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केस्को के 1.48 करोड़ की ठगी का मामला


कानपुर, 10 अगस्त 2023 : केस्को के 1.48 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में बिजली कंपनी की वेबसाइट का रखरखाव करने वाली एजेंसी शक के दायरे में है। पुलिस को शक है कि हो न हो, इसी एजेंसी में कोई विभीषण है, जिसने गेट-वे के यूआरएल के बारे में साइबर ठगों को जानकारी दी। फिलहाल पुलिस की नजर रांची में बैठे मास्टर माइंड साफ्टवेयर इंजीनियर कुंदन पर है।

अनुमान है कि एजेंसी का जो भी कर्मचारी मिला है, उसके संबंध कुंदन से हैं और उसकी गिरफ्तारी के बाद ही आगे की कड़ी पकड़ में आएगी। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक आइसीआइसीआइ बैंक के लिए इजी पे नाम की कंपनी गेटवे का इंतजाम करती है। गेटवे को अलग-अलग करने के लिए सभी के यूआरएल नंबर है, जिसकी जानकारी संबंधित खाता धारक को हाेता है।

अब तक हुई जांच में सामने आया है कि साइबर ठगों ने हर दिन कुछ-कुछ देर के लिए केस्को के गेटवे का यूआरएल नंबर बदल कर केस्को इलेक्ट्रानिक्स का कर दिया। मिलता जुलता नाम इसलिए रखा ताकि उपभोक्ता जब पैसा जमा कर रहा हो तो पेमेंट आप्शन आने पर उसे शक न हो। मिलता जुलता नाम होने से उपभोक्ता समझ ही नहीं पाए कि केस्को और केस्को इलेक्ट्रानिक्स में क्या अंतर है।

गेट-वे के यूआरएल नंबर की जानकारी केस्को की वेबसाइट का रखरखाव करने वाली एजेंसी के पास थी। अनुमान लगाया जा रहा है कि सूचनाएं साइबर ठगों को दी गईं। हालांकि जांच यह भी हो रही है कि कहीं साफ्टवेयर इंजीनियर कुंदन केस्को की वेबसाइट का मेंटीनेंस करने वाली कंपनी से तो जुड़ा नहीं है। वहीं दूसरी ओर पुलिस को अभी भी खाता धारक महिला सुमन का पता नहीं लगा है, जबकि उसके पति योगेंद्र को गिरफ्तार कर लिया गया है। हालांकि योगेंद्र का कहना है कि उसकी पत्नी के नाम विवेक और सु़हैल ने केवल खाता खुलवाया था।

गिरफ्तार ठगों के पास मिले 31 मोबाइल और 30 एटीएम

पुलिस ने डेढ़ करोड़ की ठगी के मामले में गिरफ्तार छह आरोपितों के पास से 31 मोबाइल और 30 एटीएम बरामद हुए हैं। इससे गिरोह की सक्रियता के बारे में पता चलता है। पुलिस यह भी पता करने की कोशिश कर रही है कि इन्होंने कहीं और भी तो ठगी नहीं की है।

इस तरह से निकाली गई रकम

पुलिस के मुताबिक क्राइम ब्रांच की साइबर सेल समेत पुलिस की चार टीमों को मेरठ, बागपत और उसके आसपास के शहरों में भेजा गया था। जांच में सामने आया है कि केस्को का पैसा आइसीआइसीआइ बैंक की बड़ौत शाखा में केस्को इलेक्ट्रानिक के नाम से खुले करंट अकाउंट में भेजा गया।

यह करंट अकाउंट बागपत निवासी सुमन पत्नी योगेंद्र के नाम पर खुला है। इसके बाद विवेक और सुहैल ने अपने परिचितों व अन्य लोगों को लालच देकर विभिन्न बैंकों में खाते खुलवाए। सुहैल बिजली उपकरणों की खरीद फराेख्त का काम करता है और बिजली कंपनियों के लिए उपकरण सप्लाई की ठेकेदारी भी करता है।

वहीं विवेक शर्मा का बड़ौत में एक ढाबा है। कुंदन से सुहैल और सुहैल ने विवेक को जोड़ा। इसके बाद दोनों ने खाते खुलवाए। शक्ति के परिवार के नाम से इन्होंने पांच खाते खुलवाए। अनिल के तीन खाते खुले। इनके अलावा गिरफ्तार सभी चारों अभियुक्त आर्थिक रूप से बेहद कमजोर हैं, जिसका फायदा उन्होंने उठाया।

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