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जो बाइडन ऐसे अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति और कमला उपराष्ट्रपति - जानिए पूरा शपथग्रहण



20 जनवरी 2021, अमेरिकी इतिहास में दर्ज होने वाली अहम तारीख है क्योंकि इसी दिन बाइडन अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेंगे। इसे अमेरिका में इनॉगरेशन डे भी कहते हैं। इसके बाद ही वो आधिकारिक रूप से व्हाइट हाउस में अपना कामकाज संभालेंगे।


एक राजनीतिक समारोह में 20 जनवरी को जो बाइडन और उप राष्ट्रपति के तौर पर चुनी गईं कमला हैरिस अपने पद की शपथ लेंगी।


अमेरिका में राष्ट्रपति शपथ ग्रहण समारोह के बारे में आपको विस्तार से बताते हैं –


इनॉगरेशन क्या है?



इनॉगरेशन एक औपचारिक समारोह है. इसके पूरा होते ही राष्ट्रपति के कार्यकाल की शुरुआत हो जाती है। यह समारोह वॉशिंगटन डीसी में होता है। समारोह के एकमात्र ज़रूरी हिस्से के तौर पर राष्ट्रपति अपने पद की शपथ लेते हैं।


इस पद की शपथ लेते हुए वह कहते हैं, "मैं पूरी निष्ठा से यह शपथ लेता हूँ कि अपनी पूरी ईमानदारी से अमेरिका के राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारी निभाऊंगा। मैं अपनी पूरी क्षमता के साथ अमेरिका के संविधान का संरक्षण, सुरक्षा और बचाव करूँगा।"


इन शब्दों को पूरा करते ही जो बाइडन अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति बन जाएँगे। साथ ही इनॉगरेशन भी पूरा हो जाएगा।


कमला हैरिस भी शपथ लेते ही उप राष्ट्रपति बन जाएँगीं। अमूमन नव निर्वाचित उप राष्ट्रपति को नव निर्वाचित राष्ट्रपति से पहले शपथ दिलाई जाती है।


अमेरिकी संविधान के हिसाब से इनॉगरेशन का दिन 20 जनवरी को तय है।


शुरुआती भाषण का समय अमूमन सुबह 11.30 (अमेरिकी समय के हिसाब से) होता है। इसलिए जो बाइडन और कमला हैरिस का शपथ ग्रहण दोपहर बारह बजे के आसपास होगा।


उसी दिन बाद में जो बाइडन व्हाइट हाउस में जाएँगे। अगले चार साल के लिए यही उनका आवास होगा।


शपथ ग्रहण समारोह में सुरक्षा इंतजाम


राष्ट्रपति पद के लिए इनॉगरेशन कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाते हैं। 6 जनवरी के उपद्रवियों के कैपिटल हिल में घुस जाने की घटना को देखते हुए तो और ज़्यादा पुख़्ता इंतजाम हैं। इस दौरान वहाँ नेशनल गार्ड के 10 हजार सैनिक तैनात रहेंगे।


ज़रूरत पड़ने पर अतिरिक्त 5 हज़ार सैनिकों का बैकअप है। डोनाल्ड ट्रंप के इनॉगरेशन में आठ हज़ार सैनिक तैनात थे।


जब बाइडन शपथ लेंगे, तब वाशिंगटन डीसी में इमरजेंसी लगी होगी। हाल में हुए उपद्रव और अराजकता को देखते हुए मेयर म्यूरियल बोअर ने वहाँ इमरजेंसी लगाने के आदेश दिए हैं।


क्या ट्रंप होगें शपथ ग्रहण समारोह में ?


पद छोड़ने वाले राष्ट्रपति के लिए अगले नेतृत्व को शपथ लेते देखना अब रिवाज बन चुका है। हालाँकि ऐसे पूर्व राष्ट्रपतियों के लिए यह थोड़ा असहज होता होगा, लेकिन इस बार कुछ दूसरे तरह की असहजता होगी, क्योंकि पद छोड़ने वाले राष्ट्रपति ट्रंप इसमें नहीं होंगे। ट्रंप ने पिछले दिनों ट्वीट करके कहा था, ''जो लोग यह पूछ रहे हैं, उन्हें मैं बता दूँ कि 20 तारीख़ को इनॉगरेशन में मैं नहीं आऊँगा।"


जब ट्रंप ने शपथ ली थी, तो हिलेरी क्लिंटन अपने पति और पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के साथ इनॉगरेशन के साथ मौजूद थीं। राष्ट्रपति चुनाव में अपनी हार और ट्रंप के साथ एक तीखे चुनावी अभियान के महज दो महीने के बाद वह इस समारोह में मौजूद थीं।


अमेरिका के इतिहास में अब तक सिर्फ़ तीन राष्ट्रपतियों जॉन एडम्स, जॉन क्विंसी और एंड्रयू जॉनसन ने अपने उत्तराधिकारी के इनॉगरेशन से ख़ुद को दूर रखा है। पिछले एक सौ साल में तो किसी राष्ट्रपति ने ऐसा नहीं किया है।


क्या होता अगर कोरोना ना होता -



अगर सामान्य हालात होते, तो शायद वॉशिंगटन में लाखों लोग इनॉगरेशन का जश्न मनाने उमड़ आते। शहर भर जाता। होटलों में जगह नहीं होती। जब 2009 में ओबामा पहली बार राष्ट्रपति बने थे, तो राजधानी में 20 लाख लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा था। इस बार उत्सव इतना बड़ा नहीं होगा। ख़ुद बाइडन की टीम ने कहा कि समारोह सीमित होंगे।


टीम ने कोरोना संक्रमण को देखते हुए लोगों से राजधानी न आने के लिए कहा है। कैपिटल हिल पर हमले के बाद प्रशासन ने लोगों से कई बार यह अपील दोहराई है।


बाइडन और हैरिस यूएस कैपिटल के सामने ही शपथ लेंगे। (यह परंपरा राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने 1981 में शुरू की थी) . सामने नेशनल मॉल है। लेकिन शपथ ग्रहण को देखने के लिए परेड रूट से सटा कर बनाए गए स्टैंड हटाए गए हैं।


पहले आधिकारिक समारोह देखने के लिए दो लाख टिकट जारी होते थे। लेकिन इस बार पूरे अमेरिका में कोरोना संक्रमण को देखते हुए सिर्फ़ एक हजार टिकट ही जारी होंगे।


इस साल भी पास-इन रिव्यू समारोह होगा। यह शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण का एक पारंपरिक हिस्सा है, जिसमें नए कमांडर इन चीफ सैनिक टुकड़ियों का जायजा लेते हैं। लेकिन आयोजकों का कहना है कि अब पेन्सिलवेनिया एवेन्यू से व्हाइट हाउस तक सामान्य परेड की जगह पूरे अमेरिका में वे वर्चुअल परेड का आयोजन करेंगे।

इसके बाद सेना के सदस्य बाइडन और हैरिस को व्हाइट हाउस में ले जाएँगे। उनके साथ बैंड और ड्रम बजाने वाली टुकड़ी भी होगी।


इनॉगरेशन का टिकट कैसे मिलेगा?


स्टेज के सामने बैठने और खड़े होने और परेड रूट से लगे इलाक़े में बैठने के लिए टिकट लेने की ज़रूरत होती है। लेकिन बाक़ी का नेशनल मॉल आम लोगों के लिए खुला होता है।


अगर आप इनॉगरेशन समारोह को नज़दीक से देखना चाहते हैं, तो आपको पहले अपने स्थानीय प्रतिनिधि से बात करनी होगी।


इनॉगरल बॉल्स और समारोह से जुड़े अन्य कार्यक्रमों के लिए अलग से टिकट लेने की ज़रूरत पड़ती है। सीनेटरों और कांग्रेस के सदस्य इस समारोह की देखरेख में लगे होते हैं। हरेक को कुछ फ़्री टिकट दिए जाते हैं, जो वे लोगों को बाँट सकते हैं। इस बार कोरोना संक्रमण की वजह से एक प्रतिनिधि के साथ एक मेहमान आ सकता है।


इस बार स्टेज पर कौन परफॉर्म करेगा?



बेयॉन्स ने ओबामा के दोनों ही बार के शपथ ग्रहण समारोह में गाया था।


बाइडन ने अभी यह नहीं बताया है कि उनके शपथ ग्रहण समारोह के बाद उनके साथ स्टेज पर कौन स्टार होगा। हालाँकि यह उम्मीद की जा रही है कि इस बार भी कोई बड़ा स्टार परफॉर्म करेगा।


हाल के वर्षों में हर राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह में देश के पसंदीदा कलाकारों ने अपना प्रदर्शन किया है। 2009 में आर्था फ्रैंकलिन ने बराक ओबामा के इनॉगरेशन कार्यक्रम में My Country 'Tis of Thee. गाया था। साथ में बेयॉन्से भी थीं, जिन्होंने इनगॉरल बॉल में अपना मशहूर गाना 'एट लास्ट' गाया था।


2013 में बराक ओबामा ने केली क्लार्कसन और जेनिफर हडसन को आमंत्रित किया था। बेयॉन्से इस बार फिर आ रही हैं, लेकिन इस बार वह राष्ट्रीय गान गाएँगीं।


हालांकि डोनाल्ड ट्रंप को कलाकारों को बुलाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। एल्टन जॉन ने परफॉर्म करने से मना कर दिया था। ऐसी खबरें थीं कि सेलिन डियोन, किस और गार्थ ब्रुक्स ने भी परफॉर्म करने से इनकार कर दिया था। आखिर में रॉकेट्स, कंट्री आर्टिस्ट ली ग्रीनवुड और बैंड-3 डोर्स इनॉगरेशन में आने के लिए राज़ी हुए थे।


जनवरी में ही इनॉगरेशन क्यों होता है?


ऐसा नहीं है कि सिर्फ़ जनवरी में ही इनॉगरेशन होना है। संविधान में पहले 4 मार्च को नए नेताओं के शपथ लेने के दिन के तौर पर तय किया गया था। नवंबर के चार महीने के बाद शपथ ग्रहण समारोह आयोजित करने का फ़ैसला तय किया गया था।


उस वक़्त के हिसाब से यह ठीक था, क्योंकि राजधानी तक चुनाव नतीजे पहुँचने में इतना समय लग जाता था। लेकिन नए राष्ट्रपति के शपथ लेने और पूर्व राष्ट्रपति के बने रहने का चार महीने का यह समय काफ़ी लंबा था. यहाँ इसे Lame duck Period कहा गया।


लेकिन आधुनिक तकनीकों की वजह से वोटों की गिनती तेज़ हो गई। नतीजे जल्दी आने लगे। इसलिए चार महीने की यह अवधि बदल दी गई। इसके लिए 20वाँ संशोधन किया गया, जिसे 1933 में पारित किया गया। इसके मुताबिक़, 20 जनवरी को ही नए राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण का दिन तय हुआ।


टीम स्टेट टुडे


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