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अब कोई भी संस्था पर्यटन स्थलों के विकास में बन सकेगी सहभागी


लखनऊ, 13 मई 2023 : अब प्रदेश के पौराणिक, अध्यात्मिक तथा धार्मिक पर्यटन स्थलों के विकास में सरकारी, गैर सरकारी संस्था के साथ-साथ निजी संस्थाओं व कंपनियां अपनी भागीदारी निभा सकेंगीं। इस संबंध में शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री पर्यटन विकास सहभागिता योजना के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई है।

शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव के पाारित होने के बाद निजी संस्थाओं, कंपनियों व एनजीओ तथा ट्रस्टों के लिए पर्यटन स्थलों के विकास में सहभागिता का रास्ता खुल गया है।

योजना के तहत अब कोई भी 50 प्रतिशत धनराशि खर्च करके पर्यटन स्थलों का विकास करवा सकेगा। जनप्रतिनिधियों के अलावा कोई भी प्रतिष्ठित व सक्षम व्यक्ति अथवा सरकारी,अर्धसरकारी,गैर सरकारी संस्था व संगठन प्रस्तावक हो सकेंगे।

सांसद द्वारा सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना, विधानसभा व विधान परिषद क्षेत्र के विधायक द्वारा विधायक निधि के अन्तर्गत उनकी मार्गदर्शन के अनुसार आच्छादित कार्यों हेतु परियोजना लागत की 50 प्रतिशत धनराशि का कन्वर्जेन्स प्रस्ताव दिया जा सकेगा।

इस योजना के तहत नगर निकायों तथा ग्राम पंचायतें भी यह प्रस्ताव दे सकेंगी। वहीं पर्यटन स्थलों की प्रबन्धन समिति व ट्रस्ट भी इस योजना का लाभ ले सकेंगे। ख्याति प्राप्त स्वयंसेवी संगठनों के फण्ड, कारपोरेट फर्म, वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों अथवा निजी क्षेत्र की कम्पनियों के सीएसआर द्वारा भी प्रस्ताव प्रस्तुत किया जा सकता है। एक से अधिक पर्यटन स्थलों का चयन सम्बन्धित प्रस्तावक द्वारा किया जा सकेगा। इस संबंध में संबंधित जिलाधिकारी द्वारा पर्यटन विभाग को प्रस्ताव तैयार करके भेजा जाएगा।

इस योजना के तहत पर्यटन स्थलों पर जनसुविधाओं का विकास, लैण्डस्केपिंग, सुन्दरीकरण, पार्किंग, गेट, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल व्यवस्था, एसटीपी, अण्डरग्राउंड विद्युतीकरण, सबमर्सिबल पम्प, ओवर हेड टैंक, फायर सेफ्टी उपकरण, स्वच्छता मशीनरी व उपकरण, सोलर लाइट्स, प्रसाधन सुविधाएं, जलाशय व नदी तथा कुण्ड के घाट एवं परिसर से सटे पार्किंग के कार्य पर्यटन स्थल के विकास में वृक्षारोपण, रेनवाटर हार्वेस्टिंग के कार्य कराए जा सकेंगे।

योजना का उद्देश्य प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के एक सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थल का चयन तथा पर्यटन सम्भावनाओं से परिपूर्ण अल्पज्ञात पर्यटक स्थलों को चिन्हित कर उसे उच्च स्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना है। इस योजना के अन्तर्गत न्यूनतम 25 लाख रुपये व अधिकतम 05 करोड़ रुपये तक के प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा।

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