आम जनता ही रोक सकती है बढ़ते डीजल-पट्रोल के दाम – करना पड़ेगा ये काम



पेट्रोल-डीजल की किफायत ही बचत का रास्ता है। कई प्रदेशों में पेट्रोल का दाम 100 रुपए प्रति लीटर को पार कर चुका है। डीजल का दाम भी आसमान छू रहा है। हर दिन तेल की कीमत नए रिकार्ड बना रही है। ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आखिर क्यों मंहगा हो रहा है डीजल-पेट्रोल। कैसे देश की जनता तेल के दाम नियंत्रित कर सकती है।


देश में पेट्रोल और डीजल का इस्तेमाल जितना ज्यादा होता है, उसकी कीमत भी उतनी ही ज्यादा है। अगर कभी यह सस्ता होता भी है, तो भी हमारी जेब पर इसका ज्यादा असर नहीं पड़ता। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में कमी के बावजूद हमारे देश में पेट्रोल-डीजल की कीमत कम नहीं होती। देश में ग्राहक पेट्रोल व डीजल के बेस प्राइस यानी एक्स फैक्टरी का लगभग तीन गुना ज्यादा दे रहे हैं। साल 2021 में पेट्रोल अब तक 6.07 रुपये महंगा हो चुका है। पिछले 10 महीने में ही इसके दाम में करीब 17 रुपये की बढ़ोतरी हो चुकी है।


क्यों होता है पेट्रोल की कीमत में अंतर


प्रीमियम पेट्रोल पर अधिक टैक्स लगाया जाता है। महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में 100 रुपये प्रति लीटर के आंकड़े को पार कर चुकी है। मध्यप्रदेश के अनूपपुर में पेट्रोल की कीमत 100.25 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 90.35 रुपये है। भोपाल में भी प्रीमियम पेट्रोल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गई। वैट जैसे स्थानीय करों और माल भाड़े के आधार पर ईंधन की कीमतें राज्यों में अलग-अलग होती हैं।

देश में राजस्थान पेट्रोल पर सबसे अधिक वैट वसूलता है। इसके बाद मध्यप्रदेश का स्थान है। मध्यप्रदेश में 33 फीसदी के साथ ही 4.5 रुपये लीटर का कर और पेट्रोल पर एक फीसदी उपकर लगाया जाता है। डीजल पर कर 23 फीसदी और तीन रुपये प्रति लीटर तथा एक फीसदी उपकर है। दरअसल, एक ही राज्य के अलग-अलग पेट्रोल पंप में परिवहन लागत भी अलग-अलग होती है, जिसके चलते निवासियों के लिए ईंधन की कीमत भी बढ़ जाती है और उन्हें अतिरिक्त राशि चुकानी पड़ती है।


भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक


भारत में खपत होने वाले तेल का 85 फीसदी हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। जब भी क्रूड सस्ता होता है, तो भारत को इसका फायदा होता है। तेल सस्ता होने की स्थिति में आयात में कमी नहीं पड़ती लेकिन भारत का बैलेंस ऑफ ट्रेड कम होता है। इससे रुपये को फायदा होता है क्योंकि डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में मजबूती आती है, जिससे महंगाई भी काबू में आ जाती है। सस्ते कच्चे तेल से घरेलू बाजार में भी इसकी कीमतें कम रहेंगी।


कच्चा तेल और पेट्रोल की कीमत


भारत की निर्भरता ब्रेंट क्रूड की सप्लाई पर है, ना कि डब्ल्यूटीआई पर। अगर ब्रेंट क्रूड की कीमत में एक डॉलर की कमी आती है, तो देश में पेट्रोल सस्ता होता है।


कच्चे तेल की कीमत में एक डॉलर की कमी का सीधा-सीधा मतलब है पेट्रोल जैसे प्रॉडक्ट्स के दाम में 50 पैसे की कमी। अगर क्रूड के दाम एक डॉलर बढ़ते हैं तो पेट्रोल-डीजल के भाव में 50 पैसे की तेजी आना तय माना जाता है।


मोदी सरकार में तेल के दामों में बढ़ोत्तरी

- साल 2014 में पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 9.48 रुपये प्रति लीटर था और डीजल पर 3.56 रुपये। 
- नवंबर 2014 से जनवरी 2016 तक केंद्र सरकार ने इसमें नौ बार इजाफा किया। 
- 15 सप्ताह में पेट्रोल पर ड्यूटी 11.77 और डीजल पर 13.47 रुपये प्रति लीटर बढ़ी। इसकी वजह से 2016-17 में सरकार को 2,42,000 करोड़ रुपये की कमाई हुई, जो 2014-15 में 99,000 करोड़ रुपये थी। 
- अक्तूबर 2017 में यह दो रुपये कम की गई। हालांकि इसके एक साल बाद ड्यूटी में फिर से 1.50 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया गया। 
-  जुलाई 2019 में यह एक बार फिर दो रुपये प्रति लीटर बढ़ा दी गई।
- केंद्र सरकार ने 16 मार्च 2020 और पांच मई 2020 को दो किस्तों में पेट्रोल पर एक्साइज 13 रुपये और डीजल पर 16 रुपये बढ़ाई। हालांकि इस बढ़ोतरी से तेल की कीमत प्रभावित नहीं हुई थी क्योंकि तब कई देशों में लगे लॉकडाउन से कच्चे तेल की मांग बेहद कम हो गई थी और दाम में भारी गिरावट आई थी। 
- राज्य सरकारों ने भी कोरोना काल में घटते राजस्व की भरपाई के लिए वैट की दरें बढ़ाईं। दिल्ली, महाराष्ट्र और कर्नाटक सहित कई अन्य राज्यों ने वैट में बढ़ोतरी की थी। 


तो इसलिए हर दिन महंगा हो रहा है तेल


कच्चे तेल की कीमत बीते 13 महीनों में अपने उच्चतम स्तर पर हैं। इस साल कच्चे तेल के दामों में 23 फीसदी तक का इजाफा हुआ है। एक जनवरी को कच्चे तेल की कीमत 51 डॉलर प्रति बैरल थी जो आज की तारीख में यह 63 डॉलर से अधिक है। वहीं, कोरोना से उबर रही दुनिया में आर्थिक गतिविधियां बढ़ी हैं, जिससे ईंधन की मांग में इजाफा हुआ है। परिणामस्वरूप इसकी कीमत भी बढ़ गई है।


घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमत लगातार बढ़ने वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ना है। सरकार इस पर एक्साइज ड्यूटी कम नहीं कर रही है। दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल पर 32.90 रुपये और डीजल पर 31.80 रुपये एक्साइज ड्यूटी लगती है। इसके अलावा राज्य सरकारें भी पेट्रोल-डीजल पर वैट भी लगाती हैं। इसके चलते कीमतों में इजाफा हो रहा है।


दरअसल डीजल पेट्रोल पर लगने वाला टैक्स सरकार की आय का बड़ा साधन है। इसी टैक्स कलेक्शन से सरकार विकास की कई योजनाओं को मूर्त रुप देती है। अगर देश की आम जनता डीजल पेट्रोल का रोजमर्रा में खर्च किफायत से करने लगे तो खपत में बड़ी कमी आएगी। जिससे सरकार को तेल का आयात कम करना पड़ेगा और कीमतें काफी हद तक स्थिर रहेंगी।


टीम स्टेट टुडे



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