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तालीबान ने बदला अफगानिस्तान का नाम, इस्लामी सरकार ने मचाई चारों तरफ मारकाट, भयानक मंजर



तालिबान के दोमुंहे रवैये का पर्दाफाश होने में देर नहीं लगी। एक तरफ उसके नेता शांति और अमन पर दुनिया के सामने अपने चेहरे दिखाते रहे तो दूसरी तरफ तालिबानी आतंकियों ने एयरपोर्ट पर ही देश छोड़ कर भाग रहे नागरिकों पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। जिसमें चालीस से ज्यादा लोग मारे गए।


इस बीच तालिबान ने कहा है कि अफगानिस्तान का नया नाम 'इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान' होगा। यानी अब पूरी तरह से अफगानिस्तान एक इस्लामी देश हो चुका है और इस काम में उसकी हर कदम पर मदद करने वाला देश है पाकिस्तान।


अमेरिकी राष्‍ट्रपति ने तालिबान समेत दूसरे आतंकी संगठनों से खतरे को लेकर दुनिया को आगाह किया है। अमेरिकी राष्‍ट्रपति बाइडन ने कहा है कि तालिबान बिल्‍कुल भी नहीं बदला है। मौजूदा वक्‍त में वह अस्तित्व के संकट से गुजर रहा है। उन्‍होंने यह भी कहा कि हालिया वैश्विक बदलावों के चलते अल-कायदा और उनके सहयोगी संगठनों से खतरा दुनिया के अन्य हिस्सों में अफगानिस्तान की तुलना में काफी बढ़ गया है।


बाइडन ने कहा कि तालिबान अंतर्राष्ट्रीय समुदाय द्वारा एक वैध सरकार का दर्जा पाना चाहता है। अफगानिस्‍तान में हुए ताजा घटनाक्रम पर बाइडन ने कहा कि मौजूदा वक्त में अल-कायदा और उनके सहयोगी संगठनों से खतरा दुनिया के बाकी हिस्सों में अफगानिस्तान की तुलना में बढ़ गया है।



अमेरिकी राष्‍ट्रपति बाइडन ने दो-टूक कहा तालिबान अपने विश्‍वासों के प्रति ज्‍यादा प्रतिबद्ध है।


इस बीच अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद अमेरिका ने उसके खिलाफ सख्त कदम उठाया है। अमेरिका ने अपने यहां मौजूद अफगानिस्तान के सेंट्रल बैंक की करीब 9.5 अरब डॉलर (706 अरब रूपये) से ज्यादा की संपत्ति फ्रीज कर दी है। साथ ही अफगानिस्तान को होने वाली कैश आपूर्ति भी रोक दी है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमरेिका के राष्ट्रपति जो बाइडन का प्रशासन अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) पर तालिबान शासन को वित्तीय सहायता नहीं देने के लिए दबाव बनाए हुए था। जिसके बाद आईएमएफ ने अफगानिस्तान को करोड़ों डॉलर की वित्तीय मदद देने की योजना फिलहाल ठंढे बस्ते में डाल दी है।


बिना नगदी के सरकार चलाने की तैयारी में लगे तालिबान के लिए एक भारी संकट पैदा हो सकता है। क्योंकि तालिबान पर अमेरिका की सख्ती का मतलब है कि अब अफगान सरकार के सेंट्रल बैंक की कोई भी संपत्ति तालिबान इस्तेमाल नहीं कर सकता है। अफगानिस्तान के सेंट्रल बैंक के गर्वनर अजमल अहमदी ने बुधबार को इसकी पुष्टि की। अमेरिका से होने वाली नगदी की सप्लाई रोके जाने से अफगान नागरिकों की एटीएम के आगे लंबी कतारों में देखा गया। बैंकों से पैसे निकालने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।


आईएमएफ ने अफगानिस्तान किसी भी तरह की वित्तीय सहायता देने से इंकार कर दिया है। आईएमएफ अगले सप्ताह विशेष अधिकारों के तहत लगभग 460 मिलियन डॉलर देने की तैयारी में था। जो कोरोनोवायरस महामारी से पीड़ित विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को गति देने के लिए एक व्यापक कार्यक्रम का हिस्सा था। आईएमएफ की प्रवक्ता गेरी राइस ने अपने एक बयान में कहा, "आईएमएफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय के विचारों से निर्देशित होता है।" "वर्तमान में अफगानिस्तान में सरकार की मान्यता के संबंध में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के भीतर स्पष्टता की कमी है।" माना जा रहा है कि आईएमएफ यह फैसला यह देखते हुए ले रहा है कि काबुल में तालिबान शासन के साथ किसी भी सरकार ने अभी तक औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं बनाए हैं।


लिथियम का 'सऊदी अरब" बन सकता था अफगानिस्तान


देश में महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन हैं, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए आकर्षक साबित हो सकते हैं। तांबा, कोयला और लौह अयस्क सहित कई प्रकार के खनिज पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। तेल- गैस और कीमती पत्थर भी हैं। विशेष रूप से लिथियम धातु है जिसका उपयोग मोबाइल उपकरणों और इलेक्ट्रिक कारों के लिए बैटरी में किया जाता है।


एक आंतरिक अमेरिकी रक्षा विभाग के ज्ञापन में यह कहा गया था कि देश "लिथियम का सऊदी अरब" बन सकता है। बावजूद इसके सरकारों ने इसका कोई फायदा नहीं उठाया। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों को देखें तो पिछले दो सालों में नई "ग्रीनफील्ड" निवेश की कोई घोषणा नहीं की गई थी, जिसमें कोई विदेशी व्यवसाय स्थापित किया जाता है।


महिलाओं पर बंदिशों से अर्थव्यवस्था पर असर पड़ने की उम्मीद


अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाला एक अन्य कारक महिलाओं का रोजगार भी है। पिछले एक दशक में रोजगार में 15 साल से अधिक उम्र की महिला आबादी काम कर रही थीं। 2019 में 22% महिलाओं के पास रोजगार था। हालांकि यह तब भी भी अंतरराष्ट्रीय मानकों से कम था। तालिबान के कट्टर शासन आने के बाद महिलाओं पर कई तरह की बंदिशें लगने की संभावना है। इसलिए आर्थिक संभावनाओं को और नुकसान होगा।


अफगान नागरिकों के नशे के धंधे में उतरने की आशंका


अफगानिस्तान दुनिया का सबसे बड़ा अवैध अफीम आपूर्तिकर्ता है। यह स्थिति बने रहने की उम्मीद है क्योंकि तालिबान ने अब सत्ता हथिया ली है और उसकी कमाई का मुख्य जरिया अफीम की तस्करी रही है। लाखों अफगान नागरिकों का पलायन शुरू हो गया है। लोग अपना घर-बार छोड़कर भाग रहे हैं। लाखों लोगों के घर उजड़ गए। विदेशी सहायता में कटौती होने से अफगानिस्तान में एक गंभीर आर्थिक और मानवीय संकट पैदा होने लगा है। ऐसे में आशंका है कि इस वजह से कई बेसहारा अफगान जो वहां रह गए हैं वे जीवित रहने के लिए नशीले पदार्थों का व्यापार शुरू कर सकते हैं।


टीम स्टेट टुडे



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