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मायावती की बढ़ी टेंशन:: योगी कैबिनेट में मिली बेबी रानी मौर्य को बड़ी जिम्मेदारी


उत्तर प्रदेश में योगी सरकार 2.O का आगाज हो गया है। लखनऊ के अटल बिहारी वाजपेयी इकाना स्टेडियम में योगी आदित्यनाथ ने लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। योगी के साथ उनके मंत्रियों ने भी शपथ ली है। 2024 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर बनाई गई योगी की नई टीम में कई नए चेहरों को भी शामिल गया है। नए चेहरों में उत्तराखंड की पूर्व राज्यपाल बेबी रानी मौर्य भी शामिल हैं।

मायावती के लिए बढ़ेगी टेंशन?

बेबी रानी मौर्य भी बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती की तरह जाटव समुदाय से आती हैं। माना जा रहा है कि भाजपा ने जाटव वोटर्स को ध्यान में रखकर ही बेबी रानी मौर्य को राज्यपाल के पद से इस्तीफा दिलवाकर विधानसभा चुनाव लड़वाया। यूपी के पिछले कुछ चुनावों में जिस तरह बहुजन समाज पार्टी लगातार कमजोर पड़ती गई है उससे पार्टी के समर्थक अब नया ठिकाना तलाश रहे हैं। माना जा रहा है कि इस विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने बसपा के वोट बैंक में बड़े पैमाने पर सेंधमारी की है।

बेबी रानी मौर्य ने नाम में जोड़ा जाटव

बेबी रानी मौर्य ने हाल ही में अपने नाम के साथ जाटव लिखना भी शुरू कर दिया है। दरअसल, जाटव समुदाय को मायावती का कोर वोट बैंक समझा जाता है। बुरे से बुरे दौर में भी जाटव समुदाय बसपा के साथ बना रहा है। अब बीजेपी की कोशिश इन्हें अपने पाले में लाने की है। माना जा रहा है कि इसी रणनीति के तहत बेबी रानी मौर्य को योगी कैबिनेट में शामिल किया गया है। उन्होंने कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।

घरेलू महिला से राजनीति तक का सफर

वर्ष 1995 में बेबीरानी मौर्य का भाजपा के साथ राजनीतिक सफर शुरू हुआ था, इससे पहले वे घरेलू महिला थीं। पार्टी में आते ही उन्हें मेयर पद के लिए मैदान में उतारा गया था। वे आगरा की पहली महिला मेयर बनी थीं। इसके बाद भी राजनीतिक सक्रिय रहीं।

वर्ष 2007 में उन्हें भाजपा ने एत्मादपुर विधानसभा क्षेत्र से मैदान में उतारा था, लेकिन हार का सामना करना पड़ा था। इसके पहले और बाद वे लंबे समय तक विभिन्न पदों पर रहीं। वर्ष 1997 में बेबीरानी मौर्य को भाजपा के राष्ट्रीय अनुसूचित मोर्चा की कोषाध्यक्ष बनाया गया था। वर्ष 2002 में राष्ट्रीय महिला आयोग का सदस्य बनाया गया था। 2018 में उन्हें बाल अधिकार सरंक्षण आयोग का सदस्य बनाया गया था। वे उस समय विदेश में थीं। जब तक पदभार ग्रहण करती तब तक राज्यपाल के लिए उनकी घोषणा हो गई थी।

बेबीरानी मौर्य के पति प्रदीप कुमार पंजाब नेशनल बैंक में डायरेक्टर पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। वे राजनीति में सक्रिय नहीं है, लेकिन उनका सहयोग करते हैं। मूलरूप से आगरा की निवासी बेबीरानी मौर्य का मायका बेलनगंज में हैं और उनकी ससुराल करियप्पा रोड पर है। आगरा ग्रामीण सीट पर भाजपा प्रत्याशी पूर्व राज्यपाल व पूर्व मेयर बेबी रानी मौर्य ने बसपा प्रत्याशी (हाथी चुनाव चिन्ह) किरन प्रभा केसरी को 76 हजार से अधिक मतों से हराया।

  • बेबीरानी मौर्य का राजनीतिक सफर

  • वर्ष 1995 में बेबीरानी मौर्य का घरेलू महिला से भाजपा के साथ राजनीतिक सफर शुरू हुआ था।

  • आगरा की पहली महिला मेयर बनी थीं।

  • वर्ष 1997 में भाजपा राष्ट्रीय अनुसूचित मोर्चा की कोषाध्यक्ष बनाया गया।

  • वर्ष 2002 में राष्ट्रीय महिला आयोग का सदस्य बनी।

  • वर्ष 2007 में उन्हें भाजपा ने एत्मादपुर विधानसभा क्षेत्र से मैदान में उतारा था, लेकिन हार का सामना करना पड़ा था।

  • वर्ष 2018 में उन्हें बाल अधिकार संरक्षण आयोग का सदस्य बनाया गया था।

  • वर्ष 2018 में उत्तराखंड की राज्यपाल बनाया गया।

  • वर्ष 2021 भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया।

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