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टोक्यो ओलंपिक में मीराबाई चानू ने जीता सिल्वर मेडल, वेटलिफ्टिंग से खुला भारत का खाता



भारत ने टोक्यो ओलिंपिक में अपने मेडल का खाता सिल्वर के साथ खोला है। वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने भारत को 49 किग्रा महिला वेटलिफ्टिंग में यह पदक दिलाया। 26 साल की मीराबाई ने क्लीन एंड जर्क के अपने दूसरे प्रयास में कुल 115 किग्रा वजन उठाकर नया ओलिंपिक रिकॉर्ड बनाया। कुछ देर बाद चीन की होऊ झीहुई ने अगले ही प्रयास में 116 किग्रा वजन उठाकर इसे तोड़ दिया।


चानू ने अपने पहले प्रयास में 84 किलोग्राम का भार उठाने का प्रयास किया। उन्होंने अपने अगले प्रयास में 87 किग्रा भार उठाया। इसके बाद तीसरे प्रयास में वो 89 किग्रा वजन उठाने आईं थी। अगर वो इस वजन को उठा लेती तो यह उनका पर्सनल बेस्ट होता। पिछले साल राष्ट्रीय चैंपियनशिप में उन्होंने 88 किग्रा का वजन उठाया था। पर वो इसमें विफल रहीं। ऐसे में स्नैच राउंड में उनका सबसे ज्यादा भार 87 किलोग्राम दर्ज किया गया।

स्नैच राउंड में वह दूसरे नंबर पर रहीं। पहले स्थान पर चीन की वेटलिफ्टर रहीं। उन्होंने 94 किलो वजन उठाकर नया ओलिंपिक रिकॉर्ड बनाया।


क्लीन एंड जर्क में, विश्व रिकॉर्ड धारक चानू ने पहले दो प्रयासों में 110 किग्रा और 115 किग्रा भार उठाया।हालांकि, वह अपने अंतिम प्रयास में 117 किग्रा वजन नहीं उठा पाईं।



कौन है मीराबाई चानू


8 अगस्त 1994 को मीराबाई चानू का जन्म इम्फाल (मणिपुर) में हुआ था। मीराबाई चानू जब छोटी थीं तब वो और उनके भाई जंगलों से लकड़ियां लाया करते थे। मीराबाई भारी से भारी लकड़ियों के बंडल को आसानी से उठा लेती थीं जबकि उनके भाई ऐसा नहीं कर पाते थे। जब वो 12 साल की थीं तब उनके परिवार ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और फिर उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। देश के लिए एक से बढ़कर एक उपलब्धि अपने नाम करने वाली मीराबाई चानू ने टोक्यो ओलिंपिक 2020 में 49 किलोग्राम भारवर्ग प्रतियोगिता में रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया। इससे पहले ओलिंपिक में किसी भी भारतीय वेटलिफ्टर ने रजत पदक नहीं जीता था।


टोक्यो ओलिंपिक में रजत पदक जीतने से पहले मीराबाई ने साल 2017 में वर्ल्ड चैंपियनशिप प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल अपने नाम किया था। इसके अलावा उन्होंने 2020 एशियन चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीता था तो वहीं कॉमनवेल्थ गेम्स 2014 में सिल्वर और 2018 में गोल्ड मेडल अपने नाम किए थे। उनकी शानदार उपलब्धियों की वजह से उन्हें साल 2018 में सबसे बड़े खेल पुरस्कार राजीव गांधी खेल रत्न से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा वो पद्मश्री से भी सम्मानित की जा चुकी हैं।


चानू तीरंदाजी में अपना करियर बनाना चाहती थीं लेकिन 8वीं कक्षा में उन्होंने वेटलिफ्टिंग में अपना करियर बनाने का सोचा। इम्फाल की वेटलिफ्टर कुंजरानी को प्रेरणा मानकर ही चानू को भी वेटलिफ्टिंग में दिलचस्पी हुई थी।


2016 के रियो ओलंपिक गेम्स के क्वालीफाई मैच में मीराबाई चानू ने उनकी आदर्श वेटलिफ्टर कुंजरानी को हराकर रियो ओलंपिक गेम्स में अपनी जगह बनाई।


26 वर्षीय मीराबाई चानू ने ओलंपिक खेलों की भारोत्तोलन स्पर्धा में पदक जीत कर भारत का 21 साल का इंतजार खत्म किया है। चानू से पहले 2000 सिडनी ओलिंपिक में कर्णम मल्लेश्वरी ने वेटलिफ्टिंग में भारत को कांस्य पदक दिलाया था। उन्होंने कुल 240 किलोग्राम भार उठाया।


बधाइयों का तांता


प्रधानमंत्री ने किया ट्वीट



प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ट्वीट में लिखा, 'भारत मीराबाई चानू के शानदार प्रदर्शन से उत्साहित है। भारोत्तोलन में रजत पदक जीतने के लिए उन्हें बधाई। उनकी सफलता हर भारतीय को प्रेरित करती है।


मणिपुर के मुख्यमंत्री ने जताई खुशी



मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने भी मीराबाई चानू को जीत की बधाई दी है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, 'आज का क्या दिन है, मीराबाई ने टोक्यो ओलंपिक में मेडल की शुरुआत कर दी है। उन्होंने वेटलिफ्टिंग की 49 किग्रा महिला वर्ग में मेडल जीतकर देश को गौरवान्वित महसूस कराया है।'


टोक्यो ओलंपिक पदक तालिका में भारत


मीराबाई के रजत पदक जीतने के बाद भारत अब पदक तालिका में चौथे स्थान पर पहुंच गया है। भारत के नाम अब एक मेडल हो चुका है। वहीं चीन के दो स्वर्ण और एक कांस्य पदक हो गए हैं जिसके साथ वह शीर्ष पर काबिज हो गया। इसके अलावा इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान और रिपब्लिक ऑफ कोरिया एक-एक स्वर्ण के साथ दूसरे स्थान पर पहुंच गया है।



टोक्यो ओलंपिक भारत की तरफ से अब तक का सबसे बड़ा दल पहुंचा है। इसमें कुल 127 खिलाड़ी हैं जो अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। दूसरे दिन हालांकि भारत को अन्य खेलों में निराशा भी हाथ लगी और निशानेबाजी और तीरंदाजी जैसे खेलों का परिणाम अनुकूल नहीं रहा।


इस बीच चानू कानों में ओलंपिक रिंग्स पहने नजर आईं, जो रियो ओलंपिक के दो महीने बाद उनकी मां ने उपहार में दिए थे।


मीराबाई चानू टोक्यो ओलंपिक्स में वेटलिफ्टर के तौर पर देश का प्रतिनिधित्व करने वालीं एकमात्र खिलाड़ी हैं।


टीम स्टेट टुडे


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