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यूपी: 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती में हाईकोर्ट से योगी सरकार को राहत, पक्ष में आया फैसला



प्रयागराज हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ से योगी सरकार को बड़ी जीत मिली है। यूपी में करीब डेढ़ साल से अटकी 69000 सहायक शिक्षकों की भर्ती को हाईकोर्ट ने हरी झंडी दिखा दी है। पिछले साल प्रदेश सरकार द्वारा भर्ती प्रक्रिया शुरू करते ही कट ऑफ पर विवाद छिड़ गया था।


यूपी सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले का तहे दिल से स्वागत किया है मुख्यमंत्री योगी ने ऐसे सभी सफल अभ्यर्थियों को आने वाले समय में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में योगदान देने के लिए अपनी शुभकामनाएं दी हैं। एक दिन पहले ही यूपी के डबल एजी विनोद शाही ने भी इस संबंध में सीएम से मुलाक़ात की थी। जस्टिस पंकज कुमार जायसवाल और जस्टिस करुणेश सिंह पवार की खंडपीठ ने बुधवार को ये अहम् फैसला सुनाया। इससे पहले सिंगल बेंच ने भी यही फैसला दिया था। लेकिन पुनर्विचार अपील दायर हो गयी थी।



हाईकोर्ट ने साफ़ तौर पर सरकार को निर्देशित किया है तीन महीने के अंदर भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाए। कोर्ट ने सरकार की ओर से भर्ती के लिए तय किए गए मानकों पर मुहर लगाई है। परीक्षा के बाद सरकार ने भर्ती का कटऑफ सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी के लिए 65 प्रतिशत व आरक्षित वर्ग के लिए 60 प्रतिशत की अनिवार्यता के साथ तय किया था। जिसके बाद तमाम अभ्यार्थियों ने हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में यूपी सरकार के फैसले को चुनौती दी थी। दरअसल बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों में 69 हजार सहायक शिक्षकों की भर्ती के लिए छह जनवरी 2019 को लिखित परीक्षा कराई गई थी। इन पदों के लिए करीब चार लाख अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी। आपको बता दें कि इस मामले में 3 मार्च को ही सुनवाई पूरी कर ली गई थी और कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया था।


हाईकोर्ट के फैसेल से उत्तर प्रदेश में 69000 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया का रास्ता साफ हो गया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने निर्णय सुनाते हुए कटऑफ अंक को 90-97 अंक निर्धारित किया, जिसकी मांग प्रदेश के लाखों अभ्यर्थी लगातार कर रहे थे। इससे पहले राज्य सरकार ने भी कट ऑफ अंक 90-97 निर्धारित किया था, जिसे कुछ अभ्यर्थियों ने कोर्ट में चुनौती दी थी।


लंबी कानूनी जंग के बाद मिली सफलता


इस भर्ती की अधिसूचना जनवरी 2019 में जारी हुई थी। जिसे प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फरवरी 2019 के आखिर तक पूरा कराने का आश्वासन दिया था। हालांकि कोर्ट में यह मामला लंबे समय तक खिंच गया। इस दौरान लाखों छात्र राजधानी लखनऊ समेत अलग अलग शहरों में धरना प्रदर्शन करते रहे। छ जनवरी 2019 को 69000 सीटें के लिए आयोजित सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा में चार लाख से अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए थे। परीक्षा के एक दिन बाद शासन ने इस परीक्षा का कट ऑफ निर्धारित किया। शासन द्वारा घोषित इस कटऑफ के खिलाफ कुछ अभ्यर्थी कोर्ट चले गए। तब से ये मामला कोर्ट में चल रहा था।

प्राथमिक शिक्षकों की भारी कमी है प्रदेश में


बेसिक शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनिसार प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में एक लाख 43 हजार 926 शिक्षकों की कमी है। शिक्षा के अधिकार कानून के अनुसार प्राइमरी स्कूलों में छात्रों और अध्यापकों का अनुपात 30 :1 होना चाहिए। सेंटर फॉर बजट एंड गवर्नेंस एंकाउटबिलिटी और चाइल्ड राइट्स एंड यू की एक रिपोर्ट के मुताबिक यूपी और बिहार जैसे राज्यों में ये अनुपात 50 :1 है।



टीम स्टेट टुडे


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