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चक्र-कुचक्र में फंसा किसान आंदोलन का चक्का जाम 2 अक्टूबर के अल्टीमेटम पर सिमटा, झंडे पर भिंडरावाला!



किसानों के नाम पर हो रहे आंदोलन में आज का दिन चक्का जाम के नाम था। पंजाब हरियाणा के कई इलाकों में चक्का जाम हुआ लेकिन उत्तर प्रदेश में इस चक्का जाम आह्रवान का कोई प्रभाव नहीं दिखा।


चक्का जाम के समापन पर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों को संबोधित करते हुए केंद्र को भी चेतावनी दी।


राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार तीनों कानून वापस ले और एमएसपी पर गारंटी कानून बनाए। बातचीत के लिए सरकार को पहले जैसा ही प्लेटफार्म तैयार करना होगा। टिकैत ने कहा कि अब अपने बेटों को फौज में भर्ती करने वाले किसान उनकी तस्वीरों के साथ आंदोलन में शामिल होंगे।


टिकैत ने कहा कि पूरे देश में किसान कानूनों के खिलाफ आंदोलन करेंगे। राकेश टिकैत ने यह भी कहा कि सरकार बातचीत के लिए तैयारी करे, वह 2 अक्तूबर तक आंदोलन चलाने के लिए तैयार हैं।


लुधियाना में भिंडरावाला की तस्वीर - क्या घुसे खालिस्तानी तत्व


केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसान यूनियनों के राष्ट्रव्यापी 'चक्का जाम' के दौरान पंजाब के लुधियाना शहर से हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां पर हो रहे किसानों के चक्का जाम के दौरान एक ट्रैक्टर में लगे झंडे में भिंडरावाले जैसे शख्स की तस्वीर दिखी है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या सच में चक्का जाम में भी खालिस्तानी तत्व घुसपैठ करने में कामयाब रहे?



दरअसल शनिवार को एएनआई न्यूज एजेंसी की ओर से लुधियाना में किसानों के चक्का जाम का एक वीडियो जारी किया है। इस वीडियो में एक ट्रैक्टर पर झंडा लगा है, जिसमें जरनैल सिंह भिंडरावाले जैसे शख्स की तस्वीर नजर आ रही है।




गाजीपुर बॉर्डर पर आज बोए गए आलू और गन्ने


दिल्ली पुलिस द्वारा लगाई गई कील वाले स्थान पर शुक्रवार को आंदोलनकारी किसानों ने मिट्टी डालकर फूल लगाए थे। शनिवार को दिल्ली पुलिस ने इस स्थान को अपने कब्जे में लेकर बैरिकेडिंग कर दी है। यहां पर पुलिस बल तैनात किया गया है। इसके बाद आज दिन में राकेश टिकैत ने एक बार फिर वहीं खेती की। आज उन्होंने आलू और गन्ना बोया। उन्होंने कहा कि खेतों में हल किसान चलाएगा और देश की रक्षा जवान करेगा। इस मिट्टी की रक्षा जवान करेगा।



दिल्ली, यूपी और उत्तराखंड में चक्का जाम का असर नहीं


26 जनवरी की घटना से सबक लेते हुए केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार, उत्तराखंड सरकार इस बार काफी सतर्क थीं। इन राज्यों में चक्का जाम का कोई प्रभाव दिखा भी नहीं। इस बाबत राकेश टिकैत ने सफाई दी कि यूपी और उत्तराखंड में चक्का जाम कार्यक्रम को रद्द नहीं किया है बल्कि टाला है, आगे फिर कभी इन दोनों राज्यों में यह कार्यक्रम किया जाए जाएगा।


राकेश टिकैत का कहना है कि उन्हें इनपुट गलत तरीके के मिले थे, हिंसा की गुप्त सूचना मिली थी। आंदोलन को बदनाम करने के लिए चार पांच जगहों पर गाड़ियों के शीशे तोड़े जाने की योजना थी। इन सब को ध्यान में रखते हुए यूपी, उत्तराखंड और दिल्ली में चक्का जाम के कार्यक्रम को फिलहाल टालना पड़ा।



12 बजे तक बंद रहेगी इंटरनेट सेवा


शनिवार को हरियाणा, पंजाब समेत देश के कई राज्यों में किसान संगठनों द्वारा तीन घंटे का चक्का जाम किया गया। इसी बीच, गृह मंत्रालय ने दिल्ली के सिंघु, गांजीपुर और टिकरी बॉर्डर पर इंटरनेट सेवाओं को एक बार फिर निलंबित करने का आदेश दे दिया है। यह इंटरनेट रात 12 बजे तक बंद रहेगा। इन इलाकों में किसान कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं।


वैसे किसान आंदोलन के नाम पर अब ना तो पहले की तरह समर्थन है और ना ही आम लोगों की हिस्सेदारी। इतना जरुर है कुछ राजनीतिक दलों को किसान आंदोलन होने, आंदोलन के दौरान हिंसा होने, आंदोलन टूटने और फिर से आंदोलन पर बैठने का नफा-नुकसान जरुर हुआ है।


गणतंत्र दिवस हिंसा के बाद दोबारा आंदोलन पर बैठे राकेश टिकैत ने अब 2 अक्टूबर का अल्टीमेटम देकर ये बता दिया है कि आंदोलनकारियों की तैयारी लंबी है।


टीम स्टेट टुडे


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