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पब्लिक कंप्लेंट को हल्के में लेना 73 अफसरों को पड़ गया भारी, CM ने मांगा स्पष्टीकरण


लखनऊ, 1 सितंबर 2022 : जनता की समस्याओं के तुरंत समाधान को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी प्राथमिकता में रखे हैं, लेकिन तमाम अधिकारियों को इससे कोई लेना-देना नहीं है। थाने और तहसील की बात क्या की जाए, शासन स्तर पर बैठे विभागाध्यक्ष, मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, एडीजी, आइजी और एसएसपी की लंबी सूची है, जो जनसमस्याओं के निस्तारण में बाधक साबित हुए हैं। इससे नाराज सीएम योगी आदित्यनाथ ने इन सभी 73 अधिकारियों से स्पष्टीकरण तलब कर लिया है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर कार्रवाई का चाबुक चलना लगभग तय है।

जनता की शिकायतों के निस्तारण पर मुख्यमंत्री कार्यालय से पैनी नजर रखी जा रही है। समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली (आइजीआरएस) और सीएम हेल्पलाइन (1076) पर आने वाली शिकायतों के आधार पर विभागों की रैंकिंग जारी की जाती है।

जिन विभागों में शिकायतें ज्यादा लंबित रहती हैं, उसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पूरी रिपोर्ट तैयार की जा रही है। ऐसी ही जुलाई की रिपोर्ट तैयार हुई है, जिसमें शासन से लेकर थाना-तहसील स्तर के अधिकारी मुख्यमंत्री के राडार पर आ गए हैं।

सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि इस रिपोर्ट के आधार पर शासन स्तर के 10 विभागाध्यक्षों, पांच मंडलायुक्तों, 10 जिलाधिकारियों, पांच विकास प्राधिकरण उपाध्यक्षों, पांच नगरायुक्तों और 10 तहसीलों को नोटिस जारी किया गया है। इसी तरह पुलिस विभाग में तीन एडीजी, पांच आइजी-डीआइजी, 10 कमिश्नर, एसएसपी और एसपी सहित 10 थानों से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनसुनवाई पोर्टल पर जनसमस्याओं के निस्तारण में हीलाहवाली करने वाले इन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इन 73 अधिकारियों के स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाए जाते हैं तो इन पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।

इन विभागों का प्रदर्शन सबसे खराब : नियुक्ति, कार्मिक, आयुष, प्राविधिक शिक्षा, कृषि विपणन, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास, आवास एवं शहरी नियोजन, व्यावसायिक शिक्षा, नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति और पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन।

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