुनिया की नजर लग गई। ये जानते हुए कि कोरोना की वैक्सीन बनी है, दवा अभी भी नहीं बनी, आम भारतीयों ने कोविड गाइडलाइंस की पोटली गंगा में बहा दी। नतीजा एक बार फिर देश में कोरोना का कहर तेजी से बढ़ा है। कई शहर लॉकडाउन और नाइट कर्फ्यू की चपेट में हैं।


भारत ने कोरोना वायरस की रोकथाम में जो प्रयास किए वो केवल अपने तक ही सीमित नहीं रखे बल्कि पूरी दुनिया को उसका लाभ पहुंचाया। इस महामारी के बीच गुजरे वर्ष 2020 से ही भारत पूरी दुनिया के कई देशों को पीपीई किट ,दवाइयां मुहैया करवा रहा है। अमेरिका और ब्राजील जैसे देशों को भारत ने दवाइयां समेत जरूरी चीजें भेजीं।


केंद्र सरकार के अनुसार भारत ने दुनिया के 76 देशों को करोना वैक्‍सीन की छह करोड़ से अधिक खुराक भेजीं हैं। देश में अब तक वैक्‍सीनेशन के जरिए साढ़े चार करोड़ खुराक लोगों को दी जा चुकी हैं। विश्‍व के विभिन्न देशों के मुकाबले भारत की जनसंख्‍या के हिसाब से टीकाकरण में उसकी रफ्तार सबसे तेज है। मौजूदा समय में भारत कोरोना संक्रमितों की संख्‍या के मामले में विश्‍व में तीसरे पायदान पर है। कोरोना के मामले केवल भारत में ही नहीं पूरी दुनिया में तेजी दिखाई दे रही है। दुनिया के कुछ देशों में इसको देखते हुए पूरा या आंशिक लॉकडाउन तक लगा दिया गया है।


एक वर्ष के दौरान कोरोना वायरस के प्रसार और इसके प्रकार में कई बदलाव दर्ज किए गए हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक इस वायरस में अब तक 8-9 हजार बदलाव हो चुके हैं। जिस वेरिएंट की सबसे अधिक चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है उसमें ब्रिटेन में मिला कोरोना वायरस का वेरिएंट शामिल है। इसके अलावा अलावा दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील में भी इसके अलग अलग वेरिएंट सामने आए हैं। वैज्ञानिकों की राय में ब्रिटेन में मिला वेरिएंट संक्रमण की रफ्तार को तेजी से बढ़ाता है और इसका खतरा भी अधिक है।


सीएम योगी ने टीम 11 के साथ की बैठक


इस बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 22 मार्च को अपने सरकारी आवास पर टीम 11 के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। एक बार फिर तेजी से बढ़ रहे कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बैठक में सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि लोगों को कोरोना वायरस संक्रमण से बचने के लिए लगातार जागरूक करें। इसमें जरा भी कोताही बर्दाश्त नहीं होगी।


सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ बैठक में चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, मुख्य सचिव आरके तिवारी तथा डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी भी थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना के बढ़ते केस देखकर अब सार्वजनिक स्थलों पर सोशल डिस्टेंसिंग तथा मास्क के अनिवार्य उपयोग पर बल दिया जाए। इसके साथ ही सभी रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन और एयरपोर्ट पर स्वास्थ्य विभाग की टीम इंफ्रारेड थर्मामीटर, पल्स ऑक्सीमीटर तथा रैपिड एंटीजन टेस्ट की व्यवस्था करे। उन्होंने कहा कि कोरोना से बचाव के संबंध में लोगों को निरंतर जागरूक किया जाए। हर जगह पर पब्लिक एड्रेस सिस्टम को पूरी तरह सक्रिय रखते हुए इसके माध्यम से आमजन को इसके संक्रमण से बचाव के बारे में जानकारी दी जाए।


देशभर में पिछले साल की तरह ही एक बार फिर से कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के बीच राज्य सरकारें भी सतर्क हैं। ऐसे में देश के विभिन्न राज्यों की सरकारें एक बार फिर से लोगों से कोविड-19 गाइडलाइन का पूरी तरह से पालन करने की अपील कर रही हैं। वहीं, इस बीच कोरोना से निपटने के लिए सरकारें कई जगहों पर नाइट कर्फ्यू तो कहीं पर साप्ताहिक लॉकडाउन तो कही पर पूर्ण लॉकडाउन लगा रही हैं।


टीम स्टेट टुडे


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